दरभंगा में बनेगा देश का पहला 3-डी प्रिंटेड टॉयलेट, सिंगापुर से हुआ समझौता

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सामाजिक संस्था सेंटर फॉर रुरल इनफार्मेशन एंड एक्शन (क्रिया), सिंगापुर की कंपनी और लैब की मदद से अब दरभंगा और मधुबनी में 3-डी प्रिंटेड शौचालय बनाने जा रही है.

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  • Last Updated: January 17, 2018, 1:39 PM IST
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सामाजिक संस्था सेंटर फॉर रुरल इनफार्मेशन एंड एक्शन (क्रिया), सिंगापुर की कंपनी और लैब की मदद से अब दरभंगा और मधुबनी में 3-डी प्रिंटेड शौचालय बनाने जा रही है. क्रिया और हैमिल्टन लैब के बीच हुए समझौते के मुताबिक दरभंगा के मनीगाछी स्थित निर्माण केंद्र (कंस्ट्रक्शन हब) के लिए हैमिलटन लैब्स क्रिया को अत्याधुनिक तकनीक वाली 3-डी प्रिंटर उपलब्ध कराएगी, जिससे मज़बूत, सुन्दर और आरामदायक शौचालय का निर्माण तेजी से किया जाएगा.

सात जनवरी को भारत की कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन इंडस्ट्रीज और सिंगापुर की इंटरनेशनल इंटरप्राइज के बीच एक समझौता हुआ है, जिसके तहत सामाजिक विकास के लिए दोनों देशों के बीच लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का आदान-प्रदान होगा. क्रिया और हैमिल्टन लैब के संयुक्त प्रयास से भारत में होने वाला यह पहला सामाजिक पहल होगा.

पीएम मोदी के स्वच्छ भारत मिशन का सबसे प्रमुख लक्ष्य है खुले में शौच से मुक्ति, लेकिन अभियान के शुरू हुए तीन साल से ज्यादा समय गुजर जाने के बाद भी उत्तर बिहार खुले में शौच से मुक्ति से कोसों दूर है. एक अनाधिकारिक आंकड़े के मुताबिक दरभंगा और मधुबनी जिला में इस अभियान के तहत लगभग 10 लाख शौचालय बनने हैं, मगर प्रशासनिक लापरवाही के कारण अब तक सिरेफ दस हजार से भी कम शौचालय बने हैं.



शौचालय बनने में हो रही देरी की मुख्य वजहों का ज़िक्र करते हुए क्रिया के सचिव डॉ श्याम आनंद झा ने कहा कि सरकार द्वारा जारी शौचालय के मॉडल के लिए प्रशिक्षित कारीगरों की भारी कमी है साथ ही सरकार द्वारा दी जाने वाली राशि के भुगतान में प्रखंड स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण जिस रफ्तार में शौचालय बननी चाहिए वो संभव नहीं हो पा रहा है.
शायामानंद झा के मुताबिक 3-डी प्रिंटर की मदद से दरभंगा, मधुबनी और आसपास के जिलों को खुले में शौच से मुक्त कर सकते हैं. खुले में शौच से होनेवाली गंभीर बीमारियों से त्रस्त पूरे उत्तर बिहार के लिए घर घर शौचालय की ज़रुरत के बारे में सामाजिक कार्यकर्ता डॉ रमण कुमार ने बताया कि यह एक सामयिक पहल है. इसके बिना अस्पतालों में लगने वाली मरीजों की बेकाबू भीड़ को रोकी नहीं जा सकती.

3-डी प्रिंटर से बनने वाले शौचालय के लिए कंस्ट्रक्शन हब का काम पूरा हो चुका. सिर्फ इंतजार है सिंगापुर से आने वाली रोबोटिक मशीन का. जो इस महीने के आखिर तक आने की सम्भावना है. स्थानीय कार्यकर्त्ता कन्हैया सिंह का कहना है कि क्षेत्र के हजारों लोग 3-डी प्रिंटर से बनने वाले शौचालय का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. इस काम की सफलता से इस पूरे क्षेत्र का परिदृश्य बदल जाएगा.

3-डी प्रिंटर से बनने वाले शौचालय की खासियत

यह शौचालय अपनी रूप रेखा में सरकार द्वारा तैयार मॉडल शौचालय की तरह ही दो लिच पिट वाला शौचालय है. शौचालय में इस बात का ख्याल रखा गया है कि शौचालय हवादार हो ताकि इस्तेमाल के वक़्त घुटन या गर्मी का अनुभव न हो. शौचालय के लिए पारम्परिक रूप से इस्तेमाल होने वाली ईंट की जगह फ्लाईऐश का इस्तेमाल किया जाएगा. इस तकनीकि के तहत अजैवकीय कचडों जैसे प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन आदि का इस्तेमाल किया जाएगा. लोगों को नौ से दस हजारे रुपये की कीमत पर इसे बनाकर दिया जाएगा.
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