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मैथिली साहित्य में 'अभिनव विद्यापति' के नाम से ख्यात साहित्यकार रविंद्रनाथ ठाकुर का निधन

कवि-गीतकार रविंद्रनाथ ठाकुर के निधन से मिथिलांचल में शोक पसरा. सीएम ने भी दुख जताया.

कवि-गीतकार रविंद्रनाथ ठाकुर के निधन से मिथिलांचल में शोक पसरा. सीएम ने भी दुख जताया.

Lyricist of Maithili's debut film: मैथिली की पहली फिल्म 'ममता गाएब गीत' में बतौर गीतकार उनका लिखा गीत 'भरी नगरी में शोर, बउआ मामी तोहर गोर, मम्मा चान सन...' आज भी खूब सुना जाता है. रविंद्रनाथ ठाकुर की लोकप्रियता का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि बाबा नागार्जुन ने उन्हें 'अभिनव विद्यापति' का उपनाम दिया था.

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हाइलाइट्स

मैथिली सिनेमा 'ममता गाएक गीत' के लिए रविंद्रनाथ ठाकुर के लिखे गीत आज भी लोगों के जेहन में जिंदा हैं.
रविंद्रनाथ ठाकुर लिखित 'भरी नगरी में शोर, बउआ मामी तोहर गोर, मम्मा चान सन...' आज भी खूब सुना जाता है.

दरभंगा. मैथिली साहित्य के लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकार रविंद्रनाथ ठाकुर का आज दिल्ली के एक निजी अस्पताल में 86 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. वे कई महीनों से बीमार चल रहे थे. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में बेटे के साथ रहकर दिल्ली में अपना इलाज करवा रहे थे.

रविंद्रनाथ ठाकुर का निधन मैथिली साहित्य के लिए अपूरणीय क्षति है. बिहार सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा गठित मैथिली अकादमी के निदेशक सह सचिव के पद पर भी वे रहे थे. मैथिली की पहली फिल्म ‘ममता गाएब गीत’ में बतौर गीतकार उनका लिखा गीत ‘भरी नगरी में शोर, बउआ मामी तोहर गोर, मम्मा चान सन…’ आज भी खूब सुना जाता है. रविंद्रनाथ ठाकुर की लोकप्रियता का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि बाबा नागार्जुन ने उन्हें ‘अभिनव विद्यापति’ का उपनाम दिया था. रविंद्रनाथ ठाकुर ‘प्रबोध साहित्य सम्मान’, ‘मिथिला रत्न सम्मान’ और ‘मिथिला विभूति’ जैसे लगभग डेढ़ दर्जन राष्ट्रीय पुरस्कारों से पुरस्कृत किए जा चुके थे.

रविंद्रनाथ ठाकुर की कृतियां

मैथिली सिनेमा ‘ममता गाएक गीत’ के गीत आज भी लोगों के जेहन में जिंदा हैं. रविंद्रनाथ ठाकुर ने हिंदी सिनेमा ‘आयुर्वेद की अमर कहानी’ का लेखन व निर्देशन किया था. इसके अलावा उन्होंने मैथिली फिल्म ‘नाच’ का निर्माण शुरू किया गया था, लेकिन यह फिल्म पूरी नहीं हो पाई. मैथिली साहित्य में रविंद्रनाथ की कृतियों की विशेष जगह है. उनके मैथिली गीतों के संग्रह हैं – ‘चलू चलू बहिना, ‘जहिना छी तहिना’, ‘स्वतंत्रता अमर हो हमर’, ‘प्रगीत’, ‘अतिगीत’, ‘रविंद्र पदावली (मैथिली गीत संग्रह)’. इनके अलावा उन्होंने ‘पञ्चकन्या’ और ‘नरगंगा’ नाम से मैथिली महाकाव्य की भी रचना की थी. उनकी मैथिली कविताओं का संग्रह है ‘चित्र-विचित्र’. उनके मैथिली उपन्यास ‘श्रीमान गोनू झा’ की चर्चा मैथिली साहित्य में खूब हुई है. ‘एक राति’ उनका मैथिली नाटक है जबकि ‘एक मिनट की रानी’ हिंदी नाटक. उनके मैथिली गजल संग्रह ‘लेखनी एक रंग अनेक’ को प्रयोगधर्मी रचनाशीलता के रूप में याद किया जाता है.

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बिहार सरकार के मंत्री संजय झा के ट्वीट का स्क्रिनशॉट.

भरा-पूरा परिवार

बता दें कि 7 अप्रैल 1936 में जन्मे रविंद्रनाथ ठाकुर मूल रूप से पूर्णिया जिले के धमदाहा के रहने वाले थे. वे अपने पीछे पत्नी के अलावा तीन बेटों और दो बेटियों से भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं. उनका अंतिम संस्कार गुरुवार को हरिद्वार गंगा घाट पर किया जाएगा.

मुख्यमंत्री ने जताया शोक

रविंद्रनाथ ठाकुर के निधन की खबर से मिथिलांचल में शोक की लहर दौड़ गई है. मैथिली कवि और गीतकार के रूप में याद करते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके निधन पर गहरा शोक जताया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि रविंद्रनाथ ठाकुर मंचीय गायन के लिए मैथिलीभाषियों के बीच काफी लोकप्रिय थे. बिहार सरकार के मंत्री संजय झा ने ट्विटर पर अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए मैथिली में लिखा. उन्होंने ट्वीट किया ‘जिनकर अमर गीत मिथिलाक गाम-गाम मे गुनगुनाइत अछि, मैथिलीक एहन लोकप्रिय गीतकार आ साहित्यकार श्री रवीन्द्र नाथ ठाकुर जीक निधन मिथिला आ मैथिली लेल अपूरणीय क्षति अछि। परमात्मा दिवंगत आत्मा के शांति आ शोक संतप्त परिवार के दुख सहय के शक्ति देथिन से प्रार्थना। परमात्मा दिवंगत आत्मा के शांति आ शोक संतप्त परिवार के दुख सहय के शक्ति देथिन से प्रार्थना।

Tags: Bihar News, Literature

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