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दरभंगा में बढ़ा 'रोटी बैंक' का दायरा, रोज ऐसे मिटाते हैं 500 लाचारों की भूख

News18 Bihar
Updated: August 1, 2018, 3:03 PM IST

न्य़ूज18 की टीम ने इन युवाओं के साथ पूरा वक्त देते हुए इनके काम करने के तरीकों को जाना और समझने की कोशिश की. शाम होते ही रोटी बैंक के फोन पर लोगों के कॉल आने शुरू हो जाते हैं.

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दरभंगा जिले में 'युवाओं का सपना भूखा न रहे कोई अपना' के ध्येय वाक्य और निःस्वार्थ भावना से रोजाना करीब 400 से 500 लोगों तक मुफ्त रात का खाना पहुंचता है. देश की राजधानी दिल्ली में भूख से तीन बच्चों की मौत की खबर ने जहां देशवासी को झकझोर दिया वहीं दरभंगा में कुछ युवाओ की टोली रोटी बैंक बनाकर पिछले सात महीनों से गरीब, लाचार और बेबस लोगो की पेट की आग बुझाने में लगा है. यह टीम रोजाना 400 से 500 लोगों तक रात का भोजन उपलब्ध कराता है.

जानकारी के मुताबिक शुरुआती दौर में लोगों ने इनका खूब मज़ाक उड़ाया, लेकिन सोशल मीडिया की ताकत और आम लोगों के सहयोग से युवाओं को खूब ऊर्जा मिली. अब लोग इनकी टीम को फोन कर अपने यहां का बचा हुआ खाना ले जाकर गरीबों को खिला देने की गुहार लगाते हैं. कुछ घर, रेस्टोरेंट और होटल तो इनके कायल हो गए हैं. रोज़ रात का खाना इन्हें मुहैया कराते हैं. देर शाम जगह-जगह से जमा किया गए खाना को देर रात तक युवाओं की टीम घूम-घूम कर भूखें लोगों को खिलाने का काम करते हैं.

न्य़ूज18 की टीम ने इन युवाओं के साथ पूरा वक्त देते हुए इनके काम करने के तरीकों को जाना और समझने की कोशिश की. शाम होते ही रोटी बैंक के फोन पर लोगों के कॉल आने शुरू हो जाते हैं. हर कोई बस एक ही गुहार लगाता है कि मेरे घर कुछ खाना बचा है. इसे आप ले जा सकते हैं. फोन करनेवालों का नाम-पता लेकर रोटी बैंक के सदस्य तुरंत बाइक से पहुंचकर खाना इकट्ठा कर लेता है. यह सिलसिला रात में दो-तीन घंटों तक या कभी ज्यादा चलता है. कुछ लोग तो हाथ में खाना लेकर खड़े भी देखे गए. रोज़ की तरह रोटी बैंक वाले समय पर उनसे खाना ले लेते हैं.

इनकी टीम की मदद करनेवाले लोग बताते हैं कि धीरे-धीरे अब दरभंगा के बड़े-बड़े रेस्टोरेंट भी अपने यहां के बचे खाने को ले जाने वालों के इंतजार में दिखते हैं. इसके बाद सभी खानों की पैकिंग शुरू होती है. इन्हें अलग-अलग पैक कर सब्ज़ी-रोटी के साथ अन्य खाने के सामान को रखकर अंधेरी रातों में रोटी बैंक की टीम सुनसान सड़कों पर निकल पड़ती है. उन्हें जहां भी लाचार लोग दिखाई देते हैं, वहां फौरन गाड़ी रोककर उन्हें न सिर्फ रात का खाना दिया जाता है बल्कि नाश्ते के लिए बिस्किट के पैकेट भी दिए जाते हैं. यह काम तब तक जारी रहता है जब तक टीम के पास का खाना खत्म न हो जाए.

इस दौरान रोटी बैंक के कोई एक सदस्य लगातार अपनी गतिविधियों का फेसबुक LIVE भी करते हैं. लोगों से शेयर करने की अपील करते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे देखे और मदद के लिए आगे आएं. इसका फाइदा रोटी बैंक को मिल रहा है. रोटी बैंक में काम करनेवाले सभी सदस्य अपना कारोबार करते हैं. खुद के काम से निपटने के बाद इस नेक काम में भागीदार होते हैं. सभी कामों को आपस में बांट दिया गया है ताकि एक आदमी को ज्यादा काम का बोझ न झेलना पड़े.

जरूरतमंद लोगों की भूख से संघर्ष कर रहे ये युवा दरभंगा रेलवे स्टेशन पर एक अनाथ बूढी महिला को रोज़ खाना देते हैं. साथ ही उनकी सेहत का भी ख्याल रखते हैं. क़रीब 85 साल की यह महिला चल नहीं सकती. बीमारी के कारण उनका एक हाथ भी काम नहीं करता है. रोटी बैंक के सदस्य उनके लिए कपड़े, दवा, पानी और खाने का खास इंतज़ाम करता है. उन्हें सब दादी कह कर सम्बोधित करते हैं.

( रिपोर्ट - विपीन )

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First published: August 1, 2018, 2:03 PM IST
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