लाइव टीवी

तेजस्वी-नीतीश मुलाकात: नीतीश की इस नई चाल का बिहार की राजनीतिक पर क्या असर पड़ेगा
Patna News in Hindi

Anil Rai | News18Hindi
Updated: February 26, 2020, 10:58 PM IST
तेजस्वी-नीतीश मुलाकात: नीतीश की इस नई चाल का बिहार की राजनीतिक पर क्या असर पड़ेगा
राजनीति के माहिर खिलाड़ी भी अब तक ये नहीं समझ पाये हैं कि ये चाल है किसकी, और क्यों चली गई है. (फाइल फोटो)

अब अचानक तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) और नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की मुलाकात के बाद बिहार (Bihar) की राजनीति (Politics) में कोई नई खिचड़ी पकती दिख रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 26, 2020, 10:58 PM IST
  • Share this:
पटना (Patna) : बिहार (Bihar) में विधानसभा चुनावों (Assembly Election) की उल्टी गिनती शुरू हो गई है, विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं वैसे-वैसे राजनीति (Politics) की शतरंज के मोहरे अपने खाने तेजी से बदल रहे हैं, और शतंरज की इस बिसात में नई चाल है आरजेडी नेता तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) और जेडीयू अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की मुलाकात. राजनीति के माहिर खिलाड़ी भी अब तक ये नहीं समझ पाये हैं कि ये चाल है किसकी, और क्यों चली गई है.

इस चाल के बाद बीजेपी को समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें और क्या बोले. पार्टी नेता फिलहाल अनुमान लगाने में जुटे हैं. हालांकि इसके पहले नीतीश कुमार ने पवन वर्मा और प्रशांत कुमार जैसे नेताओं को पार्टी से बाहर करके साफ संकेत दिया था कि बीजेपी और जेडीयू में सब कुछ ठीक-ठाक है. इन दोनों नेताओं को सिर्फ इसलिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया, क्योंकि दोनों नेता इस गठबंधन में नीतीश कुमार को बड़ा चेहरा बता रहे थे और बार-बार पार्टी लाइन क्रॉस करते हुए सीएए और एनआरसी जैसे मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ आग उगल रहे थे.

नीतीश ने दोनों को नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा कर साफ कर दिया कि भले ही बिहार में गठबंधन का चेहरा नीतीश कुमार हों, लेकिन देश में एनडीए का चेहरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही हैं और एनडीए की जो लाइन है राष्ट्रीय मुद्दों पर, जेडीयू की लाइन भी वही है. लेकिन अब अचानक तेजस्वी और नीतीश की मुलाकात के बाद बिहार की राजनीति में कोई नई खिचड़ी पकती दिख रही है.

नीतीश कुमार आखिर क्यों कर रहे हैं ऐसा



बिहार में विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. चुनाव में करीब 6 महीने तक का वक्त बचा है, ऐसे में बयानबाजी और मुलाकातों का दौर तेज होना लाजमी है. लेकिन तेजस्वी और नीतीश की मुलाकात की उम्मीद शायद बीजेपी को नहीं थी. इन दोनों नेताओं के बीच 20 मिनट तक चली इस मुलाकात के बाद बीजेपी अभी कुछ भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है. इससे पहले बिहार में एनआरसी लागू नहीं करने का फैसला कर नीतीश कुमार ने साफ कर दिया कि वह हर मुद्दे पर आंख बंद कर बीजेपी के पीछे नहीं चलेंगे.

जानकारों का मानना है कि बिहार में नीतीश कुमार का एनडीए से अलग, अपना अलग चेहरा है. बीजेपी के साथ होने के बाद भी बिहार के चुनावों में उनको अल्पसंख्यक वोट मिलते रहे हैं. अल्पसंख्यक वोटरों का एक बड़ा तबका यह मानता है कि नीतीश कुमार उनके हितैषी हैं और एनआरसी लागू नहीं करने के फैसले से नीतीश कुमार ने बिहार के उन्हीं वोटरों को संदेश देने की कोशिश की है कि भले ही वो सरकार बीजेपी के साथ चला रहे हों, लेकिन वह अपने इस वोट बैंक का बीजेपी के साथ रहते हुए भी ध्यान रखने में सक्षम हैं.

क्या नीतीश के मुलाकात की ये है असली वजह
ये पहला मौका नहीं है जब बीजेपी और नीतीश कुमार आमने-सामने हैं. इसके पहले बीजेपी नेता कमलेश पासवान ने बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी गठबंधन कोटे से बीजेपी के लिए मांग कर गठबंधन में बवाल मचा दिया था, हालांकि बाद में दोनों पार्टियों ने इस मामले पर चुप्पी साध ली और मामला दब गया. पिछले 2 साल में जब-जब स्थानीय नेताओं ने दोनों पार्टियों के गठबंधन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है, तब तब दोनों दलों के बड़े नेताओं ने उस पर सफाई दी और गठबंधन को मजबूत किया है.

ऐसे में जब चुनाव सर पर है तब जेडीयू सुप्रीमो और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद गठबंधन की लक्ष्मण रेखा क्यों लांघी? तेजस्वी यादव से मुलाकात कर नीतीश कुमार बिहार और एनडीए को क्या संदेश देना चाहते हैं? नीतीश कुमार को नजदीक से जानने वालों का दावा है कि नीतीश राजनीति में हर सुबह अपना फायदा-नुकसान देखते हैं. ऐसे में जब बिहार चुनाव सर पर है तो बीजेपी पर आंख बंद कर भरोसा नहीं करना चाहते हैं. क्योंकि महाराष्ट्र में जो हुआ उसके बाद नीतीश कुमार को भी लगने लगा है कि कहीं दोनों दल बराबर सीटों पर चुनाव लड़ते हैं और बीजेपी के विधायकों की संख्या ज्यादा होती है तो उनके हाथ से मुख्यमंत्री की कुर्सी जा सकती है.

बीजेपी पर दबाव का फार्मूला
ऐसे में नीतीश कुमार दो रास्ते पर काम कर रहे हैं- पहला रास्ता है कि वह बीजेपी पर दबाव बनाकर गठबंधन में ज्यादा से ज्यादा सीटें ले लें और 50-50 का फॉर्मूला लागू ना हो और अगर यह बात नहीं बनती है, तो नीतीश कुमार आरजेडी के साथ जाने का विकल्प भी खुला रखना चाहते हैं. उनके कई नेता पहले भी आरजेडी के साथ गठबंधन की बात कर चुके हैं. नीतीश कुमार ने पिछला विधानसभा चुनाव आरजेडी के साथ ही जीता था और सीटों की संख्या ज्यादा होने के बाद भी तेजस्वी ने सीएम की कुर्सी नीतीश के हवाले कर दी थी.

ऐसे में इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है कि नीतीश आरजेडी के साथ भी जा सकते हैं. महाराष्ट्र में बीजेपी को रोकने के लिए जिस तरह नया गठबंधन बना है, उसके बाद नीतीश भी इस संभावना पर ध्यान दे रहे हैं कि अगर बीजेपी उन्हें सीएम की कुर्सी देने में आना-कानी करती है तो बाकी विकल्प खुले रखे जा सकते हैं.

यह भी पढ़ें:
रामविलास पासवान बोले- नीतीश की हर बात मानी जा रही फिर वो दूसरे के साथ क्यों जाएंगे
नीतीश कुमार के 6 मास्टरस्ट्रोक... और धराशायी हो गए सब! पढ़ें, कैसे बदला सियासत का गणित
तेजस्वी यादव की 'गुगली' पर बोल्ड हुए सहयोगी, महागठबंधन में मची क्रेडिट लेने की होड़

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए पटना से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: February 26, 2020, 9:03 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर