बिहार में कोरोना की रफ्तार पर लगा ब्रेक, पटना समेत अन्य जिलों में मिले 100 से कम केस

बिहार में कोरोना की रफ्तार पर लगा ब्रेक File Pic)

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बिहार में पिछले 24 घन्टे में कोरोना से 52 मरीजों की मौत दर्ज की गई है तो वहीं 4130 मरीज स्वस्थ भी हुए हैं. राज्य में रिकवरी रेट बढ़कर 96.67 प्रतिशत तक पहुंच गया है

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पटना. बिहार में बेलगाम हो चुके कोरोना पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है तो वहीं मौत के आंकड़ों में भी कमी देखी जा रही है. राज्य में पिछले 24 घन्टे में जहां कोरोना के 1475 मरीज मिले हैं वहीं एक्टिव केस की संख्या भी घटकर अब 18377 तक पहुंच गई है. सबसे अच्छी बात ये है कि पटना के अलावे बिहार के सभी 37 जिलों में 100 से कम मिले हैं. पटना में जहां 161 मरीज मिले हैं वहीं अररिया में 63, बेगूसराय में 58, कटिहार में 63, खगड़िया में 38, सीवान में 44, सुपौल में 81, वेस्ट चम्पारण में 60, मधुबनी में 70, मुजफ्फरपुर में 81, नालन्दा में 84, पूर्णिया में 61, समस्तीपुर में 42, मधेपुरा में 50 और किशनगंज में 36 मरीजों में कोरोना की पुष्टि हुई है.

बिहार में कोरोना से मौत का आंकड़ा भी अब 50 के करीब पहुंच गया और राज्य में 24 घन्टे में 52 मरीजों की मौत दर्ज की गई है वहीं 4130 मरीज स्वस्थ भी हुए हैं. जिस तरह से बिहार के संक्रमण दर में तेजी से गिरावट हो रही है वहीं रिकवरी रेट में तेजी से वृद्धि हो रही है. राज्य में रिकवरी रेट बढ़कर 96.67 प्रतिशत तक पहुंच गया है, हालांकि संक्रमण में कमी आने के बाद भी सरकार की तरफ से सैम्पल जांच में कमी नहीं कि गई है और 24 घन्टे में कुल 100494 सैम्पल्स की जांच हुई है.

संक्रमण में कमी आने के बाद जहां सरकार लॉकडाउन को सबसे बड़ी वजह मान रही है वहीं आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सहजानंद सिंह ने भी कहा कि समय रहते बिहार में सरकार ने लॉकडाउन लगाने का फैसला लिया जिसके कारण हालात नियंत्रित हुई है और केसेज घटने लगे हैं. डॉ सहजानंद सिंह ने फिर से सरकार से मांग की है कि जब तक कोरोना संक्रमण खत्म नहीं हो जाता और पॉजिटिव मरीजों की संख्या में कमी नहीं आए तब तक सख्ती जरूरी है, ऐसे में सरकार अगर लॉक डाउन को आगे बढ़ाती है तो इसका बेहतर और सकारात्मक परिणाम आगे भी देखने को मिलेगा.

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