बिहार में बाढ़ का कहर जारी, पूर्वी चम्पारण में अब तक के इतिहास में सबसे भयानक हालात

पूर्वी चंपारण के कई गांवों में बाढ़ से बर्बादी का मंजर.

मोतिहारी इस साल बुरी तरह से बाढ़ की त्रासदी को झेल रही है. नेपाल से आने वाली गंडक, बुढी गंडक, सिकरहना, ललबकेया, बागमती, तिलावे, मसान, मरघर, धनौती सहित दर्जनों नदियों ने तबाही मचा रखी है.

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मोतिहारी. बिहार में बाढ़ (Bihar Flood) के हालात अभी भी बने हुए हैं. बाढ़ ने बिहार के 11 जिलों की 10 लाख से अधिक की आबादी को बुरी तरीके से प्रभावित किया है. पूर्वी चम्पारण में नेपाल से आने वाली नदियां लगातार परेशानी बढ़ा रही हैं. नदियों में आयी बाढ़ (Flood In Bihar) ने जिले के 14 प्रखंडों के 267 पंचायतों को अपने चपेट में लिया है. बाढ़ की विभिषिका से सबसे बुरा हाल बंजरिया प्रखंड का है जहां बुढी गंडक, सिकरहना नदी ने तबाही मचा रखी है.

पूर्वी चंपारण के 14 प्रखंड बाढ़ से प्रभावित

पूर्वी चम्पारण के अब तक के इतिहास में सबसे अधिक तबाही मचाने वाली बाढ़ इस साल का माना जा रहा है. जिले के 27 प्रखंडों में 14 प्रखंड बाढ़ से प्रभावित हो गये हैं तो वहीं जिले के 405 पंचायतों में 267 पंचायत बाढ़ की चपेट में हैं. मोतिहारी में करीब सात लाख की आबादी बाढ़ की त्रासदी को झेल रही है. नेपाल से आने वाली गंडक, बुढी गंडक, सिकरहना, ललबकेया, बागमती, तिलावे, मसान, मरघर, धनौती सहित दर्जनों नदियों ने तबाही मचा रखी है.

कई नदियां अभी भी उफान पर

नदियां उफान पर हैं और लगातार तबाही मचा रही हैं जिससे लगातार हो रही बारिश और बढ़ाती है. जिले का सबसे नीचला इलाका माना जाने वाला बंजरिया प्रखंड के सभी 13 पंचायत बाढ़ के पानी में डूबे हैं. पिछले एक सप्ताह से डूबे गांवों मे सरकार की ओर से कोई राहत नहीं पहुंच सकी है. ग्रामीणों को राहत सामग्री का इंतजार है. बाढ़ पीडित जमीला खातून और अफरीदा खातून बताती हैं कि अबतक कोई भी सहायता नहीं मिली है. स्थिति खराब है,लोग भूखे हैं. सेमरहियां पंचायत के पूर्व मुखिया इकबाल अहमद बताते हैं कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के अलावे स्थानीय मुखिया ने ग्रामीणों का हाल तक नहीं लिया है.

सरकारी उपेक्षा का आरोप

ग्रामीण आदिल अहमद और समशुल होदा बताते है कि बंजरिया प्रखंड के लिए एसडीआरएफ के दो मोटर बोट और सिमरहिया पंचायत के लिए एक छोटी नाव प्रशासन ने दिया है. प्रशासन ने इन नावों को बीमार लोगों को निकालने के लिए दिया है जो सिर्फ दिन में ही चलते हैं, ऐसे में किसी की तबीयत रात में बिगड़ती है तो दिन होने का इंतजार करना पड़ता है. ग्रामीण खुर्शीद आलम बताते है कि हरेक चुनाव में बंजरिया के गांवों के विकास और बाढ़ से मुक्ति को मुद्दा बनाता है, सभी आश्वासन देते हैं लेकिन आज तक कोई पहल नहीं की गई है.

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