East Champaran Lok sabha Result 2019, पूर्वी चंपारण लोकसभा रिजल्ट 2019: राधा मोहन सिंह की छठी जीत की ये रही वजह

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Updated: May 24, 2019, 2:53 AM IST
East Champaran Lok sabha Result 2019, पूर्वी चंपारण लोकसभा रिजल्ट 2019: राधा मोहन सिंह की छठी जीत की ये रही वजह
राधा मोहन सिंह के लिए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से लेकर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ तक ने चुनाव प्रचार किया था. (pti)

East Champaran Election Result 2019 (पूर्वी चंपारण इलेक्शन रिजल्ट २०१९) पूर्वी चंपारण लोकसभा परिणाम 2019: राधा मोहन सिंह जैसे पावरफुल कृषि मंत्री रह चुके और अनुभवी नेता के मुकाबले में 27 साल के युवा आकाश सिंह पर जनता ने भरोसा नहीं किया

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बिहार बीजेपी के दिग्गज नेता राधा मोहन सिंह छठी बार पूर्वी चंपारण सीट से जीत हासिल कर एक बार फिर संसद पहुंचे हैं. 2009 और 2014 के बाद उनकी ये लगातार तीसरी जीत है. राधा मोहन सिंह ने अपने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार आरएलएसपी के आकाश सिंह को 293648 वोटों से शिकस्त दी. राधा मोहन सिंह ने कुल 577787 वोट हासिल किए जबकि आकाश सिंह को 284139 वोट मिले.

राधा मोहन सिंह की जीत का समीकरण

-पूर्वी चंपारण सीट पर राधा मोहन सिंह जैसे पावरफुल कृषि मंत्री रह चुके और अनुभवी नेता के मुकाबले में 27 साल के युवा आकाश सिंह पर जनता ने भरोसा नहीं किया. मुकाबले में राधा मोहन सिंह ने शुरुआत में ही बढ़त बना ली थी.

-पूर्वी चंपारण की जनता ने स्थानीय मुद्दों को अनदेखा कर वोट किया. चुनाव में प्रधानमंत्री उम्मीदवार के तौर पर नरेंद्र मोदी की दमदार छवि को ध्यान में रखकर वोटिंग हुई. सर्जिकल स्ट्राइक, राष्ट्रवाद और आतंकवाद जैसे राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर वोटिंग ने राधा मोहन सिंह को फायदा पहुंचाया.

-राधा मोहन सिंह के लिए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से लेकर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ तक ने चुनाव प्रचार किया. संसदीय क्षेत्र में आखिर तक उनके समर्थन में माहौल बना रहा.

-2014 के चुनाव में बीजेपी और जेडीयू अलग-अलग होकर लड़ी थी. उस दौर में राधा मोहन सिंह ने करीब 2 लाख वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी. इस बार राधा मोहन सिंह को सवर्ण वोटबैंक के साथ जेडीयू के पिछड़े-अतिपिछड़े और दलितों का भी साथ मिला.

-महागठबंधन उम्मीदवार आकाश सिंह का जातीय समीकरण फेल हो गया. भूमिहार जाति से आने वाले आकाश सिंह को आरजेडी के यादव-मुस्लिम, आरएलएसपी के कोइरी और वीआईपी और हम जैसी पार्टियों के पिछड़े-दलितों के वोट बैंक का आसरा था. लेकिन जातियों का मजबूत गठजोड़ छिटक गया.
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2009 और 2014 के बाद ये राधा मोहन सिंह की लगातार तीसरी जीत है (twitter)
2009 और 2014 के बाद ये राधा मोहन सिंह की लगातार तीसरी जीत है (twitter)


-पूर्वी चंपारण में आकाश सिंह के स्वजातीय भूमिहारों के ढाई लाख वोट हैं. वहीं राधा मोहन सिंह की जाति राजपूत के भी एक लाख पैंसठ हजार वोट हैं. यादव-मुस्लिम वोट कुल मिलाकर 4 लाख से ज्यादा है, जिस पर महागठबंधन पर हक जताती है. वहीं वैश्य समुदाय के भी 4 लाख वोटर्स हैं, जो बीजेपी के पक्ष में वोट करते हैं.

-जातीय समीकरण बिठाने में इस सीट के कोइरी वोटर्स निर्णायक भूमिका में रहे. 2014 में इस क्षेत्र के ढाई लाख कोइरी वोटर्स ने बीजेपी को वोट दिया था. इस बार उपेन्द्र कुशवाहा की आरएलएसपी को कोइरी वोटबैंक का दावेदार बताया जा रहा था. कोइरी वोटर्स ने एकजुट होकर वोट नहीं किया. इसका फायदा राधा मोहन सिंह को मिला.

-सिर्फ 27 साल के आकाश सिंह की उम्मीदवारी को जनता ने गंभीरता से नहीं लिया. लोगों के बीच ये संदेश गया कि आकाश सिंह को सिर्फ अपने पिता (कांग्रेस के दिग्गज नेता अखिलेश सिंह) की वजह से टिकट मिला है. राधा मोहन सिंह जैसे दिग्गज बीजेपी नेता के सामने अनुभवहीन आकाश सिंह को उतारना महागठबंधन की भूल रही.

-इस सीट पर राधामोहन सिंह के कार्यकाल में कई बड़े कार्य हुए. रेलवे स्टेशन का सौंदर्यीकरण हुआ, रेलवे लाइन का विद्युतीकरण कार्य पूरा हुआ, दोहरीकरण कार्य जारी है, पीपराकोठी को कृषि के तीर्थ स्थल के रूप में विकसित किया गया, कोटवा में मदरडेयरी प्लांट की स्थापना की गई, हरसिद्धि में गैस बॉटलिंग प्लांट की स्थापना हुई. इन कामों ने राधा मोहन सिंह की जीत में अहम भूमिका निभाई.

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First published: May 24, 2019, 2:44 AM IST
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