नई मोदी कैबिनेट में क्यों नहीं हैं रामकृपाल यादव और राधामोहन सिंह?

राधामोहन सिंह मोतिहारी-पूर्वी चंपारण से छठी बार संसद पहुंचे हैं. हालांकि, कृषि मंत्रालय में उनके सहयोगी मंत्री रहे गजेंद्र सिंह शेखावत को मंत्रिपरिषद में जगह मिली है.

Vijay jha | News18 Bihar
Updated: May 31, 2019, 9:52 AM IST
नई मोदी कैबिनेट में क्यों नहीं हैं रामकृपाल यादव और राधामोहन सिंह?
फाइल फोटो
Vijay jha | News18 Bihar
Updated: May 31, 2019, 9:52 AM IST
नरेंद्र मोदी ने गुरूवार देर शाम दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ले ली. उनके साथ कुल 58 मंत्रियों ने भी पद और गोपनीयता की शपथ ली. हालांकि इस बार उनकी मंत्रिपरिषद का चेहरा बदल गया है. पिछली सरकार के 22 मंत्रियों को ड्रॉप कर दिया गया है. इनमें बिहार से कैबिनेट मंत्री रहे राधामोहन सिंह और केंद्रीय राज्यमंत्री रहे रामकृपाल यादव को इस बार टीम मोदी में शामिल नहीं किया गया.

बता दें कि राधामोहन सिंह मोतिहारी-पूर्वी चंपारण से छठी बार संसद पहुंचे हैं. हालांकि, कृषि मंत्रालय में उनके सहयोगी मंत्री रहे गजेंद्र सिंह शेखावत को मंत्रिपरिषद में जगह मिली है. राधामोहन सिंह को ड्रॉप किए जाने के पीछे उनका परफॉर्मेंस एक बड़ी वजह हो सकती है.

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ये है राधामोहन सिंह के न होने की वजह

चर्चा है कि पिछली सरकार में कृषि मंत्रालय का प्रदर्शन उतना बेहतर नहीं रहा, जितना अन्य मंत्रालयों का. इस मसले पर मोदी -1 की सरकार हमेशा घिरती रही और विपक्ष ने किसानों की समस्याओं को मुद्दा बनाया.

जाहिर है राधामोहन सिंह के इस बार पीछे छूट जाने का कारण हो सकता है. दरअसल कृषि मंत्रालय केंद्रीय कैबिनेट का महत्वपूर्ण प्रभाग है. जब राधामोहन सिंह मंत्री थे, तब इसके साथ ही पशुपालन और मत्स्य पालन भी जुड़ा हुआ था.

रामकृपाल बाहर क्यों?
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मोदी-वन में मंत्री रहे रामकृपाल यादव को भी मोदी-2 में जगह नहीं मिली है. रामकृपाल ने आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद की बेटी मीसा भारती को पाटलिपुत्र संसदीय क्षेत्र से हराया है. माना जा रहा था कि उन्हें इसका इनाम इस बार भी मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया.

दरअसल यह माना जा रहा है कि रामकृपाल की जगह नित्यानंद राय को मिली है. राजनीतिक दृष्टिकोण से रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा को हराकर नित्यानंद राय ने अपना कद बड़ा किया है. प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी एनडीए के दलों के साथ तालमेल और बेहतर प्रदर्शन का इनाम मंत्री पद के रूप में उन्हें मिला है.

जाति फैक्टर भी रही वजह

इस बार बिहार से राजपूत जाति से किसी एक को ही मंत्रिमंडल में शामिल होना था. ऐसे में आरके सिंह का दावा अधिक मजबूत रहा. दरअसल कृषि मंत्रालय में राधामोहन सिंह का काम ठीक-ठाक रहा, लेकिन पावर सेक्टर में आरके सिंह का काम बेहतरीन रहा. इसलिए उनको वरीयता मिली.

इसी तरह यादव जाति से बिहार में किसी एक चुना जाना था. ऐसे में पिछली सरकार में शामिल रामकृपाल यादव का पलड़ा थोड़ा हल्का रहा. अभी नित्यानंद राय प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष भी हैं और लोकसभा चुनाव में बीजेपी का शानदार प्रदर्शन भी इसकी एक वजह रही. वहीं उपेन्द्र कुशवाहा को मात देना भी एक फैक्टर रहा.

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First published: May 31, 2019, 7:15 AM IST
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