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Gaya News: विष्णुपद मंदिर में 10 प्रदूषण मुक्त शव दाह मशीन फिर भी गया में खुले में हो रहा है अंतिम संस्कार

खुले में होने वाले शवदाह से प्रदूषण को रोकने के लिए तथा विष्णुपद मंदिर को इसके धुंए से कोई खतरा न हो इसके लिए गया नगर न ...अधिक पढ़ें

    रिपोर्ट- कुंदन कुमार
    गया.खुले में होने वाले शवदाह से प्रदूषण को रोकने के लिए तथा विष्णुपद मंदिर को इसके धुंए से कोई खतरा न हो इसके लिए गया नगर निगम के द्वारा 8 करोड़ रुपए की लागत से गया का मोक्ष धाम विष्णुपद में पिछले वर्ष प्रदूषण मुक्त शवदाह मशीन लगाया गया था. लेकिन आज यह मशीन शोभा की वस्तु बन कर रहा है गई है. लोग खुले में ही शव का अंतिम संस्कार कर रहे हैं. विष्णुपद में 10 प्रदूषण मुक्त शव दाह मशीन लगाए गए हैं लेकिन घाट पर अंतिम संस्कार करने आए लोग खुले में ही दाह संस्कार करना पसंद कर रहे हैं.

    रोजाना 20 से भी अधिक शव दाह संस्कार के लिए आते हैं
    विष्णुपद मोक्ष घाट पर रोजाना 20 से भी अधिक शव दाह संस्कार के लिए आते हैं. लेकिन एकाध को छोड़ सभी खुले में जलाये जा रहे हैं. विष्णुपद में जिस जगह पर मशीन लगाए गए हैं. उससे महज 50 मीटर की दूरी पर फल्गु नदी के घाट के पास शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है. बताया जाता है फल्गु नदी के किनारे शव का दाह संस्कार करने पर रोक है. बावजूद लोग यहां अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने पहुंच रहे हैं. कहा जाता है हिन्दूरीति रिवाज से दाह संस्कार करने वाले विद्युत एवं गैस चालित संयंत्र पसंद नहीं करते लेकिन यह संयंत्र उनकी आस्था एवं विश्वास के अनुकूल है. इसकी विशेषता यह है कि शवदाह में नौ मन की जगह सिर्फ चार मन लकड़ी लगती है. समय भी चार-पांच घंटे की जगह एक घंटा. शवदाह के दौरान निकलने वाला दूषित हवा भी संयंत्र की मदद से शुद्ध हो जाती है. चिमनी की सहायता से 80 फीट ऊपर निकलती है.

    मशीन से दाह संस्कार करने में दूरी बना रहे हैं
    पिछले वर्ष अप्रैल महीने में बिहार के डिप्टी सीएम रहे तारकिशोर प्रसाद, केन्द्रीय राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे के द्वारा प्रदूषण मुक्त शवदाह मशीन का उद्घाटन किया गया था लेकिन लोग इस मशीन से दाह संस्कार करने मे दूरी बना रहे हैं. हालांकि यहां भी अंतिम संस्कार के समय रीति रिवाज के अनुसार चिता सजाना, मुखाग्नि, कपाल क्रिया सहित अन्य पंरपरा को पूरा कराया जाता है. बावजूद इसमे लोग दिलचस्पी नही ले रहे है. जिस उद्देश्य के साथ गया नगर निगम के द्वारा प्रदूषण मुक्त शवदाह मशीन लगाया गया था. आज वह उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा है. लोग खुले में ही शवदाह कर रहे हैं.

    जिला प्रशासन और नगर निगम इसपर ध्यान नहीं दे रही है
    मशीन आपरेटर जितेंद्र प्रसाद बताते हैं कि महीने में 15-20 शव ही मशीन में जल रहे है. बाकि शव खुले में ही जलाए जा रहे हैं. जिला प्रशासन और नगर निगम इसपर ध्यान नहीं दे रही है. मनाही के बावजूद लोग नदी किनारे दाह संस्कार कर रहे जिससे प्रदूषण फैल रहा है. इन्होंने प्रदूषण मुक्त शवदाह मशीन की खासियत बताते हुए कहा कि यहां भी हिन्दु रीति-रिवाज के तहत लकडी का चिता सजाया जाता है, मुखाग्नि होती है और आग देने के बाद इसे मशीन में डाल दिया जाता है. इससे निकलने वाला धुआं चिमनी के माध्यम से 80 फुट उपर निकलता है, जिस कारण प्रदूषण आसपास नहीं फैलता.

    Tags: Bihar News, Gaya news

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