गया: OTA से पास आउट 17 कैडेट्स बने सेना में अफसर, पासिंग आउट परेड के बाद ली शपथ
Gaya News in Hindi

गया: OTA से पास आउट 17 कैडेट्स बने सेना में अफसर, पासिंग आउट परेड के बाद ली शपथ
भारतीय सेना को मिले 17 नए अधिकारी

करीब चार साल की मेहनत के बाद सेना में अधिकारी बने 17 कैडेट्स आज बेहद खुश दिखे. न्यूज 18 से बात करते हुए रजत पद प्राप्त करने वाले लेफ्टिनेंट विपुल कुमार सिन्हा ने कहा कि उन्होंने बचपन से सेना में अधिकारी बनने का सपना देखा था और आज यह सपना पूरा हो गया है.

  • Share this:
गया. कोराना संक्रमण का असर हरेक समाज और संस्थान पर दिखा रहा है. गया स्थित ओटीए यानी ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (officer training academy) में आयोजित 17 वीं पासिंग आउट परेड में भी कोरोना  (Corona) का असर दिखा और यह बाकी 16 पास आउट से अलग दिखा. पहली बार इस समारोह में कैडेट्स के अभिभावक शामिल नहीं हुए और वर्चुअल (Virtual) तरीके से अपने घर से ही समारोह को देखा और फिर वीडियो कॉलिंग के जरिये अपने बेटे को सेना में शामिल होने पर बधाई शुभकामनाएं दीं. वहीं सेना में शामिल हुए 17 जवानों ने मुंह पर मास्क लगाकर शपथ ली. शपथ के बाद उन्होंने ओटीए की धरती को चूमकर खुशियां जाहिर की पर हाथ मिला और गले मिलकर एक दूसरे को बधाई देने की परम्परा को नहीं निभाया.

कोरानकाल में प्रशिक्षण देना ज्यादा चुनौतीपूर्ण
कमांडेट कोरोना की वजह से 17वी पासिंग आउट परेड में बाहर से किसी अतिथि को बुलाने के बजाय यहां के कमांडेट लेफ्टिनेंट जनरल सुनील श्रीवास्तव ने मुख्य परेड का खुद निरीक्षण किया. इस परेड में सेना में शामिल होने वाले 17 कैडेट्स के साथ ही एक साल का बुनियादी प्रशिक्षण प्राप्त कर दूसरे तकनीकी संस्थान में पढाई के लिए जा रहे 69 अन्य कैडेट्स भी शामिल हुए.

मीडिया से बात करते हुए कमाडेंट लेफ्टिनेंट जनरल सुनील श्रीवास्तव ने बताया कि उनके 2017 में एक साल का बुनियादी प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले 81 कैडेट्स भी इस साल यहां से पास आउट होने वाले थे पर कोरोनाबंदी की वजह से वे अपने संस्थान से वापस नहीं आ पाये . आज अपने तकनीकी प्रशिक्षण संस्थान सिकंदराबाद, मऊ और पुणे से ही पास आउट हो गये.
गया के ऑफिसर ट्रेनिंग एकेडमी में पासिंग आउट परेड के बाद मस्ती करते सेना के अफसर




समारोह में कैडेट्स के अभिभावको के शामिल नहीं होने के निर्णय करनवा काफी कठिन था क्योकि अपने बेटे को हर मां-बाप अधिकारी बनना देखना चाहता है. इसलिए उनलोगों ने यूट्युब चैनल और वीडियो कॉलिंग के जरिये कैडेट्स के अभिभावकों को वर्चुअल तरीके से इस खुशी के मौके से रूबरू कराने की कोशिश की.

तिरंगा के लिए हर बलिदान देने को तैयार
करीब चार साल की मेहनत के बाद सेना में अधिकारी बने 17 कैडेट्स आज बेहद खुश दिखे. न्यूज 18 से बात करते हुए रजत पद प्राप्त करने वाले लेफ्टिनेंट विपुल कुमार सिन्हा ने कहा कि उन्होंने बचपन से सेना में अधिकारी बनने का सपना देखा था और आज यह सपना पूरा हो गया है. वे तिंरगा की शान में हर बलिदान को तैयार हैं.

वहीं पश्चिम बंगाल के लेफ्टिनेंट असीम दास ने कहा कि कोरानाकाल में उनका ट्रेनिंग ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया था पर उनके प्रशिक्षकों ने उन्हें सेना के साथ ही कोविड से संघर्ष करने की ट्रेनिंग दी जिसकी वजह से आज वे और उनके सभी साथी बेहद खुश हैं.

लेफ्टिनेंट प्रवीण कुमार शर्मा ने कहा कि कोरोना की वजह से उनके माता-पिता का समारोह में ऩहीं आ पाये जिसका उन्हें अफसोस है क्योकि ट्रेनिंग शुरू होने के बाद से ही वेलोग यहां आकर उन्हें अधिकारी बनने देखना चाहतें थे. हलांकि बदली परिस्थिति में उन्होंने वीडियों कॉल के जरिये बात करते हमें बधाई दी है. कोरोनाकाल में हमें बहुच कुछ नया सीखने और विपरीत परिस्थिति में संघर्ष करने का जज्बा भी दे रहा है.

ये भी पढ़ें


नेपाल पुलिस के चंगुल से छूटे भारतीय की आपबीती- लाठीचार्ज के बाद दनादन गोलियां दागने लगे जवान




बंधक बनाए गए भारतीय नागरिक को नेपाल पुलिस ने छोड़ा, ऐसे सुलझा मामला

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading