Bihar Election 2020: गुरूआ पर NDA और महागठबंधन की नजर, क्या जीत का हैट्रिक लगाएगी BJP?

 प्रत्याशियों का खुलासा जल्द हो सकता है . (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)
प्रत्याशियों का खुलासा जल्द हो सकता है . (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

Bihar Assembly Election 2020: गुरूआ विधानसभा सीट (Gurua Assembly Seat) पर 2010 से 2015 कर बीजेपी (BJP) ने जीत हासिल की है. सीटों का पेंच सुलझने के बाद प्रत्याशियों का चेहरा साफ होगा.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: September 20, 2020, 3:34 PM IST
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गुरूआ. गया जिला के गुरूआ विधानसभा (Gurua Assembly Seat) की अनुमानित जनसंख्या 571681 और वोटरों की संख्या 279132 है. पुरुष वोटर की संख्या 144936, महिला वोटर की संख्या 134192 और थर्ड जेंडर की संख्या 4 है. इस समय भाजपा के राजीव नंदन दांगी यहां के विधायक हैं. उन्हौने जदूय के रामचंद्र प्रसाद सिंह को करीब 7 हजार वोट से हराया थ. राजीव नंदन दांगी को 56480 और जदयू के रामचन्द्र प्रसाद सिंह को 49965 वोट मिले थे. गुरूआ विधानसभा क्षेत्र के अधीन गुरूआ, गुरारू और परैया प्रखंड का क्षेत्र है. इस इलाके के लोगों का मुख्य कारोबार कृषि पर आधारित है.

इस विधानसभा क्षेत्र के गुरारू में अवस्थित गुरारू चीनी मिल कई दशक से बंद पड़ी हुई है. पिछले कई चुनाव में मिल को चालू कराने का आश्वासन विभिन्न दलों के प्रत्याशियों और सरकार ने दिया था पर यह आश्वासन आजतक पूरा नहीं हो पाया है. उत्तरी कोयल नहर परियोजना का लाभ अभी भी इस विधानसभा क्षेत्र के लोगों को नहीं मिल पा रही है जिसके लिए कई बार आन्दोलन हो चुका है.

1977 में हुआ था गुरूआ विधानसभा का गठन-



गुरूआ विधानसभा इस समय औरंगाबाद लोकसभा क्षेत्र के अन्तर्गत आता है. इस विधानसभा का गठन 1977 में किया था और उपेन्द्रनाथ वर्मा ने सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर कांग्रेस के कैप्टन शाहजहां को मात दी थी. वहीं 1980 के चुनाव में कैप्टन शाहजहां की विजय हुई थे. कैप्टन शाहजहां के आकस्मिक निधन के बाद 1982 में हुए उपचुनाव में उनके बेटे मो. अली खान को विजय मिली थी. 1985 में मो. अली खान को दोबारा जीत मिली थी. 1990 के चुनाव में रामाधार सिंह और 1995 में रामचन्द्र प्रसाद सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी की रूप में जीत दर्ज की थी. बर्ष 2000 से 2010 तक लगातर 10 साल तक राजद के शकील अहमद खान ने यहां का प्रतिनिधित्व किया और राबड़ी सरकार में मंत्री भी बने थे. 2010 में भाजपा के सुरेन्द्र प्रसाद सिन्हा ने राजद के बिंदी यादव को हराया था. वहीं 2015 में भाजपा के राजीव नंदन दांगी ने जदयू के रामचंद्र प्रसाद सिंह को शिकस्त दी थी. राजीव नंदन दांगी के पिता भी बेला से विधायक रह चुके हैं.
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2015 में भाजपा के राजीव नंदन दांगी ने जदयू के रामचंद्र प्रसाद सिंह को शिकस्त दी थी.


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एनडीए और महागबंधन में अभी प्रत्याशियों के चेहरे साफ नहीं
गुरूआ विधासभा क्षेत्र में अभी संभावित प्रत्याशियों के चेहरे स्पष्ट नहीं हो पाए हैं. एनडीए गठबंधन में भाजपा का सीट बरकार रहने पर वर्तमान विधायक राजीव नंदन दांगी को प्रत्याशी बनाया जा सकता है. पर उनको प्रत्याशी बनाए जाने के मुद्दे पर भाजपा के अंदर ही काफी विरोध है. ऐस में किसी नए नेता को भी मौका दिया जा सकता है. वहीं जदयू के भी कई नेता क्षेत्र से लेकर आलाकमान से तक अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं. महागठबंधन की तरफ से राजद के साथ ही कांग्रेस और रालोसपा के नेता इस सीट पर दावेदारी ठोक रहे हैं. कई नेता क्षेत्र में प्रचार भी कर रहे हैं, पर महागठबंधन में सीटों का पेंच सुलझने के बाद ही यहां महागठबंधन की तरफ से मैदान में उतरने वाली पार्टी और प्रत्याशी का खुलासा हो सकता है.
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