बाराचट्टी सीट: दांव पर भागवती देवी परिवार का वर्चस्व, बहन के खिलाफ भाई कर सकता है प्रचार

बाराचट्टी सीट पर मुकाबला दिलचस्प होगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
बाराचट्टी सीट पर मुकाबला दिलचस्प होगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Bihar Assembly Election 2020: सामाजिक रूप से जागृत पत्थर तोड़ने वाली महिला भागवती देवी एवं उसका परिवार बाराचट्टी विधानसभा (Barachatti एeat ) की राजनीति में धुरी बनी हुई है. समता देवी (Samta Devi) और ज्योति मांझी (Jyoti Manjhi) के बीच मुकाबला हो सकता है. 

  • News18 Bihar
  • Last Updated: September 19, 2020, 11:08 PM IST
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बाराचट्टी. अनुसुचित जाति के लिए सुरक्षित बाराचट्टी विधानसभा (Barachatti Assembly Seat) का गठन 1957 में किया गया था और श्रीधर नारायण इस विधानसभा क्षेत्र से पहले विधायक के रूप में निर्वाचित हुए थे. 1967 में इस विधानसभा सीट को अनुसुचित जाति के लिए आरक्षित किया गया था. तब से लेकर आज तक अनुसुचित जाति से जुड़े नेता इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते आ रहें हैं. पत्थर तोड़ने वाली भागवती देवी इसी विधानसभा क्षेत्र से पहली बार 1969 में सोशलिस्ट पार्टी से विधायक चुनी गयी थीं. पिछले कुछ चुनाव परिणाम को देखें तो 1990 में आईपीएफ से उमेश ,1995 में जनता दल से भागवती देवी, 1996 के उपचुनाव में जदयू से जीतनराम मांझी, 2000 में भागवती देवी, 2003 के उपचुनाव में राजद से समता देवी, 2005 के फरवरी चुनाव में राजद से विजय कुमार और 2005 के नवंबर माह के चुनाव में जेडीयू से जीतनराम मांझी,2010 में जेडीयू (JDU) से ज्योति मांझी और 2015 में राजद से समता देवी चुनाव जीती हैं.

पिछले 2015 के चुनाव में राजद की समता देवी ने लोजपा की सुधा देवी को लगभग 20 हजार मतों से हराया था. राजद की समता देवी को 70909 और लोजपा की सुधा देवी को 51783 मत मिले थे. इस बार के चुनाव में 299586 मतदाता हैं, जिसमें पुरूष मतदाता 154127 और महिला मतदाता 145443 है,जबकि इस विधाससभा की कुल जनसंख्या 613453 है.
पत्थर तोड़ने वाली भागवती देवी एवं उसके परिवार का वर्चस्व

सामाजिक रूप से जागृत पत्थर तोड़ने वाली महिला भागवती देवी एवं उसका परिवार बाराचट्टी विधानसभा की राजनीति में धुरी बनी हुई है. भागवती देवी खुद 1969,1995 और 2000 में तीन बार विधायक और 1996 में एक बार सांसद का चुनाव जीत चुकी हैं. वहीं भागवती देवी की बेटी समता देवी 2003 और 2015 में विधायक निर्वाचित हुई हैं, जबकि भागवती देवी का बेटा, 2005 के फरवरी में विधायक और 2019 के चुनाव में सांसद का चुनाव जीत चुका है. भागवती देवी के साथ ही पूर्व सीएम जीतनराम मांझी का भी इस इलाके में दबदबा है.
1996 में भागवती देवी के सांसद निर्वाचित होने पर जीतनराम मांझी यहां से विधायक चुने गये थे और उसके बाद 2005 के नवबंर महीने में भी वे यहां से निर्वाचित हुए थे. वहीं 2010 में बाराचट्टी की इस सीट से जीतनराम मांझी की समधन ज्योति मांझी चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंची थीं. ऐसी संभावना है कि राजद फिर समता देवी को मैदान में उतार सकती है. वहीं जीतनराम मांझी के जदयू के साथ जाने से यह सीट एनडीए से हम के खाते में जाने की बात कही जा रही है. हम के खाते में सीट जाने की स्थिति में इस सीट से जीतनराम मांझी की समधन सह पूर्व विधायक ज्योति मांझी या पूर्व सीएम के परिवार के किसी सदस्य के चुनाव लड़ने की संभावना है. वहीं राजद से समता देवी के मैदान में आने पर उनके सगे भाई और जदयू सांसद विजय कुमार मांझी उनके खिलाफ प्रचार करते नजर आएंगे क्योंकि लोकसभा चुनाव में समता देवी ने अपने भाई के खिलाफ महागठबंधन के उम्मीदवार जीतनराम मांझी के पक्ष में वोट मांगा था.



2015 के चुनाव में राजद की समता देवी ने लोजपा की सुधा देवी को लगभग 20 हजार मतों से हराया था.


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नक्सल समस्या के साथ ही क्षेत्र में सुविधाओं का अभाव

बाराचट्टी विधानसभा क्षेत्र में बाराचट्टी एवं मोहनपुर प्रखंड के साथ ही बोधगया प्रखंड की कुछ पंचायतें हैं. बाराचट्टी और मोहनपुर प्रखंड के कई इलाके पहाड़ और जंगल से घिरे हुए हैं, इसलिए इन इलाकों में अभी भी आधारभूत सुविधाओ यानी सड़क, पेयजल एवं स्वास्थय सुविधा के लिए लोगों को परेशान होना पड़ता है. वहीं इस विधानसभा क्षेत्र के सैकड़ों गावों में बिजली हाल कि दिनों में पहुंची है. नक्सलियों की कारगुजारी की वजह से भी इलाके के विकास में रूकवाट पैदा हुई है, क्योंकि नक्सली संगठन हर काम में लेवी वसूलते हैं. लेवी नहीं देने पर कंस्ट्रक्शन कंपनी को नुकसान पहुंचाते हैं. बाराचट्टी के झारखंड से लगे होने की वजह से दर्जनों गांवों में अफीम की खेती बड़े पैमाने पर होती है, जिसकी वजह से इलाके के युवा पैसे के लोभ में नशे के काले कारोबार में जुड़ जाते हैं जिसका खामियाजा उनके परिवार और समाज को भुगतना पड़ता है.
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