Bihar Election 2020: इमामगंज में दो धुरंधर चेहरों के बीच होगी कांटे की टक्कर, क्या बदलेगा समीकरण?

इमामगंज सीट पर मुकाबला दिलचस्प हो सकता है.
इमामगंज सीट पर मुकाबला दिलचस्प हो सकता है.

Bihar Assembly Election 2020: पूर्व विस अध्यक्ष उदयनारायण चौधरी (Udayanarayan Chaudhary) इस बार राजद के टिकट से चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं. तो वहीं वर्तमान विधायक जीतनराम मांझी (Jitan Ram Manjhi ) भी क्षेत्र में सक्रिय हो गए हैं. इमामगंज सीट पर पूरे बिहार की नजर बनी रहेगी. 

  • News18 Bihar
  • Last Updated: September 19, 2020, 7:07 PM IST
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गया. नक्सलियों का गढ़ माने जाने वाली इमामगंज विधानसभा (Imamganj Assembly Seat) 1957 में गठित की गयी थी और यहां के रानीगंज के जमींदार अंबिका प्रसाद सिंह ने निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए कांग्रेस की महिला नेत्री चंंद्रावती देवी को हराकर इस सीट पर कब्जा किया था. दूसरी चुनाव में भी अंबिका प्रसाद सिंह ने स्वतंत्र पार्टी के उम्मीदवार के रूप में कांग्रेस के जगलाल महतों को हराया था. 1967 में यह सीट अऩुसुचित जाति के लिए आरक्षित की गई थी. इसके बाद से यहां से लगातार अनुसुचित जाति से जुड़े नेता इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहें हैं. बिहार झारखंड एक साथ रहने की स्थिति में यह चतरा लोकसभा क्षेत्र के अन्तर्गत आता था, जबकि झारखंड के अलग राज्य बन जाने के बाद यह विधानसभा क्षेत्र अभी औरंगाबाद संसदीय क्षेत्र के अधीऩ हैं, जिसके सांसद भाजपा के सुशील कुमार हैं.

इस विधानसभा क्षेत्र के कई गावों में अभी भी आधारभूत सुविधाओं का अभाव है. पहाड़ी और जंगली इलाका होने की वजह से यह दशकों तक नक्सलियों की शरणस्थली बनी रही और यहां के लोग सैकड़ों नक्सली घटना का गवाह बने हुए हैं. नक्सली संगठन और पुलिस के बीच होने वाली मुठभेड़ की वजह से स्थानीय लोगों को कई तरह का नुकशान झेलना पड़ा है, पर अर्धसैनिक बलों के अभियान के शुरू होने के बाद इलाके में नक्सलियों का प्रभाव कमजोर हुआ है. पर अभी भी वे कई इलाकों में सक्रिय हैं.

पूर्व सीएम जीनतराम मांझी अभी कर रहे हैं प्रतिनिधित्व



अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित इमामगंज विधानसभा में अभी कुल 288861 वोटर हैं. इनमें से 149717 वोटर पुरूष, 139134 वोटर महिला और 10 वोटर थर्ड जेंडर हैं. इस विधानसभा क्षेत्र में कोयरी, मांझी, यादव और मुसलमानों की आबादी सबसे ज्यादा है. गठन होने के बाद 1957 और 1962 में लगातार अंबिका प्रसाद सिंह ने इस विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था. उसके बाद 1967 में काग्रेस के डी.राम,1969 में संसोपा के ईश्वरदास,1972 में काग्रेस के अवधेश राम,1977 में जनता पार्टी से ईश्वर दास,1980 और 1985 में कांग्रेस के श्रीचंद सिंह,1990 में जनता दल के उदयनारायण चौधरी,1995 में समता पार्टी के रामस्वरूप चौधरी,2005 और 2010 में जदयू से उदयनारायण चौधरी और 2015 में हम पार्टी के जीतनराम मांझी ने इस सीट पर जीत हासिल कर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है.
 पूर्व सीएम और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के बीच  मुकाबला होने की संभावना
2015 के विधानसभा चुनाव से इस बार के चुनाव का राजनीतिक समीकरण बदला है. पूर्व विस अध्यक्ष उदयनारायण चौधरी 1990 के बाद 2000, 2005 के फरवरी और 2005 के नवंबर के साथ ही 2010 में लगातार चार चुनाव में जीत दर्ज की थी और 2015 में उनके खिलाफ क्षेत्र में एंटी इनकमबेंसी फैक्टर काम कर रहा था. इस वजह से हम पार्टी के जीतनराम मांझी ने एनडीए गठबंधन से हम पार्टी के चुनाव चिन्ह पर करीब 30 हजार वोट से जदयू के उदयनारायण चौधरी को हराया था,जबकि उसी चुनाव में जीतनराम मांझी अपनी मकदूमपुर की सीट राजद के एक साधारण कार्यकर्ता सूबेदार दास से हार गये थे. 2015 के चुनाव में जीतनराम मांझी को इमामगंज सीट से 79389 और उदयनरायण चौधरी को 49981 वोटर मिला था.

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पूर्व विस अध्यक्ष उदयनारायण चौधरी इस बार राजद के टिकट से चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं. इसके लेकर वे क्षेत्र का लगातार दौरा कर जनसपंर्क अभियान चल रहे हैं. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री सह वर्तमान विधायक जीतनराम मांझी ने शुरू में अपनी 77 साल की उम्र का हवाल देकर चुनाव नहीं लड़ने की इच्छा जाहिर की थी. पर चुनाव से ठीक पहले महागठबंधन को छोड़कर जदयू के रास्ते एनडीए में आ जाने के बाद तस्वीर बदलती हुई दिखा रही है. सूत्रों की मानें तो बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने खुद ही जीतनराम मांझी को उदयनारायण चौधरी के खिलाफ इमामगंज से चुनाव लड़ने की सलाह दी है, जिसके बाद वे क्षेत्र ज्यादा सक्रिय हो गए है. ऐसी उम्मीद है कि उदयनारायण चौधरी और जीतनराम मांझी के एक बार फिर से मैदान में आने से यह इमामगंज सुरक्षित विधानसभा सीट पर पूरे बिहार की नजर बनी रहेगी.
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