Bihar Election 2020: तीसरी बार विरोधियों को मात देने की तैयारी में विनोद यादव, दावेदारों की फेहरिस्त लंबी

शेरघाटी सीट से विनोद कुमार चुनाव लड़ सकते हैं. 
शेरघाटी सीट से विनोद कुमार चुनाव लड़ सकते हैं. 

Bihar Assembly Election 2020: माना जा रहा है कि एनडीए की तरफ से शेरघाटी सीट पर फिर से जदयू के वर्तमान विधायक विनोद कुमार (Vinod Kumar) यादव दांव आजमा सकते हैं. मंजु अग्रवाल (Manju Agrawal) भी दावेदारी ठेक रहे हैं.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: September 20, 2020, 1:19 PM IST
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शेरघाटी. बिहार की शेरघाटी विधानसभा (Sherghati Assembly Seat) का लंबा इतिहास रहा है. स्वतंत्रता मिलने के बाद 1952 में शेरघाटी-इमामगंज के रूप में इसकी पहचान थी. उस समय यहां से दो-दो विधायक जगलाल महतो और देवधारी चमार चुने गए थे. फिर 1957 में इमामगंज अलग विधानसभा बन जाने के बाद शेरघाटी से 1957 से 1972 तक विधानसभा के लिए प्रतिनिधि चुने जाते रहे. 1977 में इस विधानसभा का नाम खत्म करते हुए शेरघाटी शहर को तत्कालीन बोधगया सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र से जोड़ दिया गया था. 2008 की परिसीमन के बाद 2010 से शेरघाटी नाम से नया विधानसभा क्षेत्र बनाया गया जिसमें शेरघाटी प्रखंड के साथ ही आमस और डोभी प्रखंड के इलाका को जोड़ा गया है. इस समय इस विधानसभा की कुल आबादी 5 लाख 40 हजार 232 है. इस विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या 269541 है. इसमें से 138864 पुरूष मतदाता, 130660 महिला मतदाता और 17 थर्ड जेंडर हैं.

इस विधानसभा में शहरी और ग्रामीण दोनों तरह के क्षेत्र हैं. दिल्ली से कोलकाता को जोड़ने वाली जीटी रोड इस विधानसभा के तीनों प्रखंड आमस, शेरघाटी और डोभी के बीचों-बीच गुजरती है जिसकी वजह से एक बड़ी आबादी जीटी रोड के किनारे कई तरह के व्यवसाय अच्छी आमदनी कर रहे हैं. वहीं इस विधानसभा क्षेत्र के कई इलाकों में जंगल और पहाड़ है जिसकी वजह से यहां विकास की रौशनी अभी भी पूरी तरह से नहीं पहुंच पाई है. नक्सली संगठन की सक्रियता की वजह से भी कई योजनाओं के पूरा होने या संचालित करने में परेशानी होती रही है, क्योंकि लेवी नहीं देने की स्थिति में ये संगठन कंस्ट्रक्शन कंपनी का निशाना बनाते हुए काम रोक देते हैं. वहीं शेरघाटी को जिला बनाने की दशकों पुरानी मांग पर हर राजनीतिक दल के नेता और प्रत्याशियों ने अभी तक सिर्फ आश्वासन ही दिया है. किसानों के खेतों तक सिचाई के लिए पानी अभी तक नहीं पहुंच पाई है.

पुनर्गठन के बाद से लगातार प्रतिनिधित्व कर रहे हैं विनोद यादव



शेरघाटी विधानससभा 2008 में पुनर्गठन के बाद नए सिरे से बनाया गया है. पुनर्गठन के बाद सबसे पहला विधानसभा चुनाव 2010 में सम्पन्न हुआ जिसमें जदयू के विनोद यादव ने जीत दर्ज की थी. 2013 में भाजपा से अलग होने के बाद नीतीश कुमार ने उन्हें पंचयातीराज विभाग का मंत्री भी बनाया था. 2010 के चुनाव में उनके खिलाफ राजद के दिग्गज नेता और बिहार सरकार में मंत्री रह चुके शकील अहमद खान थे. शकील अहमद खान पहले 2000 से 2010 तक लगातार गुरूआ से विधायक रह, पर परिसीमन में बदलाव की वजह से उन्होंने गुरूआ की जगह शेरघाटी से भाग्य आजमाया था. पर उस चुनाव में उन्हें बुरी तरह हार का मुंह देखना पड़ा और तीसरे नंबर से संतोष करना पड़ा था. फिर बाद में उनका देहांत भी हो गया. उस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मंजू अग्रवाल ने दूसरा स्थान हासिल किया था. 2010 में भाजपा की मदद से जीत दर्ज करने वाले शेरघाटी के जदयू विधायक 2015 के चुनाव में राजद की सहायता से मैदान में उतरे. उनका मकुाबला करने के लिए एनडीए से हम पार्टी ने मुकेश कुमार यादव को उतारा गया और मंजू अग्रवाल फिर से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में आई. इस चुनाव में विनोद यादव ने करीब 5 हजार वोटर से हम पार्टी के प्रत्याशी मुकेश यादव को हरा दिया. इस चुनाव में विनोद यादव को 44579 और मुकेश कुमार यादव को 39745 वोट मिले थे.
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शेरघाटी को जिला बनाने की दशकों पुरानी मांग पर हर राजनीतिक दल के नेता और प्रत्याशियों ने अभी तक सिर्फ आश्वासन ही दिया है.




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प्रत्याशी को लेकर असमंजस की स्थिति

जीतनराम मांझी की हम पार्टी की महागठबंधन में आने से दोनों गठबंधन में हॉच पॉच की स्थिति बनी हुई है. सूत्रों के मुताबिक, एनडीए की तरफ से इस सीट पर फिर से जदयू के वर्तमान विधायक विनोद कुमार यादव पर ही दांव आजमाया जा सकता है, पर सहयोगी दल भी इस सीट के लिए दवाब बना रहे हैं. वहीं महागठबंधन में इस सीट को लेकर अभी तक किसी तरह का निर्णय नहीं हो पाया है. निर्दलीय चुनाव लड़कर 2010 में दूसरे स्थान और 2015 में तीसरे स्थान पर रहने वाली मंजु अग्रवाल राजद पार्टी ज्वाइन कर चुकी हैं. ऐसे में मंजु अग्रवाल समेत राजद के कई नेता इस सीट से दावेदारी ठेक रहे हैं. इसके लिए वे आलाकमान को आवेदन देने के साथ ही क्षेत्र में भ्रमण भी कर रहे हैं. वहीं पप्पु यादव की जाप पार्टी से जिला पार्षद उमैर खान समेत अन्य छोटी पार्टी के नेता भी चुनाव लड़ने के लिए ताल ठोकते हुए प्रचार अभियान में जुट गए हैं.
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