Bihar Election 2020: क्या प्रेम कुमार का किला ढाहने में सफल हो पाएगी महागठबंधन?

राजद और जदयू अभी तक इस सीट से चुनाव मैदान में नहीं उतरी है.
राजद और जदयू अभी तक इस सीट से चुनाव मैदान में नहीं उतरी है.

Bihar Assembly Election 2020: 1990 से लेकर अभी तक हुए कुल 7 विधानसभा चुनाव में प्रेम कुमार ने लगातार जीत हासिल करते 30 साल तक इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने का इतिहास रचा है. राजद (RJD) और जदयू (JDU)अभी तक इस सीट से चुनाव मैदान में नहीं उतरी है.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: September 20, 2020, 4:55 PM IST
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गया. बिहार के गया शहर (Gaya City) की पहचान मोक्ष नगरी के रूप में की जाती है जहां विदेश के सनातन धर्मावलंबी अपने पूर्वजों के पिंडदान करने के लिए यहां आते हैं. इस शहर की पौराणिक महत्ता होने की वजह से दूसरे शहरों में गया को गयाजी के नाम से पुकारते हैं. इस प्राचीन गया शहर के विधानसभा की स्थापना स्वतंत्रता प्राप्ति के ठीक बाद 1952 में हुई थी. इस सीट से सबसे पहला विधायक होने का गौरव कांग्रेस के केशव प्रसाद (Keshav Prasad) को मिला था. अभी इस विधानसभा की जनसंख्या 5 लाख 44 हजार 860 है, जबकि कुल वोटर की संख्या 2 लाख 65 हजार 533 है. इनमें से 138289 पुरुष वोटर, 127229 महिला वोटर और 15 थर्ड जेंडर वोटर हैं.

1990 से इस सीट पर काबिज हैं बीजेपी के प्रेम कुमार

आजादी के बाद गठित इस सीट पर कांग्रेस के केशव प्रसाद ने भले ही पहले विधायक बनने में सफलता पाई हो, पर आरएसएस का गढ़ होने की वजह से इस सीट पर कांग्रेस का प्रभाव जल्द ही घटने लगा. 1957 में लतीफुर्रहमान के बाद 1962 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में श्यामचरण भरथुआर ने इस सीट पर कब्जा जमा लिया. 1967 और 1969 में जनसंघ पार्टी से गोपाल मिश्रा ने इस सीट पर कब्जा जमाया था. उस समय देश में जनसंघ इक्का दुक्का सीट पर ही जीत पाती थी. 1972 में कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. युगल किशोर प्रसाद ने तत्कालीन विधायक और जनसंघ प्रत्याशी गोपाल मिश्रा को हराने में कामयाबी पाई. वहीं 1977 के चुनाव में जनता पार्टी से सुशील सहाय ने जेपी आंदोलन के बाद हुए चुनाव में कांग्रेस विधायक युगल प्रसाद को हरा दिया था. 1980 से लेकर 90 तक लगातार 10 साल तक कांग्रेस के जय कुमार पालित यहां के विधायक रहे. इस बीच 1977 के जेपी आंदोलन में भाग लेने वाले और छोटी-छोटी समस्या को लेकर सड़क पर आंदोलन करने वाले अति पिछड़े समाज के प्रेम कुमार को भाजपा ने 1990 में यहां से टिकट दिया और उन्होंने उस चुनाव में भाकपा के नामी शकील अहमद खां को हराकर विधानसभा में जाने में सफलता पाई. 1990 से लेकर अभी तक हुए कुल 7 विधानसभा चुनाव में वे लगातार जीत हासिल करते हुए लगातार 30 साल तक इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने का इतिहास रचा है. वहीं अबतक उनके खिलाफ महागठबंधन के तहत मैदान में उतरी भाकपा और कांग्रेस के प्रत्याशी को दूसरे स्थान से ही संतोष करना पड़ा है. वहीं, 2015 के चुनाव में भाजपा के प्रेम कुमार को 66891 वोट मिला था, जबकि दूसरे स्थान पर रहे कांग्रेस के प्रेमरंजन डिंपल को 44102 वोट मिले थे. राजद और जदयू अभी तक इस सीट से चुनाव मैदान में नहीं उतरी है.



आजादी के बाद गठित इस सीट पर कांग्रेस के केशव प्रसाद ने भले ही पहले विधायक बनने में सफलता पाई हो, पर आरएसएस का गढ़ होने की वजह से इस सीट पर कांग्रेस का प्रभाव जल्द ही घटने लगा.

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महागठबंधन में प्रत्याशी को लेकर फंसी पेंच

1990 से लगातार 7 बार जीत दर्ज करने वाले डॉ. प्रेम कुमार को एनडीए सरकार में पीएचईडी, नगर विकास, पथ निर्माण के साथ ही कृषि, पशुपालन और मत्स्य विभाग को संभालने का मौका मिला था. 2015 में महागठबंधन की सरकार बनने पर उन्होंने  नेता प्रतिपक्ष की भी भूमिका निभाई. ऐसी संभावना है कि एनडीए की तरफ से वे आठवीं बार प्रत्याशी के रूप में गया शहर विधानसभा सीट से भाग्य आजमा सकतें हैं. वहीं महागठबंधन की तरफ से अभी तक प्रत्याशियों को लेकर पेंच बरकरार है. वामपंथी दलों के महागठबंधन में आने के बाद सीपीआई भी इस सीट से दावेदारी ठोक रही है. वहीं कांग्रेस इसे अपनी परंपरागत सीट मानकर चुनाव लड़ने की बात कह रही है. कांग्रेस पार्टी में इस बार एक अनार सौ बीमार वाली स्थित बनी हुई है. इस सीट के लिए 2015 में चुनाव लड़ने वाले प्रियरंजन डिंपल के साथ ही गया नगर निगम के उपमहापौर मोहन श्रीवास्तव और नगर निगम के आवकाश प्राप्त नगर आयुक्त विजय कुमार समेत कई नेता कांग्रेस से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं.

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हाल ही में स्वच्छता सर्वेक्षण में गया के सबसे खराब शहर में गिनती होने पर नगर निगम के साथ ही स्थानीय विधायक होने के नाते प्रेम कुमार की भी आलोचना हुई है.


 मोक्ष नगरी में अभी भी कई काम होना बाकि

मोक्ष नगरी में केन्द्र और राज्य सरकार की योजना से कई काम हुए हैं. केंद्र की मोदी सरकार से इसे हेरिटेज शहर में शामिल करते हुए यहां के ऐतिहासिक सरोवरों का सौन्दर्यीकरण और पिंडदान के लिए यात्री शेड का निर्माण कराया है. यात्रियों के तर्पण के लिए फल्गु में देवघाट के पास साल भर पानी का इंतजाम करने की योजना पर काम शुरू किया गया है. प्रेम कुमार ने अपनी विधायक निधि से कई काम करवाए हैं, पर हाल ही में स्वच्छता सर्वेक्षण में गया के सबसे खराब शहर में गिनती होने पर नगर निगम के साथ ही स्थानीय विधायक होने के नाते प्रेम कुमार की भी आलोचना हुई है. गया शहर के स्मार्ट सिटी योजना में शामिल नहीं कराने और शहर में ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लेकर किसी तरह की खास पहल नहीं करने का भी आरोप प्रेम कुमार पर विरोधियों द्वारा लगाया जा रहा है.
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