कब लौटेगी बिहार की इस ऐतिहासिक नगरी में रौनक? मंदिरों-दुकानों को पर्यटकों का इंतजार
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कब लौटेगी बिहार की इस ऐतिहासिक नगरी में रौनक? मंदिरों-दुकानों को पर्यटकों का इंतजार
गया का विष्णुपद मंदिर 8 जून से लोगों के लिए खोल दिये गये हैं.

गया (Gaya) का विष्णुपद मंदिर (Vishnupad Temple) और बोधगया (Bodh Gaya) का महाबोधी मंदिर (Mahabodhi Temple) आम श्रद्धालुओं (Devotees) के लिए खोल दिये गये हैं.

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गया. केन्द्र सरकार की अनुमति के बाद मोक्षनगरी गया (Gaya) का विष्णुपद मंदिर (Vishnupad Temple) 8 जून को और ज्ञानस्थली बोधगया (Bodh Gaya) का महाबोधी मंदिर (Mahabodhi Temple) 10 जून से आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिये गये हैं. विष्णुपद मंदिर में सुबह से लेकर रात तक मास्क के साथ सोशल डिस्टेसिंग का पालन करते हुए पूजा-अर्चना की जा सकती है. वहीं मंदिर में पूजा के साथ-साथ देवघाट, सीताकुंड एवं फल्गु एवं अन्य वेदियों पर पिंडदान भी किया जा सकता है. उधर, महाबोधी मंदिर में सुबह और शाम आम श्रद्धालु भागवन बुद्ध का दर्शन और पूजन कर सकते हैं. यहां भी मास्क पहनकर प्रवेश करते हुए सोशल डिस्टेसिंग का पालन करना अनिवार्य है.

पिंडदानियों की नहीं जुट रही है भीड़

मोक्ष की धरती के रूप में प्रसिद्ध गया में देश-विदेश के तीर्थयात्री सालोंभर अपने पितरों के लिए पिंडदान करने आते रहते हैं. करीब तीन महीना तक लॉकडाउन में बंद रहने के बाद विष्णुपद मंदिर में दर्शन और पिंडदान की अनुमति 8 जून से मिल गयी है. पर पिंडदान के लिए तीर्थयात्री नाम मात्र ही आ रहे हैं.



पिंडदान कराने वाले ब्राह्मण बैकुंठ तिवारी ने कहा कि लॉकडाउन में उनलोगों ने अर्थिक तंगी झेली है. मंदिर खुलने के बाद भी इक्का-दुक्का ही, वो भी बिहार के तीर्थयात्री आ रहे हैं. जिससे दो-चार दिन में एकाध पिंडदानी उन्हें मिल पा रहा है.
सीतामढ़ी से अपने पूर्वजों का पिंडदान कराने आये सतीश यादव ने कहा कि आवागमन में काफी दिक्कत है. इसलिए वे लोग निजी गाड़ी से पूर्वजों के प्रति श्रद्धा जताने के लिए गया आये हैं.

विष्णुपद मंदिर प्रबंधकारिणी समिति के सचिव गजारधर लाल पाठक ने कहा कि अभी अन्तर्राज्यीय बस को अनुमति नहीं मिल है. इसलिए दूसरे प्रदेशों के यात्री नहीं आ पा रहे हैं. उन्हें उम्मीद है कि सिंतबर माह में होने वाले पितृपक्ष के पहले स्थिति सामान्य हो जायेगी. और राज्य के साथ ही दूसरे प्रदेश के यात्री भी पिंडदान के लिए आ सकेंगे.

बोधगया के व्यवसायी की आर्थिक स्थिति दयनीय

बिहार में सबसे ज्यादा विदेशी पर्यटक भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली बोधगया ही आते हैं. जिनकी वजह से यहां के होटल, टूर एवं ट्रेवल ऑपरेटर्स का कारोबार चलता है. सैकड़ों छोटे-छोटे दुकानदार की कमाई का जरिया भी देसी- विदेशी पर्यटक ही होते हैं. कोरोनाबंदी में भारत सरकार के वंदे भारत अभियान के तहत कई होटलों में विदेशों से आनेवाले यात्रियों को क्वारंटाइन में रखा. जिससे इन होटलों को अपने कर्मचारियों को सेलरी देने का खर्चा निकला. पर 10 जून से मंदिर खुलने के बाद कोई देसी-विदेशी पर्यटकों का बोधगया आगमन नहीं हो पा रहा है, जिससे टूर ऑपरेटर के साथ-साथ स्थानीय दुकानदार आर्थिक संकट झेल रहे हैं.

स्थानीय टूर एंड ट्रेवल एजेंसी के संचालक सुरेश प्रसाद ने बताया कि कोरोना ने बोधगया समेत पूरे विश्व के पर्यटन व्यवसाय को चौपट कर दिया है. इससे जुड़े लाखों लोग बोरोजगारी के साथ ही आर्थिक तंगी झेल रहे हैं. आने वाले कुछ दिनों में स्थिति में सुधार नहीं हुई, तो यहां के व्यवसायियों को दूसरे धंधे की ओर रूख करना पड़ेगा.

 
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