होम /न्यूज /बिहार /बिहार में यहां लगता था राज्य का दूसरा सबसे बड़ा पशु मेला, अब खो रहा है अपना अस्तित्व, जानें वजह

बिहार में यहां लगता था राज्य का दूसरा सबसे बड़ा पशु मेला, अब खो रहा है अपना अस्तित्व, जानें वजह

दक्षिण बिहार का सबसे बड़ा पशु मेला खो रहा है अपना अस्तित्व.

दक्षिण बिहार का सबसे बड़ा पशु मेला खो रहा है अपना अस्तित्व.

कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर लगने वाला यह मेला एक जमाने में काफी मशहूर था. पर अब स्थिति ऐसी है कि यहां का पशु मेला कुछ त ...अधिक पढ़ें

    कुंदन कुमार/गया. बिहार में दो जगह का पशु मेला काफी नामी था. पहला सोनपुर और दूसरा गया के मानपुर स्थित भुसुंडा. गया का भुसुंडा में बिहार का दूसरा सबसे बड़ा मेला था. पर अब यहां के पशु मेला पर अपना अस्तित्व बचाने का संकट है. भुसुंडा मेला की शुरुआत सोनपुर मेला के तर्ज पर ही की गई थी. यहां पर लगने वाले मेला इतना बड़ा होता था कि एक छोर से दूसरे छोर तक जाने में घंटों लग जाते थे. बिहार, उत्तर प्रदेश तथा झारखंड के व्यापारी यहां आकर जानवरों की खरीद बिक्री करते थे.

    कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर लगता था यह मेला
    कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर लगने वाला यह मेला एक जमाने में काफी मशहूर था. पर अब स्थिति ऐसी है कि यहां का पशु मेला कुछ तंबू में ही सिमटते नजर आ रहा है. पिछले दो दशक से यहां लगने वाले पशु मेला का रौनक घटते जा रहा है. अब यह अंतिम सांसे गिनते नजर आ रहा है. दूरदराज से आने वाले पशुपालक यहां पर गाय, घोड़ा, भैंस, बैल, हाथी की खरीद बिक्री करते थे और यहां पर होने वाला घुड़दौड़ एक जमाने में काफी दर्शनीय था.

    कई प्रदेशों से आते थे खरीददार
    दूसरे प्रदेश से व्यापारी काफी संख्या में विभिन्न तरह के पशुओं को लेकर भुसूंडा पशु मेला में पहुंचते थे. जहां व्यापारियों और उनके द्वारा लाए गए पशुओं को ठहरने का बेहतर प्रबंध किया जाता था. 1 महीने तक चहल-पहल होती थी, मेला लगता था. थिएटर और झूले लगाया जाते थे. जादूगर का शो काफी मशहूर होता था. लेकिन अब वैसी व्यवस्था नहीं की जाती है. जिसके कारण मेले में विभिन्न तरह के पशुओं को लेकर आने वाले व्यापारियों की संख्या में काफी कमी आ गई है.

    भुसुंडा में साल में दो बार पशु मेला का होता था आयोजन
    बता दें कि गया के मानपुर स्थित भुसुंडा में साल में दो बार पशु मेला का आयोजन किया जाता है. पहला मेला चैत माह के बिसुआ पर्व के दौरान तथा दूसरा कार्तिक पूर्णिमा के दौरान आयोजित होता है. स्थानीय निवासी रामचंद्र स्वर्णकार और मो. नूर हसन ने बताया कि 1974 से 2005 तक जब सरकार के द्वारा मेला का आयोजन होने लगा. तब से मेला का रौनक धीरे-धीरे घटने लगा. सरकार की उदासीन रवैया के कारण मेला की स्थिति खराब होने लगी. सबसे ज्यादा यहां पर बैल की बिक्री होती थी. पर पिछले दो दशक से ट्रैक्टर आ जाने की वजह से बैलों की बिक्री में कमी आ गई है. दूसरे प्रदेशों से आए व्यापारियों से असामाजिक तत्व के लोगों के द्वारा पैसों की वसूली की जाती थी जिस कारण दूसरे प्रदेश से आने वाले व्यवसायियों के संख्या में कमी होते गई. नतीजा यह हुआ कि अब यहां का पशु मेला सीमटते जा रहा है.

    स्थानीय लोगों की उम्मीद सरकार ध्यान दे तो सुधरेंगे हालात
    स्थानीय निवासी और पशु व्यवसायियों को अभी भी राज्य सरकार से उम्मीद है. मानपुर के भुसुंडा में लगने वाला दक्षिण बिहार का सबसे बड़ा पशु मेला पर ध्यान दें तो यह उसी ख्याति के साथ एक बार फिर इलाके में दर्शनीय होगा. पशु व्यवसायियों की खरीद बिक्री में तेजी आएगी तथा स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार मिल सकेगा.

    Tags: Bihar News, Gaya news

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें