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बुद्धं शरणं गच्छामि के जयघोष के साथ निकली 'ज्ञानयात्रा', CM कल करेंगे बौद्ध महोत्सव का उद्घाटन
Gaya News in Hindi

arun kumar | News18 Bihar
Updated: January 28, 2020, 5:27 PM IST
बुद्धं शरणं गच्छामि के जयघोष के साथ निकली 'ज्ञानयात्रा', CM कल करेंगे बौद्ध महोत्सव का उद्घाटन
सीएम नीतीश कुमार कल करेंगे तीन दिवसीय बौद्ध महोत्सव का उद्घाटन.

बिहार के सीएम नीतीश कुमार (Nitish Kumar) कल तीन दिवसीय बौद्ध महोत्सव (Buddhist Festival) का उद्घाटन करेंगे. यह 29 से 31 जनवरी तक बोधगया के कालचक्र मैदान में आयोजित होगा, जिसमें बॉलीवुड की धमक देखने को मिलेगी.

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गया. तीन दिवसीय बौद्ध महोत्सव (Buddhist Festival) 29 से 31 जनवरी तक बोधगया के कालचक्र मैदान में आयोजित हो रहा है, जिसका उद्घाटन बिहार के सीएम नीतीश कुमार (Nitish Kumar) करेंगे. जबकि इस महोत्‍सव में हेमा मालिनी (Hema Malini) के साथ बॉलीवुड के कई गायक अपनी प्रस्तुति देंगे. यही नहीं, इसमें 9 देशों के कलाकार भी काफी संख्‍या में भाग लेंगे. इस महोत्सव से पूर्व भगवान बुद्ध की तपोस्थली ढुंगेश्वरी पहाड़ से ज्ञानस्थली महाबोधी मंदिर तक ज्ञानयात्रा निकाली गई. इस यात्रा को जिलाधिकारी अभिषेक सिंह ने झंडी दिखाकर रवाना किया. जबकि इस दौरान जिला प्रशासन के साथ ही विभिन्न देशों के बौद्ध भंते, स्कूली छात्र-छात्रा और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए. जिलाधिकारी अभिषेक सिंह ने बताया कि बौद्ध महोत्सव के पूर्व इस ज्ञानयात्रा की शुरुआत 2015 में की गयी थी और उसके बाद से हार साल यह यात्रा निकाली जाती है.
खास है ये ज्ञानयात्रा
यह यात्रा आमयात्रा से थोड़ा अलग हटकर है. इसमें ढुंगेश्वरी पहाड़ से महाबोधी मंदिर तक करीब 8 किलोमीटर की दूरी पैदल तय की जाती है. यह यात्रा सिद्धार्थ को बुद्ध बनाने वाले मार्ग की यात्रा है और इसमें पैदल चलकर भगवान बुद्ध के विचारों को जानने, समझने और उसे अपनाने की प्रेरणा मिलती है. सरकार ने इस मार्ग की विकसित करने का निर्णय लिया है और ह्रदय योजना से करीब सात करोड़ का लागत से ढुंगेश्वरी से महाबोधी मंदिर के रास्ते का निर्माण कराया जा रहा है. इस रास्ते में जगह -जगह चबूतरा बनाये जाने की भी योजना है, जहां पैदल यात्रा करने वाले तीर्थयात्री जरूरत पड़ने पर आराम भी कर सकें. इसके अलावा पर्यटन विभाग की तरफ से ढुंगेश्वरी पहाड़ को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने के लिए कई विकास कार्य किए जा रहे हैं. महाबोधी मंदिर के मुख्य पुजारी भंते चालिंदा ने कहा कि बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए बुद्ध का यह मार्ग काफी महत्व रखता है, जिसकी वजह से देश विदेश के बौद्ध अनुयायी इस मार्ग की पैदल यात्रा करना चाहते हैं.
ये है मान्यता



ऐसी मान्यता है कि राजगीर के रास्ते राजकुमार सिद्धार्थ ढुंगेश्वरी पहाड़ पर करीब 6 साल तक तपस्या की थी और उनका शरीर यहां कृषकाय हो गया था. इसके बाद उन्‍होंने बोधगया के लिए प्रस्थान किया था और रास्ते में ही सुजाता नामक महिला में उन्‍हें खीर भेंट की थी, जिसके बाद उन्हें बोधगया के पीपल वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी. इसी पीपल वृक्ष का ​बाद में बोधीवृक्ष नाम पड़ा और यहीं महाबोधी मंदिर अवस्थित है. देश विदेश से आने वाले बौद्ध श्रद्धालु महाबोधी मंदिर के साथ ही ढुंगेश्वरी में भी भगवान बुद्ध की तपोस्थली का दर्शन करने आते हैं. पहाड़ की गुफा में भगवान बुद्ध के साथ ही माता ढुंगेश्वरी की प्रतिमा स्थापित है. मजेदार बात ये है कि यहां बौद्ध और हिन्दु समान रूप से पूजा पाठ एवं आराधना करते हैं.

 

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First published: January 28, 2020, 5:27 PM IST
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