इस श्मशान घाट पर अंतिम संस्करा के लिए आईं इतनी लाशें कि कम पड़ गई लकड़ी

जहां शनिवार को 80 और रविवार को 90 शव लाए गएं, वहीं सोमवार को 85 शव जलाए गए हैं. कहा जा रहा है कि लू के कारण...

News18 Bihar
Updated: June 18, 2019, 12:48 AM IST
इस श्मशान घाट पर अंतिम संस्करा के लिए आईं इतनी लाशें कि कम पड़ गई लकड़ी
प्रतीकात्मक फोटो
News18 Bihar
Updated: June 18, 2019, 12:48 AM IST
बिहार के गया जिले में लू और आसमानी कहर से अब तक कई लोगों की मौत हो गई हैं. कहा जा रहा है कि विष्णुपद श्मशान घाट पर पिछले तीन दिनों में अब तक करीब 300 शवों का दाह संस्कार किया गया है. एक चिता पूरी तरह से सजती नहीं कि उससे पहले ही दूसरा शव श्मशान घाट पर पहुंच जाता है. ऐसे में कफन और लकड़ी बेचने वाले भी हैरान हैं.

विष्णुपद श्मशान घाट के आंकड़े चौंकाने वाले

लू के कहर से हो रही मौत का असर श्मशान घाट पर भी पड़ा है. यहां शनिवार से शवों का आने का सिलसिला अभी तक जारी है. जहां तीन दिनों में मगध मेडिकल में मरने की सरकारी आकंड़े का दावा 35 से 40 बताया जा रहा है, वहीं विष्णुपद श्मशान घाट के आंकड़े चौंका देने वाले हैं. जी हां अब तक करीब 300 शवों को जलाया गया है. इनमें ज्यादातर लू के ही शिकार थे. विष्णुपद श्मशान घाट पर आम दिनों की अपेक्षा बहुत ज्यादा शव पहुंच रहे हैं.

72 घंटे में 300 के आस-पास सजी चिताएं 

जहां शनिवार को 80 और रविवार को 90 शव लाए गएं, वहीं सोमवार को 85 शव जलाए गए हैं. कहा जा रहा है कि लू के कारण हो रही मौतों की वजह से संख्या बढ़ी है. शव सुबह के तीन बजे से ही आने लगते हैं और रात दस बजे तक क्रम चलता रहता है. यह पहली बार हो रहा है. विष्णुपद श्मशान घाट पर औसतन रोजाना 10 से 15 के बीच शवों का अंतिम संस्कार होता है, किन्तु पिछले तीन दिनों के आंकड़ें चौकाने वाले सामने आए हैं. 72 घण्टे में 300 के आस-पास चिताएं सजी और अंतिम संस्कार किया गया.

विभिन्न कारणों से हुईं मौतें

मरने वालों में अधिकांश लू से पीड़ित लोग बताए गए हैं. वहीं, अन्य मौतें विभिन्न कारणों से हुई हैं. वहीं, दाह संस्कार के लिए पहुंचे मृतक के परिजनों ने बताया कि लू के चपेट आने से हमारे रिस्तेदारों की मौते हुई हैं. विष्णुपद श्मशान घाट पर कफ़न बेचने वाले रोजाना दस ने बताया कि यहां पंद्रह शव आते थे लेकि अब यह संख्या काफी बढ़ गई है.
पश्चिम बंगाल से मंगवाई गई लकड़ी

वहीं, लकड़ी बेचने वाले ने बताया कि यहां तो शनिवार को शवों का मेला सा लग गया था. रविवार को भी यही स्थिति बनी हुई है. इधर औसत से चार-पांच गुणा ज्यादा शव पिछले दो दिनों से आने के चलते लकड़ी की डिमांड भी बढ़ गई है. पश्चिम बंगाल के वर्धमान से लकड़ी की कई खेप ट्रकों से मंगवाई गई हैं. एक खेप में 17 क्विंटल लकड़ी होती है.

कफन की बिक्री में हुई बढ़ोतरी

वहीं, अंतिम संस्कार की सामग्री कफन आदि की बिक्री भी काफी बढ़ गई है. बता दें कि विष्णु की नगरी गया धाम मोक्ष धाम के रूप में विख्यात है. यही वजह है कि लोग शवों के अंतिम संस्कार के लिए विष्णुपद श्मशान घाट को चुनते हैं. पिछले तीन दिनों के अंदर लाशें जलाए जाने के मामले में बताया जा रहा कि इसमें गया के अलावे दूसरे जिले अथवा अन्य क्षेत्र से भी शव लाए गए हैं. वैसे गया जिले में लू से मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा है.

रिपोर्ट- एलन लिली

ये भी पढ़ें- 

बिहार: गुस्साए लोगों ने स्वास्थ्य मंत्री को दिखाए काले झंडे

PC में सोने के आरोप पर बोले अश्विनी चौबे, मै चिंतन कर रहा था

Text >> एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...