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लॉकडाउन में टूटी 50 साल पुरानी परंपरा, गया के श्मशान में नहीं आया एक भी शव, फिर...
Gaya News in Hindi

ALEN LILY | News18 Bihar
Updated: May 21, 2020, 9:37 AM IST
लॉकडाउन में टूटी 50 साल पुरानी परंपरा, गया के श्मशान में नहीं आया एक भी शव, फिर...
इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि 24 घंटे में श्मशान घाट पर एक भी शव जलने के लिए नहीं पहुंचा.

देश की सनातन परंपरा (Sanatana Tradition) में इस शहर का नाम मोक्षदायिनी नगरी के रूप में प्रसिद्ध है. लेकिन यहां प्रतिदिन एक पिंड और एक मुंड देना अनिवार्य होने के बावजूद श्मशान में एक भी शव नहीं पहुंचा.

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गया. देश की सनातन परंपरा (Sanatana Tradition) में गया (Gaya) का नाम मोक्षदायिनी नगरी के रूप में प्रसिद्ध है. इसका कारण यहां होने वाला धार्मिक कर्मकांड (Religious Rituals) है. लेकिन गयाजी में वर्षों से एक और परपंरा रही है. दरअसल, यहां प्रतिदिन एक पिंड और एक मुंड देना अनिवार्य है. मान्यता है कि अगर हर दिन एक पिंड या एक मुंड नहीं दिया गया तो कुछ अनहोनी होने की आशंका बढ़ जाती है. विष्णुपद के पंडा समाज और श्मशान घाट पर शव को जलाने वाले डोमराजा के अनुसार, इस तरह की मान्यता सालों से चली आ रही है. लेकिन इतिहास में आज पहली बार ऐसा हुआ कि 24 घंटे में श्मशान घाट पर एक भी शव जलने के लिए नहीं पहुंचा. जिसके बाद पंडा समाज के एक सदस्य और डोम राजा ने पुतले का विधि-विधान के साथ शवदाह किया. ताकि यह परंपरा जीवित रखी जा सके.

लॉकडाउन के कारण नहीं आ पा रहे हैं लोग
दरअसल, कोरोना संकट के कारण लागू लॉकडाउन ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. वाहनों के नहीं चलने के कारण गया के विष्णु मसान घाट पर जिले के दूर दराज से लोग अंतिम संस्कार के लिये नहीं पहुंच पा रहे हैं. इस कारण इस श्मशान घाट पर आने वाले शवों की संख्या में काफी कमी आयी है.

बुधवार को नहीं जली एक भी चिता



डोमराजा हीराराम और स्थानीय दुकानदार राजकुमार ने बताया कि इतिहास में पहली बार बुधवार को विष्णु मसान श्मशान घाट पर एक भी चिता नहीं जली. जबकि यहां लोग सुबह से देर शाम तक इसका इंतजार करते रहे. उसके बाद परंपरा के अनुसार, पंडे के साथ मिलकर पुतला बनाया गया और पूरे धार्मिक विधि विधान के साथ 4 लोगों ने इसे कंधा देकर घुमाया. उसके बाद इस पुतले का अंतिम संस्कार किया गया. बताया जा रहा है कि यहां एएक पिंड सुबह में पंडा समाज के लोगो ने दिया है. माना जा रहा है कि इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि जब यहां एक भी शव नहीं आया.



गयासुर को दिया जाता है एक पिंड और एक मुंड
स्थानीय लोगों का कहना है कि गया का नाम एक गयासुर नामक राक्षस के नाम पर रखा गया है. यहां के इस श्मशान घाट में गयासुर को खुश रखने के लिए एक पिंड और एक मुंड प्रतिदिन दिया जाता है. मान्यता है कि जिस दिन एक पिंड या एक मुंड नही दिया गया तो बहुत बड़ी अनहोनी हो सकती है.

ब्रह्मा जी से मांगा था ये वरदान
प्राचीन मान्यताओं के मुताबिक, गयासुर नाम के एक राक्षस ने ब्रह्मा से वरदान मांगा था कि उसका शरीर देवताओं जैसा हो जाये और उसके दर्शन से लोग पाप मुक्त हो जाएं. लेकिन इस वरदान के मिलने के बाद स्वर्ग में पापियों की संख्या बढ़ने लगी. उसके बाद देवताओं ने एक यज्ञ किया. इस यज्ञ के लिए देवताओं ने गयासुर से पवित्र जगह मांगी. जिसके बाद गयासुर ने अपना शरीर यज्ञ के लिए अर्पित कर दिया. जब गयासुर जमीन पर लेटा तो उसका पूरा शरीर पांच कोस में फैल गया. गयासुर ने देवताओं से वर मांगा था कि इस स्थान पर मुझे एक पिंड और एक मुंड हर दिन दिया जाये.

 

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First published: May 21, 2020, 8:56 AM IST
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