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गया: पॉली हाउस तकनीक से शिमला मिर्च की खेती कर किसान बदल रहे अपनी तकदीर

News18 Bihar
Updated: November 27, 2019, 1:51 PM IST
गया: पॉली हाउस तकनीक से शिमला मिर्च की खेती कर किसान बदल रहे अपनी तकदीर
गया के किसानों अब परंपरागत खेती छोड़ कमर्शियल खेती की ओर बढ़ रहे हैं.

कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी सपना है कि 2022 तक यहां के किसान की आमदनी दुगनी हो. इसी दिशा में कृषि विभाग के द्वारा किसानों के हित में कई योजनाएं शुरू की गई हैं.

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गया. कभी खेती को घाटे का सौदा मानने वाले जिले के किसानों ने पारंपरिक खेती छोड़ सब्जी की खेती से अपनी तकदीर को बदलने की शुरूआत कर दी है. इनमें भी सबसे खास है गया की मिट्टी पर शिमला मिर्च (capsicum) का उत्पादन. गया-पटना सड़क मार्ग (Gaya-Patna Road) के बिठोशरीफ के पास उद्यान विभाग की पहल पर पॉली तकनीक के जरिए इस खेती की शुरुआत की गई है. इसके लाभ को देखते हुए किसानों ने इस खेती को नियमित खेती में अपनाने लगे हैं. किसानों का कहना है कि पॉली हाउस (Poly House) में हो रही शिमला मिर्च  की खेती से कम लागत में अधिक मुनाफा हो रहा है.


दरअसल गया जिले के किसान पहले धान, आलू, प्याज और हरी सब्जी उपजाने पर अधिक जोर देते रहे हैं. इसमें लागत ज्यादा और मुनाफा कम होता था. सबसे पहले गया जिले के बिठोशरीफ में किसान अमरजीत कुमार और धर्मेंद्र कुमार ने इस समस्या से निदान के लिए परंपरागत खेती से हटकर शिमला मिर्च की खेती करनी शुरू की. इससे उनकी लागत में कमी आई और मुनाफा बढ़ने लगा.





किसानों के अनुसार शिमला मिर्च की खेती उद्यान विभाग की पहल पर पहले 2 हजार स्क्वॉयर मीटर में बने नेट हाउस में खेती करनी शुरू की. इसके बाद इसका विस्तार हो रहा है. किसान बताते हैं कि उन्हें परंपरागत खेती के अपेक्षा इस खेती से 6 से 7 गुना अधिक मुनाफा हो रहा है.


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किसानों के अनुसार बढ़ रहे फास्ट फूड के प्रचलन के कारण हाल के दिनों में शिमला मिर्च की मांग भी  काफी बढ़ी है. पहले इसे पहले शिमला समेत अन्य दूसरे प्रदेशों से मंगाया जाता था. इससे इसकी गुणवत्ता पर असर पड़ता था और इसके स्वाद में भी कमी आ जाती थी. यह भी एक वजह रही कि कुछ किसानों ने शिमला मिर्च की खेती की शुरुआत की.


जिला उद्यान अधिकारी ओम प्रकाश ने बताया कि बागवानी मिशन के तहत एफएलडी प्रोग्राम में शिमला मिर्च की खेती को बढ़ावा देने के लिए 2 हजार स्क्वॉयर मीटर में नेट हाउस बनाया गया है. इसमें 75% तक किसान को अनुदान  सरकार के द्वारा दिया जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य है कि शिमला मिर्च की खेती नेट हाउस के अंदर बढ़ावा दिया जाए और और इससे किसान ज्यादा से ज्यादा फायदा ले सकें.




उन्होंने बताया कि वैसे किसान जो इसमें इंटरेस्ट रखते हैं उनके लिए जिला बागवानी विभाग में आवेदन देकर इसका लाभ ले सकते हैं. पॉली हॉउस में एक साल तक शिमला मिर्च, खीरा, टमाटर, स्ट्रॉबेरी की खेती की जाए तो एक साल में 7 से 8 लाख रुपये इनकम हो सकता है.




उद्यान अधिकारी ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में और भी नेट हाउस लगाए जा रहा है. इस पॉलीहाउस में खीरा टमाटर फूल की खेती स्ट्रौबरी की खेती, जितने भी high-value के सब्जी हैं. उसे अच्छे से उगाया जा सकता है, और दुगुना-चौगुना लाभ लिया जा सकता है.



कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी सपना है कि 2022 तक यहां के किसान की आमदनी दुगनी हो. इसी दिशा में कृषि विभाग के द्वारा किसानों के हित में कई योजनाएं शुरू की गई हैं. जैविक खेती में भी किसान बढ़-चढ़कर काम कर रहे हैं.  यहां के किसानों को बेहतर काम करने के लिए उपाधि भी मिली है. मगध के किसानों पर फख्र है कि बेहतर काम करके वह अपनी आय को दोगुना कमा कर रहे हैं और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे रहे हैं.


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First published: November 27, 2019, 1:25 PM IST
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