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23 साल पुराने मामले में 4 पुलिसकर्मी समेत 5 दोषी करार, 20 दिसंबर को होगा सजा का ऐलान

Arun Chaurasia | News18 Bihar
Updated: December 11, 2019, 8:32 PM IST
23 साल पुराने मामले में 4 पुलिसकर्मी समेत 5 दोषी करार, 20 दिसंबर को होगा सजा का ऐलान
1996 में मुन्‍ना कुमार की हत्‍या की गई थी.

23 साल पुराने मामले में एफटीसी-1 दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) की कोर्ट ने रिटायर्ड डीएसपी समेत चार पुलिसकर्मी और एक स्वास्थय विभाग (Health Department) के कर्मचारी को हत्या के आरोप में दोषी ठहराया है. जबकि इन सभी पांच दोषियों को 20 दिसंबर को सजा सुनाई जाएगी.

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गया. बिहार के गया में एक पुराने मामले में एफटीसी-1 दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) की कोर्ट ने रिटायर्ड डीएसपी समेत चार पुलिसकर्मी और एक स्वास्थय विभाग (Health Department) के कर्मचारी को हत्या के आरोप में दोषी ठहराया है. इन सभी को 20 दिसंबर को सजा सुनाई जाएगी. पांच दोषियों में तत्कालीन कोतवाली थानाध्यक्ष सह रिटायर्ड डीएसपी मुद्रिका प्रसाद यादव (DSP Mudrika Prasad Yadav), तत्कालीन टास्कफोर्स के सदस्य शंभु सिंह एवं समीर सिंह, नई गोदाम टोओपी के कान्स्टेबल नंदु पासवान और एएनएमसीएच के कर्मचारी विजय प्रकाश हैं. जमानत पर चले रहे इन सभी दोषियों को कोर्ट ने गया केन्द्रीय कारागार भेज दिया गया है.

1996 का है ये मामला
यह मामला कोतवाली थाना क्षेत्र के मिरचईया गली का है. इस केस के अपर लोक अभियोजक अम्बस्टा योगानंद ने बताया कि 26 अगस्त 1996 को पुलिस की टीम मिरचयिया गली से आपराधिक चरित्र के माने जाने वाले मुन्ना कुमार को बुला कर ले गयी और फिर उसकी हत्या कर अज्ञात शव के रूप में पोस्टमार्टम करवा दिया. मुन्ना के परिजन जब कोतलवाली थाना गये तो पुलिस ने उन्हें भगा दिया. परिजनों को जब विषणुपद शमशान घाट पर अज्ञात शव के जलाए जाने की सूचना मिली तो वहां जाकर उन लोगों ने पहचान की और शव को उठाकर 27 अगस्त को गया सिविल कोर्ट में केस करने के लिए लाए, लेकिन कोर्ट का समय खत्म होने की वजह से केस दर्ज नहीं हुआ. जबकि शव लाए जाने की सूचना मिलने पर तत्कालीन कोतवाली थानाध्यक्ष मुद्रिका प्रसाद यादव दल बल के साथ कोर्ट परिसर पहुंचे और वहां से जबरदस्ती शव का उठाकर अंतिम संस्कार करवा दिया. इस बीच 28 अगस्त को सीएजेम कोर्ट में मृतक मुन्ना के भाई सत्येन्द्र की शिकायत पर केस दर्ज किया गया और करीब 23 साल के बाद इस केस में सुनवाई के बाद चार पुलिसकर्मी समेत पांच को हत्या के आरोप में दोषी ठहराया गया है.

मुन्‍ना पर ये था आरोप

अपर लोक अभियोजक की मानें तो एएनएमसीएच के कर्मचारी विजय प्रसाद ने मृतक मुन्ना पर रंगदारी मांगने का आरोप लगाया है, लेकिन रंगदारी मांगने को लेकर उसने खुद थाना में लिखित शिकायत दर्ज नहीं करवाई. जबकि अपनी पहुंच का इस्तेमाल करते हुए नई गोदाम के तत्कालीन टीओपी कांस्टेबल नंदु पासवान के जरिए रंगदारी मांगने की प्राथमिकी दर्ज करवाई और फिर उसी दौरान मुन्ना को ठिकाना लगाने की साजिश रची गई. दोषी पाए गये पुलिस पदाधिकारियों की तरफ से मृतक मुन्ना के आपराधिक चरित्र का बताते हुए आपसी गैंगवार में मारे जाने की दलील दी, लेकिन कोर्ट ने उनकी दलील को नकारते हुए पांचों को हत्या के आरोप में दोषी ठहराया है और 20 दिसंबर को सजा के बिंदु पर सुनवाई होगी.

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First published: December 11, 2019, 8:32 PM IST
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