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गयाः बीडीओ की मौत से दुखी अफसरों ने खोला मोर्चा, कलमबंद हड़ताल की दी चेतावनी

Arun Chaurasia | News18 Bihar
Updated: October 31, 2019, 9:48 PM IST
गयाः बीडीओ की मौत से दुखी अफसरों ने खोला मोर्चा, कलमबंद हड़ताल की दी चेतावनी
गया में कोंच बीडीओ की आत्महत्या से नाराज साथी अफसरों ने कार्य बहिष्कार कर आंदोलन की दी चेतावनी.

गया में स्थित कोंच के बीडीओ राजीव रंजन की मौत (Konch BDO suicide case) से नाराज सभी प्रखंडों के बीडीओ (Block Development officer) ने किया कार्य बहिष्कार. डीएम और डीडीसी पर कई तरह के आरोप लगाते हुए राज्य के मुख्य सचिव (Chief Secretary) को भेजा 10 सूत्री मांग पत्र.

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गया. कोंच बीडीओ राजीव रंजन की मौत (Konch BDO suicide case) के बाद गया (Gaya) जिला के बीडीओ, सीओ, कार्यक्रम पदाधिकारी एवं प्रखंड समन्वयकों ने डीएम अभिषेक सिंह और डीडीसी किशोरी चौधरी के खिलाफ मार्चा खोल दिया है. घटना से गुस्साए इन अधिकारियों ने कार्य बहिष्कार करते हुए गुरुवार को गांधी मंडप में बैठक की और बीडीओ राजीव रंजन की मौत की न्यायिक जांच के साथ 10 सूत्री मांगों का ज्ञापन मुख्य सचिव को भेजा. अफसरों ने मांग पत्र की कॉपी मुख्यमंत्री सचिवालय (CMO), ग्रामीण विकास और भूमि एवं राजस्व विभाग को भी भेजी है. तीन पेज के इस मांग पत्र में डीएम (DM) और डीडीसी (DDC) के खिलाफ कई तरह के आरोप लगाए गए हैं. इन पर बिना वजह से प्रखंड स्तरीय अधिकारियों (Block level officers) को प्रताड़ित करने एवं जलशक्ति एवं दूसरे योजना में फॉल्स रिपोर्टिंग करवाने का आरोप लगाया गया है. इन अधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वे कलमबंद हड़ताल पर चले जाएंगे.

बीडीओ की आत्महत्या को बताया काम का दबाव
गुरुवार को जिले के लगभग सभी प्रखंडों के बीडीओ सीओ, कार्यक्रम पदाधिकारी और प्रखंड समन्वयकों ने कार्य बहिष्कार किया. इस दौरान अधिकारियों ने बीडीओ राजीव रंजन के पारिवारिक कलह में खुदकुशी करने की बात को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि जूनियर लेवल के अफसरों को प्रशासनिक दबाव में काम करना पड़ता है. खराब कार्य संस्कृति, उच्च पदाधिकारियों द्वारा प्रताड़ित करने, करियर तबाह करने की धमकी, नौकरी से बर्खास्त करने एवं कार्यशैली तथा कार्य दक्षता पर सवाल उठाए जाते हैं. आला अफसरों की अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने से उत्पन्न मानसिक तनाव, हताशा, निराशा एवं अवसाद के कारण राजीव रंजन जैसे अधिकारी सुसाईड करने के लिए मजबूर होते हैं.

ये हैं मांगें

1. कोंच के बीडीओ राजीव रंजन की मौत की न्यायिक जांच हो.
2. मृतक के पास से पुलिस को मिले 5 पेज के सुसाईड नोट को सार्वजनिक किया जाए.
3. तनावग्रस्त एवं अवसादपूर्ण कार्य संस्कति में अविलंब बदवाल किया जाए.
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4. बिहार सेवा संहिता एवं अन्य नियमावली का अक्षरश: पालन हो और 8 घंटा से अधिक कार्य कराने के संबंध में यदि आकस्मिकता हो तो ही क्षतिपूर्ति के साथ लिखित आदेश पर कार्य कराया जाए.
5. छुट्टी के दिनों में अनावश्यक मीटिंग नहीं बुलाई जाए. फॉल्स रिपोर्टिंग यथा जलशक्ति अभियान, स्वच्छ भारत मिशन का फर्जी प्रविष्टि का दवाब देकर मौखिक रूप से कार्य कराया जाना तथा अधीनस्थ पदाधिकारियों को कोई भी आदेश लिखित रूप में दिया जाए.
6. अधीनस्थ पदाधिकारियों पर व्यक्तिगत कारणों से एवं अपने लाभ की पूर्ति के हेतु लक्षित कर कार्रवाई नहीं किया जाए.
7. किस परिस्थिति में स्व. राजीव रंजन का वेतन पदस्थापन होने के तुरंत बाद बंद कर दिया गया और पदस्थापन के दो माह के भीतर ही उनपर प्रपत्र-क एवं बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू कर दी गई. इस प्रकार का कृत्य अधिकांश प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों के साथ किया जा रहा है.
8. यह भी जांच का विषय है कि स्व.राजीव को भागलपुर के नवगछिया में किए गए कार्यों को उत्कृष्ट बताते हुए उन्हें सम्मानित किया गया और यहां आने के बाद घटिया कहकर मानसिक प्रताड़ना दी जाने लगी.
9. जिला पदाधिकारी और उपविकास आयुक्त के कार्यकाल में सभी प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी यथा बीडीओ, सीओ, पीओ एवं बीसी का वेतन हमेशा बंद किया गया है तथा पदाधिकारी के विरुद्ध प्रपत्र-क गठित की जाती रही है.
10. प्रत्येक मीटिंग में गाली-गलौज की जाती है और बीबी-बच्चों को रोड पर ला देने और प्राथमिकी दर्ज करने की धमकी दी जाती है.

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First published: October 31, 2019, 9:48 PM IST
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