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Gaya Lok sabha Result 2019, गया लोकसभा रिजल्ट 2019: इन वजहों से जीतनराम मांझी को देखना पड़ा हार का मुंह

गया सीट से एनडीए की तरफ से जेडीयू उम्मीदवार विजय कुमार मांझी को जीत हासिल हुई (pti)

गया सीट से एनडीए की तरफ से जेडीयू उम्मीदवार विजय कुमार मांझी को जीत हासिल हुई (pti)

Gaya Election Result 2019 (गया इलेक्शन रिजल्ट २०१९) गया लोकसभा परिणाम 2019: महागठबंधन का मजबूत जातीय गठजोड़ जीतनराम मांझी के पक्ष में काम नहीं कर पाया

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गया लोकसभा सीट से जीतनराम मांझी को शिकस्त खानी पड़ी. इस सीट से एनडीए की तरफ से जेडीयू उम्मीदवा विजय कुमार मांझी को जीत हासिल हुई. विजय कुमार मांझी को कुल 467007 वोट हासिल हुए. जबकि महागठबंधन की ओर से ‘हम’ प्रमुख जीतनराम मांझी को 314581 वोट मिले.

क्यों हार गए महागठबंधन के उम्मीदवार जीतनराम मांझी

-महागठबंधन का मजबूत जातीय गठजोड़ जीतनराम मांझी के पक्ष में काम नहीं कर पाया. एनडीए के सवर्ण वोटबैंक के साथ जेडीयू के पिछड़े-अतिपिछड़ों का वोटबैंक और विजय कुमार मांझी का अपना स्वजातीय वर्ग महागठबंधन उम्मीदवार जीतनराम मांझी के यादव मुस्लिम और दलितों के मजबूत वोटबैंक पर भारी पड़ा.



-गया लोकसभा सीट पर बीजेपी का दबदबा रहा है. यहां से बीजेपी ने 1998, 1999, 2009 और 2014 के चुनावों में जीत हासिल की है. बीजेपी का मजबूत आधार जेडीयू के विजय कुमार मांझी के पक्ष में गया. जीतनराम मांझी 2014 के चुनाव में भी तीसरे स्थान पर रहे थे.
-गया लोकसभा सीट पर पिछले 20 साल से मांझी समुदाय से आने वाले उम्मीदवार का कब्जा रहा है. यहां मांझी जाति के लोगों की जनसंख्या सबसे अधिक है. बीजेपी के हरि मांझी लगातार दो बार से जीत रहे थे. गया की जनता ने बीजेपी समर्थित ‘मांझी’ पर ही भरोसा दिखाया.

जीतन मांझी गया से चुनाव हार गए हैं (twitter)
जीतन मांझी गया से चुनाव हार गए हैं (twitter)


-2019 के चुनाव में बिहार की कई लोकसभा सीटों पर वोटर्स साइलेंट मोड में रहे. गया के वोटर्स चुप्पी साधे थे लेकिन एनडीए शुरुआत से ही अपर हैंड पर था. रैलियों में प्रधानमंत्री मोदी के विपक्ष पर आक्रमक हमले और नीतीश के सधे हुए भाषण ने वोटर्स को एनडीए के पाले में बनाए रखा.

-नीतीश कुमार के लिए गया की सीट खास थी. एक तो इस सीट से महागठबंधन ने उनके प्रतिद्वंद्वी जीतनराम मांझी को उतारा था, दूसरा बीजेपी ने अपने सीटिंग एमपी हरि मांझी का टिकट काटकर ये सीट जेडीयू को दी थी. नीतीश कुमार के लिए ये नाक का सवाल था.

-गया सीट आरक्षित सीट है. यहां मांझी समाज के लोगों की संख्या 3 लाख है. अनुसूचित जाति/जनजाति की संख्या 5 लाख के करीब है. अल्पसंख्यकों की संख्या करीब एक लाख 80 हजार, भूमिहार और राजपूतों की संख्या ढाई लाख, यादव ढाई लाख और वैश्यों की संख्या दो लाख के करीब है. आरक्षित होने के बावजूद बाकी जातियों के वोट निर्णायक होते हैं. जो पार्टी उन वोटों को अपनी तरफ खींचने में कामयाब होती है, जीत उन्हें ही नसीब होती है.

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