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OPINION: 'बेटी बचाओ' को एक और ताकत देने की दरकार

Vijay jha | News18 Bihar
Updated: January 12, 2019, 9:06 PM IST
OPINION: 'बेटी बचाओ' को एक और ताकत देने की दरकार
न्यूज18 फोटो

पटवा समुदाय की बहुलता वाले पटवा टोली के अधिकतर परिवारों में न तो दहेज लेने की प्रथा है और न देने की. यहां के लोग 'ऑनर किलिंग' के आरोप से आहत हैं.

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गया का पटवा टोली... जब भी आप यहां आएंगे तो पावरलूम घर्र-घर्र और हैंडलूम के खड़-खड़ की आवाज आपके कानों में ऐसा रस घोलेगी जो यहां की आर्थिक समृद्धि ही नहीं, सांस्कृतिक समृद्धि से भी रूबरू करवाती है. लेकिन आज यहां की गलियों में सन्नाटा है. संकरी गलियों के बीच लोग आपको झुंड में बैठे जरूर मिलेंगे, लेकिन सबके चेहरे पर एक सवाल जरूर दिख जाएगा. वजह है पुलिस की वो दलील है जो पूरे पटवा समाज को कठघरे में खड़े कर रही है.

दरअसल, यहां के एक बाप पर इलजाम लगा है कि 28 दिसंबर से लापता नाबालिग बेटी का उसने ही एक साथी के साथ मिलकर कत्ल कर दिया है. 6 जनवरी को क्षत-विक्षत हालत में शव मिलने के बाद पुलिस ने इसे ऑनर किलिंग का नाम दिया है. जाहिर है इस कारण से ही यहां के लोग आक्रोशित हैं. आपको बता दें कि ये वही मानपुर पटवा टोली है जहां एक घर की बेटी दूसरे घर की बहू बन जाती है. आईआईटियंस का गांव कहे जाने वाले मानपुर में शादियां बिना दहेज के होती हैं.

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मानपुर में कपड़ों का कारोबार बहुत बड़े स्तर पर होता है, इसलिए इसे बिहार का मैनचेस्टर भी कहा जाता है. पटवा समुदाय की बहुलता वाले इस गांव के अधिकतर परिवारों में न तो दहेज लेने की प्रथा है और न देने की. लिंग भेद की कुरीति को आईना दिखाती ये परंपरा कब से शुरू हुई ये किसी को नहीं पता.

जाहिर है पटवा टोली के लोग 'ऑनर किलिंग' के आरोप से आहत हैं. हालांकि कहा तो ये जाता है कि पटवा टोली के लोग अपनी बिरादरी में ही संबंध स्थापित करने में यकीन रखते हैं, लेकिन हाल के दिनों में अब इसमें खुलापन आया है. यहां के समाज से ताल्लुक रखने वाले स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि 'ऑनर किलिंग' जैसा शब्द तो यहां कोई जानता तक नहीं है और न कभी इसका इतिहास रहा है.

वस्त्र उद्योग बुनकर सेवा समिति के अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पटवा कहते हैं कि पुलिस ने जिस तरीके से पीड़ित के माता-पिता को उठाया यह अमानवीय है. उनका गुस्सा स्थानीय वजीरगंज कैंप के डीएसपी अभिषेक सिंह पर है. वे कहते हैं कि डीएसपी जान-बूझकर पटवा समाज को अपमानित करने के लिए ऐसा कर रहे हैं.

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स्थानीय नवयुवकों में भी इस बात का आक्रोश दिखा कि पुलिस जिसे भी चाह रही है, जब चाह रही है उठा ले रही है. रात के 12 बजे सीढ़ियों से घर में घुसकर रेड करती है. लोगों की स्पष्ट मांग है कि पहले मृतका के पिता को छोड़ा जाए और इसकी उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए.

बीते सोमवार को जब पटवा टोली के लोग सड़कों पर उतरे तो प्रशासन के पसीने छूट गए. कैंडल मार्च में पांच हजार से भी अधिक लोगों ने इंसाफ की मांग की. जघन्य हत्याकांड के बाद बेटी-बचाओ के नारे को एक बार फिर ताकत देने की कोशिश की गई.

बहरहाल, पुलिस दावे के अनुसार अगर यह मामला 'ऑनर किलिंग' का ही साबित होता है तो यह हमारे सभ्य समाज पर एक कलंक होगा जिसे कानून के साथ ही सामाजिक जागरूकता से ही खत्म किया जा सकता है.

(गया से विजय झा की रिपोर्ट)

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First published: January 12, 2019, 7:07 PM IST
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