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Mahatma Gandhi का गया से था खास जुड़ाव, सिर्फ इसी शहर में है बापू का ऐसा अनूठा स्मारक

गया स्थित गांधी मंडप महात्मा गांधी की स्मृतियों को संजोए हुए है.

गया स्थित गांधी मंडप महात्मा गांधी की स्मृतियों को संजोए हुए है.

पूरे देश में महात्मा गांधी की बड़ी-बड़ी मूर्तियां हैं. कई जगह अस्थि कलश भी हैं लेकिन गांधी स्तूप सिर्फ मोक्षधाम गया में ह ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट – कुंदन कुमार

गया. देश की आज़ादी की लड़ाई के महानायक कहे जाने वाले महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर को पूरे देश में मनाई जाएगी, तो गया के लिए यह खास मौका होगा. असल में गौतम बुद्ध व भगवान विष्णु की नगरी कहे जाने वाले गया से बापू का गहरा जुड़ाव रहा. स्वतंत्रता संग्राम के दौरान गया की धरती पर कई बार गांधीजी का पदार्पण हुआ था. दिसम्बर 1920, अगस्त 1921, जनवरी 1927, अप्रैल 1934 व मार्च 1942 को महात्मा गांधी ने गया में आकर आह्वान किया था. उनकी पुकार पर आज़ादी की लड़ाई में गया के वीर सपूतों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था.

बिहार में पर्यटन, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टिकोण से प्रमुख केंद्र गया में आज भी महात्मा गांधी के भस्मावशेष रखे हैं. बिहार में सबसे ज्यादा विदेशी पर्यटक गया ज़िला में ही आते हैं. धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण गया का ऐतिहासिक महत्व गांधी जी की स्मृतियों से और भी विशेष हो जाता है. इतिहास के पन्नों में वह दिन आज भी दर्ज है, जब भारत के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 28 दिसम्बर 1951 को गांधी मैदान स्थित गांधी मंडप गया के लोगों को समर्पित किया था. इसी मंडप से कुछ ही कदम की दूरी पर अवस्थित स्तूप के नीचे बापू के भस्मावशेष सुरक्षित हैं.

बहुत खास है इस स्तूप का इतिहास

गांधी मंडप को पूर्व में गांधी स्मारक के नाम से लोग जानते थे. अब लोग इसे गांधी मंडप के नाम से जानते हैं. इसका शिलान्यास 20 जून 1948 को बिहार के तत्कालीन राज्यपाल एनएस अणे ने किया था. सुप्रसिद्ध शिल्पकार उपेंद्र महारथी की देखरेख में गांधी मंडप व गांधी स्तूप का निर्माण किया गया था. यह हिंदू व बौद्ध धर्म वास्तुकला का उत्कृष्ट शिल्प माना जाता है. गया के तत्कालीन डीएम जगदीश चंद्र माथुर की देखरेख में इस गांधी स्तूप का निर्माण हुआ था, जो आज एक विरासत के रूप में स्थापित है.

Tags: Gandhi Jayanti, Gaya news, Mahatma gandhi

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