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गया की गौशाला बनी मिसाल, अब गाय के गोबर से बनी लकड़ी से होगा दाह संस्‍कार

Arun Chaurasia | News18 Bihar
Updated: November 27, 2019, 7:41 PM IST
गया की गौशाला बनी मिसाल, अब गाय के गोबर से बनी लकड़ी से होगा दाह संस्‍कार
गया की मानपुर गौशाला में गाय के गोबर से लकड़ी बनाने का काम शुरू हुआ.

गया जिले (Gaya District) की मानपुर गौशाला (Manpur Gaushala) में गाय के गोबर से लकड़ी बनाने का काम शुरू हो गया है. इस लकड़ी का उपयोग शवों के दाह संस्कार में किया जाएगा, जिससे प्रदूषण कम होगा. जबकि कृषि मंत्री प्रेम कुमार (Agriculture Minister Prem Kumar) इससे खासे खुश हैं.

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गया. बिहार के गया जिले (Gaya District) की मानपुर गौशाला (Manpur Gaushala) में गाय के गोबर से लकड़ी बनाने का काम शुरू हो गया है. इस लकड़ी का उपयोग शमशान घाट पर शवों के दाह संस्कार के लिए किया जाएगा. इसके प्रयोग से ना सिर्फ दाह संस्कार के समय प्रदूषण कम होगा बल्कि जंगलों की कटाई पर भी असर पड़ेगा. जबकि इस योजना से उत्साहित राज्य के कृषि मंत्री प्रेम कुमार (Agriculture Minister Prem Kumar) ने इसे बिहार की सभी 84 गौशालाओं में गाय के गोबर से लड़की बनाने की मशीन स्थापित करने की बात कही है.

ऐसे पड़ी थी गौशाला की नींव
मानपुर में 1888 में अंग्रेजों के जमाने में पितृपक्ष में आए तीर्थयात्रियों के गौसेवा के निमित्त से गौशाला की स्थापना की गयी थी, जिसमें अभी 220 से ज्यादा गाय और अन्‍य पशु हैं. पहले गाय के गोबर की बड़ी मात्रा में डिमांड किसानों और स्थानीय लोगों द्वारा की जाती थी,क्‍योंकि गाय का गोबर सनातन धर्म में काफी पवित्र माना जाता है, लेकिन बदलते समय के साथ ही गाय के गोबर की डिमांड घट गयी है, जिससे मानपुर गौशाला को गोबर रखने में काफी परेशानी होने लगी थी, क्योंकि यहां प्रतिदिन करीब एक ट्रैक्टर गोबर निकलता है. इस परेशानी के बीच गौशाला प्रबंधन के सदस्यों ने सोशाल मीडिया पर गाय के गोबर से लकड़ी बनाने की मशीन के बारे में जानकारी मिली और फिर इसे पंजाब के पटियाला से 55 हजार में खरीद कर लाया गया. जबकि अब यहां गोबर से लकड़ी बनाने का काम शुरू हो गया है.

गौशाला प्रबंधक ने कही ये बात

इस सबंध में गौशाला प्रबंधक मनबोध मिश्रा ने बताया कि इस मशीन से गाय के गोबर से तैयार लकड़ी को विष्णुपद शमशान घाट पर शव के दाह संस्कार के लिए भेजने की तैयारी की जा रही है, क्योंकि यह लकड़ी जंगल से लायी जा रही लकड़ी से सस्ती पड़ेगी और यह पर्यावरण के लिहाजा से फायदेमंद है. अभी वे लोग लकड़ी के सूखने के बाद उसका उपयोग शवों के दाह संस्कार में प्रयोग के तौर पर करेंगे और प्रयोग के बाद अगर लकड़ी बनाने से पहले गोबर में कुछ मिलाने की जरूरत महसूस हुई तो इसमें कुछ बदलाव किया जाएगा. वैसे इस लकड़ी का उपयोग शवों के दाह संस्कार के साथ ही अन्य जगह भी किया जा सकता है.

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कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने बिहार की सभी 84 गौशालाओं में गाय के गोबर से लड़की बनाने की मशीन स्थापित करने की बात कही है.


गौशाला के कर्मचारी हुए खुश
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गौशाला में गोबर से लकड़ी बनने का काम शुरू होने से यहां के कर्मचारी भी काफी खुश हैं और उन्हें उम्मीद है कि अब यहां गोबर डंप नहीं करना पड़ेगा. जबकि गोबर के डंप होने से उन लोगों को काफी परेशानी हो रही थी. वहीं मशीन की चर्चा गौशाला के साथ ही आस-पास के पशुपालकों में भी है. कई पशुपालक इस मशीन को देखने गौशाला आ रहे हैं.

सरकार को पसंद आई योजना
गाय के गोबर से शवों के दाह संस्कार के लिए लकड़ी बनाने की योजना से बिहार सरकार के कृषि सह पशुपालन मंत्री प्रेम कुमार भी खासे उत्साहित हैं. न्यूज़ 18 से बात करते हुए मंत्री ने कहा कि धार्मिक एवं प्रदूषण के लिहाज से भी गाय के गोबर की लकड़ी से शवों के दाह संस्कार अच्छा है. सनातन धर्म में गाय को गोबर का काफी महत्ता है. गया में इस योजना के सफल होने पर राज्य के सभी 84 गौशालाओं में इसे लागू किया जाएगा.

बहरहाल, यूं तो गाय के गोबर से उपला एवं गोइठा के रूप में जलावन का उपयोग पहले से ही होता रहा है, लेकिन घरेलू गैस की पहुंच के बाद गोइठा का उपयोग काफी कम हो गया है. अगर गोबर की लकड़ी से बेहतर तरीके से शवों के दाह संस्कार की योजना सफल होती है तो यह गौशालाओं के साथ पशुपालक के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा.

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First published: November 27, 2019, 6:44 PM IST
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