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नवरात्र में मंगलागौरी मंदिर पहुंचकर भक्त कर रहे मां के दर्शन

नवरात्र में मंगलागौरी मंदिर पहुंचकर भक्त कर रहे मां के दर्शन

नवरात्रों में भक्त बड़ी संख्या में प्रसिद्ध मां मंगलागौरी मंदिर पहुंचकर मां का आशीर्वाद ले रहे हैं। गया के भस्मकुट पर्वत पर मां मंगलागौरी मंदिर पालनहार शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध हैं। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार जब क्रोधित भगवान शंकर पार्वती के शरीर को लेकर तांडव नृत्य करने लगें थे तो भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से पार्वती का 52 खंड कर दिया था जिसमें से उनका स्तन भाग गयाजी के भस्मकुट पर्वत पर आकर गिरा था। उसी के बाद से यहां शक्तिपीठ के रूप में मां मंगलागौरी की पूजा हो रही है।

नवरात्रों में भक्त बड़ी संख्या में प्रसिद्ध मां मंगलागौरी मंदिर पहुंचकर मां का आशीर्वाद ले रहे हैं। गया के भस्मकुट पर्वत पर मां मंगलागौरी मंदिर पालनहार शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध हैं। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार जब क्रोधित भगवान शंकर पार्वती के शरीर को लेकर तांडव नृत्य करने लगें थे तो भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से पार्वती का 52 खंड कर दिया था जिसमें से उनका स्तन भाग गयाजी के भस्मकुट पर्वत पर आकर गिरा था। उसी के बाद से यहां शक्तिपीठ के रूप में मां मंगलागौरी की पूजा हो रही है।

नवरात्रों में भक्त बड़ी संख्या में प्रसिद्ध मां मंगलागौरी मंदिर पहुंचकर मां का आशीर्वाद ले रहे हैं। गया के भस्मकुट पर्वत पर मां मंगलागौरी मंदिर पालनहार शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध हैं। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार जब क्रोधित भगवान शंकर पार्वती के शरीर को लेकर तांडव नृत्य करने लगें थे तो भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से पार्वती का 52 खंड कर दिया था जिसमें से उनका स्तन भाग गयाजी के भस्मकुट पर्वत पर आकर गिरा था। उसी के बाद से यहां शक्तिपीठ के रूप में मां मंगलागौरी की पूजा हो रही है।

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नवरात्रों में भक्त बड़ी संख्या में प्रसिद्ध मां मंगलागौरी मंदिर पहुंचकर मां का आशीर्वाद ले रहे हैं। गया के भस्मकुट पर्वत पर मां मंगलागौरी मंदिर पालनहार शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध हैं। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार जब क्रोधित भगवान शंकर पार्वती के शरीर को लेकर तांडव नृत्य करने लगें थे तो भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से पार्वती का 52 खंड कर दिया था जिसमें से उनका स्तन भाग गयाजी के भस्मकुट पर्वत पर आकर गिरा था। उसी के बाद से यहां शक्तिपीठ के रूप में मां मंगलागौरी की पूजा हो रही है।

नवरात्र के दौरान यहां हजारों भक्त घंटों इंतजार कर मां का दर्शन करतें हैं। वहीं सालों भर प्रत्येक मंगलवार पूजा अर्चना के लिए भक्तों की भीड़ जुटती है। दूसरे देशों और राज्यों से पिंडदान करने के लिए गयाजी आनेवाले तीर्थयात्री भी मंगलागौरी आकर मां का आशीर्वाद लेतें हैं। दूसरे देशों से बोधगया में भगवान बुद्ध का दर्शन करने वाले विदेशी पर्यटक भी यहां आते रहतें हैं।

प्राचीन काल से अबतक इस मंदिर का कई बार जीर्णोद्धार कराया गया है। वहीं लोगों की बढ़ती आस्था और उनकी जरूरत को देखते हुए यहां पेयजल, शौचालय, छज्जा और विश्रामालय की व्यवस्था में हर साल वृद्धि की जा रही है।

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