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हथियार वाले खूंखार हाथों में कलम, MA पास नक्सली अब नौनिहालों का संवार रहे जीवन

हथियार वाले खूंखार हाथों में कलम, MA पास नक्सली अब नौनिहालों का संवार रहे जीवन

नक्सली नंदा सिंह हिंसा का रास्ता छोड़ समाज की मुख्यधारा से जुड़े.

नक्सली नंदा सिंह हिंसा का रास्ता छोड़ समाज की मुख्यधारा से जुड़े.

Gaya News: नक्सली जीवन छोड़ चुके एमए पास नंदा सिंह ने जेल में महात्मा गाधी और मदर टेरेसा के बारे में पढ़कर हिंसा का रास्ता छोड़ दिया. वे कहते हैं, ''जिस गरीब के लिए बंदूक उठाया था उनको जब तक शिक्षित नहीं किया जाएगा तब तक पूर्ण सामाजिक परिवर्तन नहीं होगा. हम बंदूक के बल पर ज्यादा दिन नहीं रह सकते हैं. जब गरीब व्यक्ति शिक्षित होगा तब उसे कोई लूटेगा नहीं, ठगेगा नहीं. शिक्षित होना इन सभी का अधिकार है तभी रोजगार अवसर मिलेंगे.

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गया. ऐसे तो मोक्ष और ज्ञान की नगरी गया से नक्सलियों की हिंसात्मक गतिविधियों की खबरें ही अधिक आती रही हैं. लेकिन, अब एक सुकून देनी वाली खबर भी सामने आयी है. दरअसल, कभी नक्सली संगठन में रहकर हथियार उठानेवाला एक व्यक्ति अब गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दे रहे हैं. खूंखार नक्सली के हाथों बंदूक की जगह कलम देखकर हर कोई तारीफ कर कह रहा है. यह परिवर्तन जेल में बंद रहकर नंदा सिंह ने महात्मा गांधी और मदर टेरेसा के पुस्तकों काे अध्ययन से आया है.

नक्सली से शिक्षक बने नंदा सिंह डोभी प्रखंड-पंचायत के डुमरी गांव के साथ ही आस-पास के गांवों से चंदा कर के एक पेड़ के नीचे गांव के गरीब बच्चों को निःशुल्क पढ़ाते हैं. नंदा सिंह कभी बच्चों को पढ़ाने का कार्य भी करेंगे ऐसा उन्हें जानने वालों ने भी नहीं सोचा था. बता दें कि कुछ वर्ष पहले यह यह शख्स नक्सली संगठन में सक्रिय था. अब यह परिवर्तन देख भी लोगों को एकबारगी विश्वास नहीं हो रहा है.

नंदा सिंह जहानाबाद जिले का नक्सलियों के दस्ते के महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में जाने जाते थे. ये बताते हैं कि इन्होंने  गरीबों को अधिकार दिलाने कि भावना से माओवादियों का बंदूक थामा था. नक्सली संगठन में गया जिले के बाराचट्टी और मोहनपुर इलाके में नक्सली घटनाओं जैसे हिंसात्मक कार्यो की जिम्मेदारी दी गई थी. वर्ष 2007 में बाराचट्टी थाना की पुलिस ने हथियार के साथ इन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा था. पूर्व में गया पुलिस को नंदा सिंह की तलाश उस समय काफी दिनों से थी.

नंदा सिंह नक्सली जीवन के बारे में ज्यादा कुछ नहीं पूछने के आग्रह करते हुए बताया कि हम जहानाबाद जिले के बोकनारी गांव के निवासी हैं. 2010 के पहले हम भाकपा माओवादी संगठन के सक्रिय सदस्य रहे. जेल से छूटने के बाद मेरा मन बदल गया. लगा कि हम बंदूक से मदद से समाज के वंचित लोगों को अधिकार नहीं दिला सकते है.

उन्होंने बताया कि जिस गरीब के लिए बंदूक उठाया था उनको जब तक शिक्षित नहीं किया जाएगा. तब तक हम बंदूक के बल पर ज्यादा दिन नहीं रह सकते हैं. जब गरीब व्यक्ति शिक्षित होगा तब उसे कोई लूटेगा नहीं, ठगेगा नहीं. शिक्षित होना इन सभी का अधिकार है तभी रोजगार अवसर मिलेंगे.

उन्होंने बताया कि जेल में रहने के बाद हमे काफी किताबें पढ़ने का मौका मिला. महात्मा गांधी से हमने अहिंसा का मंत्र लिया तो वहीं मदर टेरेसा के बारे में पढ़ने से हमें लगा कि समाजसेवा करनी चाहिए. नाम कमाने के लिए जरूरी नहीं है कि दूसरे रास्ते पर ही रहें. हमें विचार आया कि हम लोगों की मदद करें.

नंदा सिंह बताते हैं कि जब हम संगठन में रहे तो अनगिनत घटनाओं में शामिल रहे. इसका विवरण हम नहीं कर सकते हैं. अब उसे याद भी नहीं करना चाहते हैं. वह समय मेरे जीवन का काला दिन था. हमें अहसास हुआ कि हम रास्ता से भटक चुके हैं. हम पढ़े-लिखे लोगों को गरीब समाज की जरूरत है. हमने खुद एमए तक की पढ़ाई की है.

Tags: Bihar News, Gaya news, Naxal violence, Naxalism, Naxalite, Naxalites news

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