OPINION: क्‍या है गया का बबीता केस, बर्बर हत्या या ऑनर किलिंग

बिहार में एक बार फिर एक बेटी की अस्मत लूटी गई. आरोपियों ने दुष्कर्म के बाद नाबालिग लड़की के शरीर के कई टुकड़े कर दिए. अब तक बिहार पुलिस अपने पुराने रवैये पर अडिग है और रटा-रटाया बयान दे रही है कि मामले की जांच जारी है.

News18 Bihar
Updated: January 11, 2019, 7:06 PM IST
OPINION: क्‍या है गया का बबीता केस, बर्बर हत्या या ऑनर किलिंग
गया कांड के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की प्रतीकात्मक तस्वीर.
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Updated: January 11, 2019, 7:06 PM IST
दीपक प्रियदर्शी

बिहार में एक बार फिर एक बेटी की अस्मत लूटी गई. आरोपियों ने दुष्कर्म के बाद उसके शरीर के कई टुकड़े कर दिए और फिर उसके शव को फेंककर चलते बने. इस सोच के साथ कि अब पुलिस उन तक कभी पहुंच नहीं पाएगी. अब तक हुआ भी यही है कि बिहार पुलिस अपने पुराने रवैये पर अडिग है और रटा-रटाया बयान दे रही है कि मामले की जांच जारी है. फिलहाल कुछ लोग गिरफ्तार कर जेल भेज दिए गए हैं और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद वस्तुस्थिति साफ हो पाएगी कि बच्ची के साथ रेप की घटना हुई थी या नहीं. दरअसल यह वारदात बिहार के गया जिले की है. गया के बुनियादगंज स्थित पटवाटोली की है.

वो पटवाटोली जहां से हर साल कई बच्चे आईआईटी पास कर बिहार का नाम रौशन करते हैं, लेकिन इसी जगह से बीते 28 दिसंबर को एक नाबालिग बच्ची (काल्पनिक नाम बबीता) अचानक गायब हो गई. परिवार वालों ने दो दिनों तक काफी उसकी खोजबीन की और फिर अंत में थक हार कर गया पुलिस को इसकी सूचना दे दी. जांच शुरू होने से पहले ही बबीता का क्षत-विक्षत शव गया पुलिस ने बरामद किया. बबीता का शव मिलते ही परिवार वाले आक्रोशित हो गए.



इधर आसपास के लोग भी गया पुलिस के ढुलमुल रवैये को लेकर अपनी गहरी नाराजगी जाहिर करने लगे. पुलिस ने अपने बचाव में बबीता के परिवार वालों को ही सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया.

पुलिस ने बबीता के परिवार वालों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि आखिर जब बबीता28 दिसबंर को गायब हुई थी तो परिजन दो दिन बीतने के बाद हमारे पास क्यों आए? जबकि उसके परिवार वालों का कहना है कि दो दिनों तक इन लोगों ने अपने स्तर पर उसे खोजने की पूरी कोशिश की, लेकिन जब बबीता नहीं मिली तो परिजन 30 दिसंबर को पुलिस के पास गए लेकिन पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करने के बजाए ढिलाई बरती.

इधर पुलिस का यह भी कहना है कि पूछताछ के दौरान लड़की की बहन ने पुलिस को बताया है कि 31 दिसंबर को लड़की घर आई थी मगर उसके माता-पिता ने उसे कहीं भेज दिया और फिर उसकी क्षत-विक्षत लाश मिली. इस बीच 7 दिन के बाद चार जनवरी को बबीता की गुमशुदगी की प्राथमिकी दर्ज की गई और फिर पुलिस ने अपनी थ्योरी के आधार पर उसके पिता के साथ-साथ बबीता के एक दोस्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, लेकिन बबीता (काल्पनिक नाम) के परिवार वालों की मानें तो बदमाशों ने पहले बबिता के साथ दुष्कर्म किया और फिर बेहरमी के साथ उसकी हत्या कर दी. गया पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद सब कुछ साफ हो जाएगा.

इधर इस मामले को लेकर अब राजधानी पटना में भी आक्रोश देखने को मिलने लगा है. लेफ्ट के लोगों ने शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए कहा की उनकी एक टीम ने खुद मौका-ए-वारदात पर जाकर पूरे घटनाक्रम का जायजा लिया है. घटनाक्रम को देखने के बाद ऐसा लगता है कि गया पुलिस इस मामले में लीपापोती करने में जुटी है और अपनी वर्दी की हनक दिखाकर मृतक बबीता के परिजनों को इस कांड में अभियुक्त बनाकर पूरे केस को रफा-दफा करना चाह रही है.
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उधर राज्य महिला आयोग ने भी इस मामले की जांच शुरू कर दी है. राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष दिलमणि मिश्रा का कहना है कि गया पुलिस से इन्होंने चार दिन पहले इस पूरे मामले को लेकर रिपोर्ट तलब की थी, लेकिन अब तक गया पुलिस ने अपनी रिपोर्ट इनके पास नहीं भेजी है. दिलमणि मिश्रा यह भी कहती हैं कि महिला आयोग की एक टीम पटवाटोली के पावरलूम भी जाएगी और जांच के बाद दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले, इसको लेकर कदम उठाएगी.

लेकिन देखा जाए तो जिस निर्ममता के साथ बबीता की हत्या की गई है उसे देखने के बाद यही कहा जाएगा कि आज भी बिहार में बेटियां महफूज नहीं हैं. अपराधी ऐसी वारदात को अंजाम देने से गुरेज नहीं कर रहे या फिर यूं कहें कि अपराधियों में कानून का अब खौफ नहीं रहा.

बहरहाल अब यहां यह देखना अहम होगा कि बबिता के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं? जिस थ्योरी पर फिलहाल गया पुलिस काम कर रही वह किस हद तक सही साबित होती है.

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