बिहार के गया में AES का खौफ, अब तक 23 बच्चे भर्ती, 6 बच्चों की मौत

अस्पताल के अधीक्षक विजय कृष्ण प्रसाद ने बताया कि चार बच्चों का सैंपल पटना के आरएमआरआई यानी राजेन्द्र मेमोरियल रिसर्च इंस्ट्यूट्यूट से जांच होकर आया है, जिसमें चार में से एक बच्चे में जेई की पुष्टि हुई है.

News18 Bihar
Updated: July 9, 2019, 10:26 PM IST
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Updated: July 9, 2019, 10:26 PM IST
चमकी बुखार यानि एईएस का कहर अब मुजफ्फरपुर और उत्तरी बिहार के बाद गया जा पहुंचा है. गया स्थित अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जापानी इंसफेलाइटिस के एक मरीज की
पहचान हुई है, जो गंभीर स्थिति में आईसीयू में इलाजरत है. डॉक्टर के अनुसार मरीज को वेंटिलेटर पर रखा गया है.

अस्पताल के अधीक्षक विजय कृष्ण प्रसाद ने बताया कि चार बच्चों का सैंपल पटना के आरएमआरआई यानी राजेन्द्र मेमोरियल रिसर्च सेंटर से जांच होकर आया है, जिसमें चार में से एक बच्चे में जेई की पुष्टि हुई है. अधीक्षक के मुताबिक अभी उनके शिशु रोग विभाग में एईएस या जेई के संदिग्ध 13 बच्चों का इलाज चल रहा है, जिसमें से जेई पॉजीटिव का एक बच्चा वेंटीलेटर पर है, जबकि तीन अन्य बच्चे भी गंभीर स्थिति में हैं. वहीं अन्य भर्ती बच्चों में सुधार हो रहा है और उनके जल्द ठीक होने की उम्मीद है.

2 जुलाई 2019 से चमकी बुखार की शिकायत को लेकर अभी तक कुल 23 बच्चे एएनएमसीएच मे भर्ती हुए हैं, जिसमें से कुल 6 की मौत हो चुकी है. 13 बच्चे का इलाज चल रहा है, इनमें से तीन बच्चें ठीक होकर गयें हैं जबकि एक मरीज को बिना किसी सूचना के अभिभावक उसे अस्पताल से बाहर लेकर चले गये हैं.

गया के अस्पताल में भर्ती एईएस से पीड़ित बच्चे


अस्पताल में भर्ती एवं मौत के शिकार बच्चे गया के साथ ही नवादा, औरंगाबाद समेत दूसरे जिले के भी रहने वाले हैं. तीन बच्चों को नवनिर्मित जेई वार्ड में शिफ्ट किया गया है जबकि कई अन्य का इलाज शिशु रोग विभाग एवं आईसीयू में चल रहा है. इलाजरत कई बच्चों की स्थिति में सुधार हुआ है, जिससे उनके परिजन शीघ्र ही ठीक होने की उम्मीद लगाये हुए हैं.

2 जुलाई 2019 से चमकी बुखार की शिकायत को लेकर अभी तकर कुल 23 बच्चे एएनएमसीएच मे भर्ती हुए हैं.

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जेई एवं एईएस से पीड़ित बच्चों के लिए दवा की पूरी व्यवस्था अस्पताल प्रबंधन द्वारा की जा रही है. मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने सनसनीखेज खबरें बनाने से पहरेज करने की अपील की.

रिपोर्ट- अरूण चौरसिया

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First published: July 9, 2019, 2:59 PM IST
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