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Lockdown: भूखे पेट रह रहे साधु-संतों और भिखारियों के लिए 'भगवान का दूत' बने ये लोग, सोशल डिस्टेंसिंग के साथ कर रहे समाजसेवा
Gaya News in Hindi

News18 Bihar
Updated: March 27, 2020, 6:26 PM IST
Lockdown: भूखे पेट रह रहे साधु-संतों और भिखारियों के लिए 'भगवान का दूत' बने ये लोग, सोशल डिस्टेंसिंग के साथ कर रहे समाजसेवा
गया स्टेशन के पास भूखे पेट रह रहे लोगों के लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भोजन का इंतजाम किया है.

मजदूरों एवं अन्य वर्गों के सहयोग के लिए सरकार और प्रशासन की तरफ से कदम उठाने की बात कही गई है पर साधु-संतों और भिखारियों के लिए अब कोई घोषणा नहीं की गई है. वहीं इस स्थिति से निपटने के लिए कई समाजिक संगठन और समाजिक कार्यकर्ता आगे आ रहे हैं.

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गया. कोरोना वायरस के संक्रमण (Corona virus infection) के खतरे को देखते हुए देश में लॉकडाउन (Lockdown) किया गया है और लोगों से अपने घरों में रहने को कहा गया. हालांकि 24 मार्च को अचानक किए गए इस लॉकडाउन की वजह से गरीब परिवारों और रोजाना कमाने-खाने वालों के साथ ही साधु-संतो और भिखारियों के समक्ष खाने पीने के लाले पड़ गए हैं. दरअसल साधु-संत और भिखारी, मंदिरों में मिले दान पर आश्रित रहते हैं, लेकिन प्रदेश में अधिकतर मंदिर बंद कर दिए गए हैं. गया शहर में भी यही हाल है.


मजदूरों एवं अन्य वर्गों के सहयोग के लिए सरकार और प्रशासन की तरफ से कदम उठाने की बात कही गई है पर साधु-संतों और भिखारियों के लिए अब कोई घोषणा नहीं की गई है. वहीं इस स्थिति से निपटने के लिए कई समाजिक संगठन और समाजिक कार्यकर्ता आगे आ रहे हैं.





सामजिक कार्यकर्ताओं की पहल

दरअसल गया के रेलवे स्टेशन इलाके के लोगों ने बड़ी पहल की है और इस इलाके में रहनेवाले भिखारियों, साधु-संतों एवं गरीब परिवारों के लिए सुबह-शाम मुफ्त में भोजन की व्यवस्था की गयी है. स्थानीय समाजिक कार्यकर्ताओं इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी ले रहे हैं और लॉकडाउन लेकर जारी गाइडलाइन का पालन करते हुए भोजन का इंतजाम करवा रहे हैं.




सेनिटाइजेशन के साथ सर्व कर रहे भोजन

इनलोगों को भोजन देने से ​पहले साबुन से हाथ धुलवाया जा रहा है और एक निर्धारित दूरी में बैठाकर भोजन के पैकेट और पानी दिए जा रहे हैं. स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता ब्रजनंदन पाठक ने कहा कि लॉकडाउन के बाद स्टेशन परिसर एवं विभिन्न मंदिरों के पास भिक्षाटन कर गुजर-बसर करने वालों के सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो रही थी. इसलिए उनलोगों ने इस व्यवस्था शुरू की है.


मानव सेवा सबसे बड़ा धर्म

वहीं, स्थानीय व्यवसायी गौरव कुमार ने बताया कि कोशिश है कि लॉकडाउन की वजह से इस इलाके के कोई भी लोग भूखे पेट न सोएं.  सामाजिक कार्यतकर्ता बंटी वर्मा ने कहा कि यह विश्वव्यापी आपदा है जिसकी वजह से करोड़ों लोग प्रभावित हो रहे हैं. आपदा के समय में जरूरतमंदों की सेवा करना सबसे बड़ा मानव धर्म है.



सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसी विपदा की घड़ी में मानव सेवा ही सच्चा धर्म है.


भूख से मिली निजात
इस व्यवस्था का लाभ शनि मंदिर के बार रोजाना भीख मांगनेवाले रामू भी उठा रहे हैं. न्यूज 18 से बात करते हुए रामू ने कहा कि सरकार के आदेश के बाद मंदिर के पास सन्नाटा छा गया है जिससे उनके साने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गयी थी. इनलोगों की वजह से हमारा पेट पल रहा है.



जिलाधिकारी ने कही ये बात 

इस संबंध में जिलाधिकारी अभिषेक सिंह ने कहा कि लॉकडाउन की वजह से कई लोगों की परेशानी बढी है जिसका निदान करने की कोशिश जिला प्रशासन कर रहा है. यहां के अंबेडकर छात्रावास और जगजीवन छात्रावास को आपदा केंद्र घोषित किया गया है जिसमें गरीब, असहाय के साथ ही बाहर के फंसे लोगों के लिये रहने की व्यवस्था की गयी है.


लॉकडाउन के नियमों का पालन जरूरी

डीएम ने बताया कि इनके लिए दोनों वक्त के भोजन का इंतजाम भी किया गया है. इसके साथ ही अगर कोई सामाजिक संगठन मुफ्त में किसी के लिए भोजन का इंतजाम करता है तो इसका स्वागत होना चाहिए,  पर ऐसे संगंठनों को कोरोना को लेकर जारी एडवाइजरी का पूरा पालन करना होगा. जिसमें लोगों की भीड़ नहीं जुटाने और एक-दूसरे से दूरी बनाकर रहने की व्यवस्था का हर हाल में पालन करना आवश्यक है.


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First published: March 27, 2020, 1:30 PM IST
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