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पार्ट थर्ड का रिजल्ट रोके जाने से भड़के छात्र, मगध यूनिवर्सिटी गेट पर हंगामा

मगध विश्वविद्यालय, बोधगया

मगध विश्वविद्यालय, बोधगया

सितंबर 2018 में छात्रों की याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट में परीक्षा लेने की अनुमति दे दी थी. जिसके बाद परीक्षा भी ली गई, लेकिन इन सभी 28 कॉलेज के 86 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राओं के परीक्षा परिणाम रोक दिए गए हैं.

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    मगध विश्वविद्यालय से असम्बद्ध किये गए 28 कॉलेजों के ग्रेजुएशन थर्ड पार्ट के 86 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राओं का  रिजल्ट रोक दिया गया है. विश्वविद्यालय की इस कार्रवाई की बाद छात्र सड़कों पर उतर आए हैं. जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन पटना हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देकर सरकार के स्तर से ही निदान निकलने की बात कहा रहा है.

    आपको बता दें कि इससे पहले भी सरकार द्वारा असम्बद्ध किये गए मगध और पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के 28 कॉलेज के पार्ट थर्ड के छात्रों को पटना हाईकोर्ट नें परीक्षा लेने पर रोक लगा दी थी.

    सितंबर 2018 में छात्रों के उग्र आन्दोलन के बाद एक याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट में परीक्षा लेने की अनुमति दे दी थी.

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    जिसके बाद इन छात्र-छात्रआों का परीक्षा भी लिया गया. लेकिन परीक्षा के बाद इन सभी 28 कॉलेज के 86 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राओं के परीक्षा परिणाम रोक दिए गए.

    इसी बात से आक्रोशित छात्रों ने फिर सड़क पर उतर कर आन्दोलन शुरू कर दिया है. इनके समर्थन में छात्र संगठन भी आगे आए हैं.

    वहीं इस संबंध में मगध विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति सह प्रभारी कुलपति प्रो के.एन पासवान ने न्यूज 18 से कहा कि उन्होंने हाईकोर्ट के निर्देश के बाद स्नातक तृतीय खंड के छात्र-छात्राओं की परीक्षा ली है.

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    कोर्ट ने सरकार से समबद्धता मिलने के बाद ही परीक्षाफल घोषित करने का निर्देश दिया है. ऐसे में सम्बद्धता देने का निर्णय  सरकार को लेना है. उन्हें सरकार या हाईकोर्ट से जैसा निर्देश मिलेगा वे उसका पालन करेंगे.

    हाईकोर्ट के निर्देश पर परीक्षा ली गई, लेकिन  इसके परिणाम पर रोक लगा दी गई है. सवाल ये है कि जब हाईकोर्ट ने बीते सितंबर में ही सरकार को कदम उठाने का निर्देश दे दिया था तो अब तक कोई कदम क्यों नहीं उठाया गया?

    ऐसे में सवाल यह भी  कि सरकार,महाविद्यालय और विश्वविद्यालय की गलतियों का खामियाजा इन 86 हजार से  ज्यादा छात्र क्यों भुगतें?

    रिपोर्ट- अरूण चौरसिया 

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