होम /न्यूज /बिहार /कौशल्या का जज्‍बा: लॉकडाउन में नुकसान के बाद भी नहीं हारी हिम्मत, स्ट्रॉबेरी की खेती से बनाई पहचान

कौशल्या का जज्‍बा: लॉकडाउन में नुकसान के बाद भी नहीं हारी हिम्मत, स्ट्रॉबेरी की खेती से बनाई पहचान

Success Story: गया जिले के कोंच प्रखंड क्षेत्र के रहने वाली कौशल्या देवी इस समय किसानों के लिए नजीर बनी हुई हैं. दरअसल ...अधिक पढ़ें

    रिपोर्ट: कुंदन कुमार

    गया. घर का चौका बर्तन का काम संभालने वाली महिलाएं अब खेती की ओर अपना कदम बढ़ा रही हैं. वहीं, खेती का फायदा सुनकर लोगों के होश उड़ जाएंगे. आज हम एक ऐसी महिला किसान की बात करने जा रहे हैं, जिन्होंने अन्य महिलाओं के लिए मिसाल पेश की है. यह महिला आज कैश क्रॉप्स की खेती कर लाखों रुपए कमा रही है और अपने परिवार की किस्मत बदल रही है. हालांकि उनका यह सफर कतई आसान नहीं था.

    हम बात कर रहे हैं गया जिले के कोंच प्रखंड क्षेत्र के रहने वाली कौशल्या देवी की, जिन्होंने एक बीघे में स्ट्राबेरी की खेती की शुरुआत की. स्ट्रॉबेरी की खेती ने आज इनके परिवार की किस्मत बदल दी है. 40 हजार रुपए में एक बीघा जमीन लीज पर लेकर इस खेती की शुरुआत की है जिसमें करीब 4 लाख रुपए की लागत आई है.वह महाराष्ट्र के पुणे से स्ट्रॉबेरी के पौधे मंगा कर पंचानपुर के पड़रिया गांव में इसकी खेती कर रही हैं.

    800-1000 रुपये प्रति किलो बिकती है स्ट्रॉबेरी
    न्यूज़ 18 लोकल से बात करते हुए महिला किसान कौशल्या देवी ने बताया कि महाराष्ट्र के पुणे से स्ट्रॉबेरी का पौधे मंगवाए थे. एक बीघे में इसकी खेती शुरू की है. बड़े भैया से इसकी जानकारी लेकर इसकी शुरुवात की. इससे पहले बुलंदशहर में स्ट्रॉबेरी की खेती करते थे, लेकिन लॉकडाउन में नुकसान हो जाने के कारण अपने गांव वापस आ गई. एक बीघे की खेती में करीब 4 लाख रुपए लागत आई है. बजारों में 800-1000 प्रति किलो स्ट्रॉबेरी बिक जाती है. इतनी खेती से सालाना 8-10 लाख रुपए तक कमाए जा सकते हैं.

    सरकार अगर प्रोत्साहन दें तो बड़े पैमाने पर होगी खेती
    कौशल्या देवी का कहना है कि सरकार की तरफ से अभी तक कोई मदद नहीं मिली है. अगर सरकार की तरफ से कुछ मदद मिलती है, तो किसानों में प्रोत्साहन बढ़ता है. इसकी खेती बड़े पैमाने पर हो सकती है. अगर कोई किसान इस खेती के बारे में जानकारी चाहते हैं, तो 9113459871 पर बात कर सकते हैं. वहीं, कौशल्या के ससुर नंदकेश्वर प्रसाद बताते हैं दिल्ली में बड़े भाई से आइडिया लेकर इन्होंने खेती की शुरुआत की है. इसमें पूरे परिवार का सहयोग मिल रहा है.

    गया में पहली बार स्ट्रॉबेरी की खेती
    अपने बड़े भाई से प्रेरणा लेकर कौशल्या ने इस खेती की शुरुआत की है. इसमें इनके पति सुनील कुमार तथा परिवार का पूरा सहयोग मिल रहा है. पहली बार गया में इन्होंने इसकी खेती शुरू की है. इससे पहले उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में 5 साल तक स्ट्रॉबेरी की खेती की थी, लेकिन लॉकडाउन में भारी नुकसान के बाद कौशल्या अपने परिवार के साथ गया आ गईं और इस बार इन्होंने लीज पर जमीन लेकर गया में इस खेती की शुरुआत की है. आज अच्छा मुनाफा कमाने की उम्मीद है. अब वह लोगों के लिए नजीर बन रही हैं.

    Tags: Gaya news, Womens Success Story

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें