बोधगया: टूरिस्ट गाइड बने ट्यूशन मास्टर, बच्चों को पढ़ाकर चला रहे हैं पेट

बोधगया में 60 मान्यता प्राप्त टूरिस्ट गाइड हैं.

बोधगया (Bodh Gaya) करीब 300 टूरिस्ट गाइड्स (Tourist Guides) हैं, जिनकी कमाई का मुख्य जरिया विदेशी पर्यटक (Foreign Tourists) हैं. लेकिन गत मार्च से बाहरी पर्यटक बोधगया नहीं आ रहे हैं.

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गया. कोरोना (Corona) के चलते बिहार के बोधगया (Bodhgaya) में विदेशी पर्यटकों (Foreign Tourists) के नहीं आने से टूरिस्ट गाइड (Tourist Guides) बेरोजगार हो गये हैं. वे ट्यूशन पढ़ाकर अपना घर चला रहे हैं. फिलहाल गया एयरपोर्ट से विदेशी फ्लाइट्स की आवाजाही बंद है. विदेशी पर्यटकों के नहीं आने से बोधगया में करीब 300 टूरिस्ट गाइड बेकाम के हो गये हैं. इनके अलावा स्थानीय दुकानदारों का कारोबार भी लगभग ठप हो गया है. उनके सामने भी आर्थिक संकट पैदा हो गये हैं.

जानकारी के मुताबिक बोधगया में भगवान बुद्ध के स्थलों के बारे में जानकारी देने के लिए करीब 300 स्कॉट हैं, जो पर्यटकों को विभिन्न स्थलों के बारे में जानकारी देते हैं. लेकिन फिलहाल ये सारे लोग बिना काम-धंधा के हो गये हैं.

60 सरकार से मान्यता प्राप्त गाइड्स

300 टूरिस्ट गाइड में से 60 सरकार से मान्यता प्राप्त गाइड हैं. ये लोग बोधगया आने वाले सैलानियों को यहां की पूरी जानकारी उपलब्ध कराते हैं. और मंदिरों का भ्रमण करवाते हैं. लेकिन इनदिनों इनकी रोजी-रोटी की गाड़ी ठहर सी गई है.

बता दें कि कोरोना के चलते गत मार्च से ही बोधगया में विदेशियों के आवागमन पर रोक लगा हुआ है. ऐसे में टूरिस्ट गाइड अब ट्यूशन मास्टर बनकर अपना घर-वार चला रहे हैं.

बिहार टूरिस्ट गाइड एसोसिएशन के उपाध्यक्ष गौतम कुमार ने बताया कि पर्यटन के सीजन में इन गाइड्स के चेहरे पर पहले खुशी रहती थी, लेकिन इस साल सारी खुशियां खत्म हो गई हैं. मार्च के बाद से टूरिस्ट गाइड अभी तक बेरोजगार बैठे हुए हैं. महाबोधि मंदिर खुलने से सिर्फ स्थानीय पर्यटक आ रहे हैं. जब तक इंटरनेशनल टूरिस्ट नहीं आएंगे तब तक टूरिस्ट गाइडों की जिंदगी पटरी पर नहीं लौटेगी.

टूरिस्ट गाइड दीपक ने बताया कि वह पंजीकृत टूरिस्ट गाइड है, फिर भी सरकार उसे स्थायी तौर नहीं रखती है. ऐसे में सरकार से मांग है कि हमलोग को स्थायी किया जाए. 6 महीने से ट्यूशन पढ़ाकर किसी तरह जीवन का गुजार रहे हैं.



महाबोधि मंदिर देसी श्रद्धालुओं के लिए खोला गया

बहरहाल बोधगया महाबोधि मंदिर देसी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है. इससे यहां धीरे-धीरे चहल पहल बढ़ने लगी है. बिहार सहित कई जिलों के लोग यहां घूमने के लिए आ रहे हैं. लेकिन टूरिस्ट गाइड की आमदनी विदेशियों पर्यटकों पर निर्भर करता है. ऐसे में इन गाइडों को आशा है कि नए साल में एक बार फिर पटरी पर बोधगया का पर्यटन लौटेगा.

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