मोदी-नीतीश की योजना ने बदले हालात, 9 सालों में सबसे बेहतर हुआ गया का भूमिगत जल स्तर
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मोदी-नीतीश की योजना ने बदले हालात, 9 सालों में सबसे बेहतर हुआ गया का भूमिगत जल स्तर
गया में बेहतर हुआ जल स्तर (सांकेतिक चित्र)

गया में 2019 में भूमिगत जल स्तर रिकार्ड स्तर पर और 43.16 फीट नीचे चला गया था और 100 से ज्यादा गांवों में चापाकल ओर बोरिंग पूरी तरह से फेल हो गये थे और महीनों तक जिला प्रशासन प्रतिदिन 188 टैंकर इस इन इलाकों में जलापूर्ति करता था

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गया. जुलाई 2019 में पीएम मोदी ने जल शक्ति योजना और सीएम नीतीश कुमार ने दिसंबर में जल जीवन हरियाली योजना की शुरूआत की थी. इन दोनों योजनाओं का असर बिहार के गया जिला में देखा जा रहा है. दरअसल पिछले कई सालों की अपेक्षा जिला के भूमिगत जल स्तर में काफी सुधार हुआ है. राज्य के लोक स्वास्थय अभियंत्रण विभाग की तरफ से जारी आंकड़े के मुताबिक पिछले कई सालों की अपेक्षा मई 2020 में भूमिगत जलस्तर में औसतन 17.63 फुट का सुधार हुआ है. पिछले साल मई माह में जिले में औसत भूमिगत जल का स्तर जिले का 43.14 फुट पर था जो इस साल के मई माह में औसतन 25.51 फुट पहुंच है,जो अभी तक के रिकार्ड में ऐतिहासिक है.

सूख गए थे 100 से अधिक गांवों के हैंडपंप

पिछले कुछ सालों के आंकड़ों की बात करें तो बर्ष 2018 में 40.33 ,2017 में 40.27, 2016 में 40.21, 2015 में 40.23, 2014 में 40.15, 2013 में 40.13 और वर्ष 2012 में 42.64 फुट था. गया के डीएम अभिषेक सिंह ने बताया कि पिछले साल 2019 में भूमिगत जल स्तर रिकार्ड स्तर पर और 43.16 फीट नीचे चला गया था और 100 से ज्यादा गांवों में चापाकल ओर बोरिंग पूरी तरह से फेल हो गये थे और महीनों तक जिला प्रशासन प्रतिदिन 188 टैंकर इस इन इलाकों में जलापूर्ति करता था पर इस साल अभी तक किसी भी गांव में टैंकर की डिमांड नहीं हुई है. चापाकल के सूखने की सूचना भी न्यूनतम मिल रही है.



बारिश ने की मदद
भूमिगत जल स्तर में वृद्धि के कई कारण हैं. पहला कारण है कि इस मौसम में नवंबर और दिसंबर माह से ही बारिश पर्याप्त मात्रा में हुई है और सबसे बड़ी वजह पीएम नरेन्द्र मोदी के जल शक्ति अभियान और सीएम नीतीश कुमार की जल जीवन हरियाली योजना है जिसके तहत लाखों पेड़ लगाने के साथ ही भूमिगत जल को रिचार्ज करने के लिए कई योजनाओं पर काम किया गया है.

जल शक्ति अभियान में गया जिला का रिकार्ड रहा था टॉप

पेयजल संकट से जूझ रहे देश के 256 जिले में पीएम मोदी की पहल पर केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा 1 जुलाई से 15 सितंबर 2109 को जल शक्ति अभियान की शुरूआत की गयी थी और संबंधित सभी जिले में कराये जा रहे काम को लेकर आपस में कई चरणों में प्रतियोगिता भी कराई गयी थी. सितंबर माह में हुई फाइनल प्रतियोगिता में 81 प्वाइंट के साथ गया जिला पूरे देश में प्रथम रैंक लाया था. तेलंगाना का महबूबनगर 66.16 अंक के साथ दूसरा,आंध्र प्रदेश का कडपा 63.70 अंक के साथ तीसरा और झारखंड का धनबाद 62.57 अकं के साथ चौथा स्थान प्राप्त किया था.

इन चीजों का किया गया निर्माण

इसमें बिहार के गया समेत कुल 12 जिले शामिल हुए थे. इस योजना के तहत जिले के सभी पंचायतों में जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया जिसमें ग्राउंड वाटर व सरफेस वाटर लेवल को बढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में चेक डैम, रिचार्ज बोरवेल, रूफ़ टॉप वाटर हार्वेस्टिंग, सोख़्ता निर्माण, खाइयों, पइन व आहर का निर्माण कराया गया. जिले के विभिन्न प्रखण्डों में कुल 1279 रिचार्ज बोरवेल 884 रूफटॉप का निर्माण कराया गया.

वाटरमैन राजेन्द्र सिंह ने भी नीतीश की योजना को दिया था समर्थन

पीएम के जल शक्ति अभियान का पहला चरण सितंबर में संपन्न होने के बाद बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने पूरे राज्य में जल जीवन हरियाली योजना के शुरूआत करने की घोषणा की थी. इस योजना की भूमिका जून 2019 में सीएम के गया दौरा के समय ही बन गयी थी,जब वे हीटवेव से मगध प्रमंडल में 100 से ज्यागा लोगों मौत के बाद गया दौरे पर आये थे और विशेषज्ञो द्वारा उन्हें हीटवेव की वजह ज्यादा तापमान के साथ ही ग्राउंड और सरफेस वाटर लेबल में कमी होना बताया गया थासीएम की जल जीवन हरियाली की घोषणा का समर्थन वाटरमैन राजेन्द्र सिंह ने भी किया था. सीएम की इस योजना के औपचारिक उद्घाटन से पहले ही राजेन्द्र सिंह ने 18 अक्टूबर को गया में सीता कुंड से रसलपुर तक 8 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर लोगों को जलस्रोत को बचाने की अपील की थी.
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