बोधगया में है VVIP कुआं, जवाहरलाल नेहरू ने निर्माण के लिए दी थी राशि, डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने किया था उद्घाटन

वीवीआईपी कुआं की एक अब पुरानी अस्तित्व मिट गई है. यानी अब मोटर से पानी यहां से निकाला जाता है.

वीवीआईपी कुआं की एक अब पुरानी अस्तित्व मिट गई है. यानी अब मोटर से पानी यहां से निकाला जाता है.

History Of VVIP Well: समन्वय आश्रम के स्वयंसेवक रामचंद्र प्रसाद ने बताया कि मैं 1958 से इस आश्रम में रह रहा हूं. मेरे आने से पहले कुआं का निर्माण हो गया था. इसे वीवीआईपी कुआं इसलिए कहते हैं, क्योंकि इसका निर्माण देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने अपनी निजी राशि से करवाया था.

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गया. बोधगया के दूसरे बुद्ध के रूप में मशहूर द्वारीको सुंदरानी के आश्रम में एक कुआं इन दिनों चर्चा में है. द्वारीको सुंदरानी के निधन के बाद इसकी चर्चा तेज हो गई है. इस कुआं को लोग वीवीआईपी कुआं कहते हैं. चूंकि इस कुएं का निर्माण देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने निजी राशि से करवाया था. वहीं, इसका उद्घाटन प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने किया था. जब किसी एक कुएं का संबंध प्रेसिडेंट और पीएम से हो तो उस कुएं को वीवीआईपी कुआं कहना लाजिमी है. दरअसल, बोधगया महाबोधि मंदिर के समीप समन्वय आश्रम है. इस आश्रम का संस्थापक द्वारिको सुंदरानी थे. इनका निधन 15 दिन पहले हो गया था, जिनका अंतिम विदाई राजकीय सम्मान समारोह के साथ दी गई थी. द्वारीको सुंदरानी के निधन के बाद उनसे जुड़ी चीजों की अब चर्चा होने लगी.

इसी चर्चा की कड़ी में वीवीआईपी कुआं का भी जिक्र आने लगा है. यह चर्चा तेजी से जिले में फैल गई कि एक कुआं का संबंध राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से है. इस वीवीआइपी कुआं का शिलान्यास से लेकर उद्घाटन तक देश के प्रथम राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के हाथों से हुआ था. बोधगया स्थित समन्वय आश्रम की व्यवस्थापिका विमला दीदी बताती हैं कि इस कुआं को बनते हमने नहीं देखा है, लेकिन इसके बारे में द्वारीको सुंदरानी ने बताया था. उन्होंने बताया था कि बोधगया के अमवा गांव में ऑल इंडिया सर्वोदय सम्मेलन हुआ था, उसमें देश के प्रधानमंत्री, विनोबा भावे सहित अन्य देश के नामचीन राजनीतिक लोग शामिल हुए थे. विनोवा भावे ने बोधगया के पास एक जमीन का टुकड़ा मांगा था, जिससे बोधगया आश्रम बनाया गया था. इस जमीन पर बिनोवा भावे के आग्रह पर देश के प्रथम प्रधानमंत्री ने अपने निजी राशि से आश्रम परिसर में एक कुआं बनाने के लिए 3 हजार रुपए दिए थे.

1954 में बनकर तैयार हुआ था कुआं

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