बिहार के गया में विश्‍व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला शुरू, जानें क्या है धार्मिक मान्यता

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Updated: September 12, 2019, 8:04 PM IST
बिहार के गया में विश्‍व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला शुरू, जानें क्या है धार्मिक मान्यता
उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने पितृपक्ष महासंगम-2019 का गुरुवार को उद्घाटन किया.

सूबे के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने पितृपक्ष महासंगम-2019 का उद्घाटन किया.

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गया. बिहार के गया (Gaya) में विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला (Pitru Paksha/Pitri Paksha) गुरुवार से शुरू हो गया. उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने पितृपक्ष महासंगम-2019 का गुरुवार को उद्घाटन किया. इस दौरान राजस्व मंत्री रामनारायण मंडल, शिक्षा मंत्री सह जिला प्रभारी कृष्ण नंदन वर्मा, कृषि मंत्री सह स्थानीय विधायक प्रेम कुमार, पर्यटन मंत्री कृष्ण कुमार ऋषि समेत कई विधायक और विधान पार्षद मौजूद रहे. इस मौके पर सभी मंत्री और विधायकों का जिला प्रशासन की ओर से 'विष्णु चरण' देकर स्वागत किया गया. इस दौरान उपमुख्यमंत्री समेत सभी मंत्रियों ने विष्णुपद मंदिर में पूजा अर्चना की.

बता दें कि 'मोक्ष नगरी' के नाम से प्रसिद्ध गया में पितृपक्ष महासंगम इस साल 12 सितंबर से 28 सितंबर तक आयोजित की जा रही है. जिसमें देश-विदेश के लाखों सनातन धर्मावलंबी अपने पूर्वजों या पितरों (Ancestors) के मोक्ष की कामना लिए पहुंच रहे हैं. 17 दिनों तक चलने वाले पितृपक्ष मेला में लाखों श्रद्धालु गया के विभिन्न वेदी पर आकर पिंडदान और तर्पण करेंगे.

पितृपक्ष का महत्व
वायु पुराण की तरह ही कई प्राचीन ग्रंथों में पितृपक्ष और गया में पिंडदान की महत्ता का वर्णन किया गया है. आश्विन माह के कृष्ण पक्ष को पितृपक्ष कहा जाता है. वैसे तो गया शहर में सालभर पिडंदानी आते हैं, लेकिन आश्विन माह में पिंडदान करने का विशेष महत्व है.

स्थानीय ब्राह्मण अशोक पांडेय की मानें तो पितृपक्ष में मृत शरीर की आत्मा गया धाम के ऊपर विचरण करती है और यहां उनके बेटे-बेटी, बहु या अन्य रिश्तदारों द्वारा दिया गया पिंडदान उन्हें मोक्ष यानी स्वर्ग की राह ले जाता है. गया में यह परंपरा गयासुर नामक असुर के साथ शुरू हुई है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां भगवान विष्णु अवतरित हुए थे जिनके पैरों के निशान की पूजा विष्णुपद मंदिर में होती है. यहां भगवान राम और सीता ने राजा दशरथ के लिए पिंडदान किया था, इसलिए गया को पितरों की मुक्ति का मुख्य द्वार कहा जाता है.

(रिपोर्ट- अरुण चौरसिया)
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First published: September 12, 2019, 8:04 PM IST
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