7 घंटे बाद भी नहीं मिली गाड़ी और स्ट्रेचर तो बहन के शव को कंधे पर लेकर गया भाई

गया के डुमरिया के पथरा गांव की 21 बर्षीय हेमवती कुमारी की मौत बुधवार की सुबह 10 बजे इलाज के दौरान हो गई थी लेकिन सात घंटे बाद भी उसके शव को स्ट्रेचर तक नहीं मिल सका.

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बिहार के गया से एक शर्मनाक तस्वीर सामने आई है. यहां अनुग्रह नारायण मेडिकल कॉलेज में एक भाई अपनी बहन के शव को ले जाने के लिए घंटों शव वाहन उपलब्ध कराने की मशक्कत करता रहा लेकिन किसी ने उसकी एक न सुनी. हद तो तब हो गई जब युवक को अस्पताल के वार्ड से शव को बाहर ले जाने के लिए स्ट्रेचर तक नहीं दिया गया.

सात घंटे तक करता रहा इंतजार

नतीजन युवक अपनी बहन का शव कंधे पर लेकर अस्पताल के बाहल लगे एंबुलेंस तक गया. युवक ने बताया कि वो अपनी बहन की मौत के सात घंटे बाद तक शव वाहन के इंतजाम में लगा रहा लेकिन किसी ने उसकी एक न सुनी. उसे शव को ले जाने के लिए वाहन तो दूर अस्पताल से बाहर निकालने के लिए स्ट्रेचर तक नहीं मिला. अंत में वो अपनी बहन का शव गोद में लेकर बाहर निकला और निजी एबुंलेंस से घर ले जा सका.



शराब के नशे मेें धुत था 102 का ड्राइवर
गया के डुमरिया के पथरा गांव की 21 बर्षीय हेमवती कुमारी की मौत बुधवार की सुबह 10 बजे इलाज के दौरान हो गई थी. बहन की मौत के बाद मृतक के भाई राहुल ने शव को घर तक पहुंचाने के लिए अस्पताल प्रशासन से शव वाहन की मांग की लेकिन उसे शाम 5 बजे शाम तक वाहन नहीं मिल पाया. इस बीच उसने अस्पताल अधीक्षक से मिले 102 नबंर को भी डायल किया और शव वाहन के ड्राइवर से भी मिला लेकिन शव वाहन का ड्राइवर नशे में धुत मिला और उसने खुद को बीमार और डुमरिया को नक्सल प्रभावित क्षेत्र बताकर शव ले जाने से साफ मना कर दिया.

प्रबंधन ने झाड़ा पल्ला

शव वाहन के ड्राइवर के नशे में होने की सूचना अस्पताल अधीक्षक को दी गयी तो उन्होंने एबुलेंस की निगरानी करने वाले जिले के एसएमओ को सूचना देकर अपना पल्ला झाड़ लिया. जब मीडियाकर्मियों ने उनसे इस संबंध में सवाल किया तो उन्होंने एबुलेंस और शव वाहन की देखरेख सिविल सर्जन कार्यालय से होने की बात कही. मानवता को शर्मसर करने वाली इस घोर लापरवाही की सूचना मिलने के बाद डीएम ने अस्पताल अधीक्षक को पूरे मामले से अवगत कराते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया है.

रिपोर्ट- अरूण चौरसिया
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