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थावे के इस दुर्गा मंदिर में पूरी होती हैं सभी मनोकामनाएं

थावे के इस दुर्गा मंदिर में पूरी होती हैं सभी मनोकामनाएं

गोपालगंज के ऐतिहासिक थावे दुर्गा मंदिर जिलामुख्यालय से करीब 6 किलमीटर दूर स्थित है। इस दुर्गा मंदिर में वैसे सालों भर भक्तों का तांता लगा रहता है। लेकिन नवरात्र के महीने मे यहां विशेष पूजा अर्चना की जाती है। लोगों की मान्यता है कि यहां दर्शन से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

गोपालगंज के ऐतिहासिक थावे दुर्गा मंदिर जिलामुख्यालय से करीब 6 किलमीटर दूर स्थित है। इस दुर्गा मंदिर में वैसे सालों भर भक्तों का तांता लगा रहता है। लेकिन नवरात्र के महीने मे यहां विशेष पूजा अर्चना की जाती है। लोगों की मान्यता है कि यहां दर्शन से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

गोपालगंज के ऐतिहासिक थावे दुर्गा मंदिर जिलामुख्यालय से करीब 6 किलमीटर दूर स्थित है। इस दुर्गा मंदिर में वैसे सालों भर भक्तों का तांता लगा रहता है। लेकिन नवरात्र के महीने मे यहां विशेष पूजा अर्चना की जाती है। लोगों की मान्यता है कि यहां दर्शन से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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गोपालगंज के ऐतिहासिक थावे दुर्गा मंदिर जिलामुख्यालय से करीब 6 किलमीटर दूर स्थित है। इस दुर्गा मंदिर में वैसे सालों भर भक्तों का तांता लगा रहता है। लेकिन नवरात्र के महीने मे यहां विशेष पूजा अर्चना की जाती है। लोगों की मान्यता है कि यहां दर्शन से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

जानकारी के मुताबिक इस मंदिर की स्थापना की रोचक कहानी है। पुरानी मान्यताओं के मुताबिक इस जगह पर कभी राजा मनन सिंह का राज था। इसी राज ने मां भवानी के एक भक्त रहषु भगत भी जंगल में रहकर खेती करते थे और दिन रात मां भवानी की अराधना में लगे रहते थे।

मान्यताओं के मुताबिक मां का यह भक्त बाघ के गले में सांप की रस्सी बनाकर धान की दंवरी करता था। रहषु भगत के इन कारनामों कि चर्चा जैसे ही हथुआं के राजा मनन सिंह को लगी उन्होने मां के इस भक्त को गिरफ्तार करने का आदेश दे दिया।

बंदी बने रहषु से राजा ने मां भवानी को बुलाने का आदेश दे दिया। रहषु भक्त ने मां भवानी की पूजा अर्चना शुरू कर दी। भक्त के आह्वान पर चारों ओर काले बादल छा गए और हर तरफ तेज आंधी पानी के साथ बिजली चमकने लगी। मां के परम भक्त रहषु भगत के आह्वान पर देवी मां कामरू-कमख्या से चलकर पटना के पटन और सारण के आमी होते हुए गोपालगंज के थावे पहुंची।

यहां मां के प्रगट होते ही रहषु भगत का सिर फट गया और मां भवानी का हाथ सामने प्रगट हुआ। मां के प्रगट होने पर रहषु भगत को जहां मोक्ष की प्राप्ती हुई। वही मां के प्रकाश से घमंडी राजा मनन सिंह का सब कुछ खत्म हो गया।

गोपालगंज के प्रसिद्ध इस मंदिर में शारदीय नवरात्र हो या फिर चैत्र नवरात्र। यहां नवरात्र मं पशुओं के बलि देने की परपंरा है। लोग मां के दरबार में खाली हाथ आते हैं। लेकिन मां के आशिर्वाद से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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