बिहार चुनाव: जदयू के दबंग विधायक पप्पू पाण्डेय फिर विवादों में, ट्रिपल मर्डर केस में चार्जशीटेड भतीजे के लगवाए पोस्टर

जदयू विधायक पप्पू पांडेय फिर विवादों में घिरे.
जदयू विधायक पप्पू पांडेय फिर विवादों में घिरे.

पोस्टर से जुड़े विवाद के इस मामले में सदर एसडीएम उपेन्द्र कुमार पाल (Sadar SDM Upendra Kumar Pal) का कहना है कि कोड ऑफ़ कंडक्ट लागू होने के बाद ऐसे पोस्टर लगाने की इजाजत नहीं है.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: September 29, 2020, 7:13 PM IST
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गोपालगंज. जदयू विधायक पप्पू पाण्डेय उर्फ़ अमरेन्द्र कुमार पाण्डेय (Pappu Pandey aka Amarendra Kumar Pandey) एक फिर विवादों में है. इस बार पप्पू पाण्डेय के द्वारा लगाये गए पोस्टरों को लेकर विवाद बढ़ा है. दरअसल इस पोस्टर में पप्पू पाण्डेय के भतीजे व जेल में बंद जिप अध्यक्ष मुकेश पाण्डेय का फोटो सुर्खियों में है. मुकेश पाण्डेय कुख्यात सतीश पाण्डेय के बेटा है, जो जेपी यादव ट्रिपल मर्डर केस में चार्जशीटेड है और जेल में बंद है. लेकिन आरोप है कि चुनाव में दबंगई और रसूख दिखाने की नीयत से कुचायकोट विधानसभा क्षेत्र में जगह-जगह यह पोस्टर लगाए गए हैं.

कुचायकोट में यह पोस्टर पहाड़पुर, बथना कुटी , भोपतापुर , बघउच सहित कई गांवों में और एनएच के किनारे बड़े बड़े पोस्टर लगाये गए हैं. सबसे बड़ी बात है की जिस पोस्टर पर हत्याकांड के चार्जशीटेड मुकेश पाण्डेय का फोटो लगाया गया है उस पोस्टर को पप्पू पाण्डेय के द्वारा ही लगाया गया है. इस पोस्टर को सरकारी और गैरसरकारी सभी जगहों पर लगाया गया है. जो आदर्श अचार संहिता का खुलेआम उल्लंघन है.

बता दें कि जदयू के दबंग विधायक पप्पू पाण्डेय कुचायकोट के विधायक हैं. सीएम नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले विधायक पप्पू पाण्डेय उर्फ़ अमरेन्द्र पाण्डेय के ऊपर राजद नेता जेपी यादव और उसके परिजनों पर फायरिंग करने का आरोप है. इस घटना में जेपी यादव घायल हो गए थे जबकि उनकी मां, उनके पिता और भाई की इलाज के दौरान मौत हो गयी थी.



इस घटना के बाद विपक्ष ने पप्पू पाण्डेय और सरकार पर जमकर हमला बोला था. और पप्पू पाण्डेय को अविलम्ब गिरफ्तार करने की मांग की गयी थी. हालांकि CID की जांच में पप्पू पाण्डेय के ऊपर जेपी यादव ट्रिपल मर्डर केस में कोई संलिप्तता उजागर नहीं हुई, लेकिन उनके भाई सतीश पाण्डेय, भतीजे मुकेश पाण्डेय और रिश्तेदार बटेश्वर पाण्डेय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था. इनलोगों के ऊपर हत्या में शामिल होने के साक्ष्य मिले थे.
बहरहाल पोस्टर से जुड़े विवाद के इस मामले में सदर एसडीएम उपेन्द्र कुमार पाल का कहना है कि कोड ऑफ़ कंडक्ट लागू होने के बाद ऐसे पोस्टर लगाने की इजाजत नहीं है. अगर ऐसे पोस्टर लगाये गए हैं तो इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
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