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COVID-19 Effect: गोपालगंज के एक ही गांव से उठे तीन मजदूरों के शव, सभी की आंखें हुईं नम

गोपालगंज में आज जब मजदूरों के शव पहुंचे तो माहौल गमगीन हो गया

गोपालगंज में आज जब मजदूरों के शव पहुंचे तो माहौल गमगीन हो गया

मां को पहले ही खो चुकी लक्ष्मी साह की मासूम बेटी रानी कुमारी को हादसे की सूचना मिली तो उसे विश्वास नहीं हुआ. आज जब पिता का शव घर वापस आया तब उसके साथ-साथ पूरा गांव रो पड़ा.

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गोपालगंज. बिहार के गोपालगंज निवासी चार मजदूरों के शव (dead body of migrants workers) आज जब उनके गांव पहुंचे तो कोहराम मच गया उनके परिजनों की चीत्कार से किसी का भी कलेजा पसीज जाए. ये मजदूर रविवार की सुबह उत्तर प्रदेश के कन्नौज जनपद में आगरा एक्सप्रेस वे (Agra Express way) पर भीषण सड़क हादसे (Road Accident) के शिकार हो गए थे. इस हादसे में कई मजदूरों की जान चली गई थी जिनमें से चार गोपालगंज जनपद के थे और तीन तो एक ही गांव के थे.

बता दें कि वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के संकट के समय भुखमरी के शिकार हो रहे कामगार वापस अपने काम पर लौटने को मजबूर हैं. कोरोना संकट (Corona crisis) के समय जब लॉकडाउन (Lockdown) हुआ था तब दिल्ली से पैदल घर वापस लौटे ये आधा दर्जन मजदूर 14 दिनों तक क्वारंटाइन सेंटर (Quarantine center) में रहे और क्वारंटाइन का समय काट कर जब वे अपने घर वापस लौटे तब उनके सामने खाने और घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया. लिहाजा मजदूरी की नियत से दोबारा दिल्ली जा रहे गोपालगंज के चार मजदूरों की जहां भीषण सड़क हादसे में जहा मौत हो गयी. जबकि दो मजदूर गंभीर रूप से घायल हैं. मृतकों के परिजन सरकार से एक ही गुहार लगा रहें कि 'कुछ तो करो सरकार, कैसे चलेगा घर परिवार'.

दो दिनों तक भूखे पेट सोने के बाद दिल्ली वापसी का फैसला
सड़क हादसे में मारे गए चार मजदूर गोपालगंज जिले के सिधवलिया और बैकुंठपुर प्रखंड के थे. जिनमें से तीन मृतक सिधवलिया के लोहजिरा गांव के रहने वाले थे. जबकि एक मजदूर बैकुंठपुर के एकडेरवा गांव का रहने वाला था. ये सभी कामगार दिल्ली की बड़ी कम्पनी SPCL में काम करने के लिए बिहार से जा रहे थे. मृतकों में से एक मोती लाल ठाकुर के 12 साल के पुत्र बीकेश जिन पर छोटी उम्र में ये मुसीबत टूट पड़ी है. रुंधे गले से बताते हैं कि उनके पिता दिल्ली SPCL कम्पनी में रहकर मजदूरी करते थे. बीते 22 मार्च को देश में लॉकडाउन लग गया. जिसके बाद लोगों के सामने खाने की समस्या हो गयी. उसके पिता मोती लाल ठाकुर भी उन्हीं लोगों में शामिल थे जो पैदल ही सफर तय कर अपने घर वापस लौटे थे. घर वापसी के बाद उन्हें 14 दिनों तक क्वारंटाइन सेण्टर में रखा गया. क्वारंटाइन का समय पूरा करने के बाद मोती लाल ठाकुर अपने घर वापस पहुंचे थे. मृतक मोती लाल ठाकुर के बेटे बीकेश के मुताबिक घर में खाने की समस्या थी. उनके पिता खुद दो दिनों तक भूखे पेट सोये थे. जब समस्या ज्यादा बढ़ी तब वे दोबारा मजदूरी करने के लिए दिल्ली के लिए निकल गए. और यूपी में बस हादसे के शिकार हो गए. मासूम बीकेश ने सरकार से मदद की गुहार लगायी है. सिधवलिया के लोहिजरा गांव के सिर्फ मोतीलाल ठाकुर की मौत नहीं हुई है. बल्कि यहां मोतीलाल के साथ 45 वर्षीय चन्द्रिका राम और 50 वर्षीय लक्ष्मी साह की भी अर्थी एक साथ तीन लोगों की निकली.

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मना किया था पापा को
मां को पहले ही खो चुकी लक्ष्मी साह की मासूम बेटी रानी कुमारी के मुताबिक उन्हें हादसे की सूचना मिली थी. लेकिन उन्हें विश्वास नहीं हुआ. लेकिन जब शव घर वापस आया तब उनके साथ-साथ पूरा गांव रो पड़ा. वो कहती हैं कि उन्होंने अपने पापा को दिल्ली जाने से रोका था. लेकिन उन्होंने परिवार चलाने के लिए जाना जरुरी बताया था. रानी के मुताबिक उसकी मां की बचपन में ही मौत हो गयी थी. लोहिजरा पंचायत के मुखिया पति रामनाथ राम के मुताबिक कोरोना महामारी उनके पंचायत के लिए घातक साबित हुआ है. उनके गांव वापस लौटे मजदूरों का सरकारी राशन से परिवार नहीं चला. जिसकी वजह से उनके पंचायत के 05 लोग दिल्ली मजदूरी करने जा रहे थे.

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