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गोपालगंज के सूखे हुए ये पेड़ सबको दे रहे चेतावनी, प्रशासन को हो जाना चाहिए अलर्ट

गोपालगंज के सूखे हुए ये पेड़ सबको दे रहे चेतावनी, प्रशासन को हो जाना चाहिए अलर्ट

गोपालगंज में ये पेड़ देखते-देखते सूख गए.

गोपालगंज में ये पेड़ देखते-देखते सूख गए.

कल चमन था, आज इक सहरा हुआ : नगर परिषद के ड्रेनेज सिस्टम की वजह से ये पेड़ सूख गए. गोपालगंज शहर का जंगलिया मोहल्ला रिहायसी इलाका है. यहां कई मोहल्लों का कचरा और गंदा पानी गिरता है. खाड़ की सफाई नहीं होने से सालों भर पानी जमा रहता है. जिसका सीधा असर पर्यावरण पर पड़ रहा है.

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गोपालगंज. तस्वीर में ये जो सूखे पेड़ आपको दिख रहे हैं, यह वाकई डरावना नजारा है. यह तस्वीर है बिहार के गोपालगंज शहर के जंगलिया मोहल्ले की. रिहायसी इलाका है ये. सूखे हुए ये पेड़ आम और पीपल के हैं.

हमारे बुजुर्गों ने यहां सैकड़ों पेड़ लगाए थे. आम, जामुन और लीची के बगीचे थे. गर्मी के इस मौसम में काफी राहत मिलती थी. विशाल पीपल का वृक्ष डेढ़ सौ साल का गवाह था. लेकिन आज नगर परिषद के ड्रेनेज सिस्टम की वजह से भेंट चढ़ गया. गोपालगंज शहर का जंगलिया मोहल्ला रिहायसी इलाका है. यहां कई मोहल्लों का कचरा और गंदा पानी गिरता है. खाड़ की सफाई नहीं होने से सालों भर पानी जमा रहता है. जिसका सीधा असर पर्यावरण पर पड़ रहा है.

जंगलिया मोहल्ले के केदार साह बताते हैं कि नगर परिषर के ड्रेनेज सिस्टम की वजह से इस इलाके में पिछले दो साल से पानी जमा रहता है. अधिक पानी जमा होने से पेड़ सूख गए. आसपास एक दर्जन बगीचे थे, वे भी सूख गए. अब इस इलाके में कुछ नहीं बचा. वहीं, मो. आजाद, परवेज आलम, मुन्ना समेत अन्य लोगों ने बताया कि बुजुर्गों ने बड़ी परिश्रम से बगीचा लगाया था, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही की वजह से ये सभी पेड़ सूख गए हैं. नगर परिषद और जिला प्रशासन की ओर से इन्हें बचाने की दिशा में कोई पहल नहीं की गई. इस बारे में नगर परिषद के चेयरमैन हरेंद्र चौधरी ने कहा कि ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए खाड़ की सफाई और जीर्णोद्वार के लिए डीपीआर तैयार किया गया है, समस्या का निदान करने के लिए नगर परिषद काम कर रहा है.

यहां पीपल की होती थी पूजा

जंगलिया मोहल्ले में विशाल पीपल का पेड़ हुआ करता था. शहर के बुजुर्ग इस पेड़ के बारे में बखूबी जानते होंगे. यहां लोग पूजा करने आते थे. श्राद्धकर्म के लिए शहरवासी आते थे, लेकिन अब कोई नहीं आता है. पीपल का पेड़ पर्यावरण के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. इस लिहाज से पेड़ को संरक्षित करने के लिए सरकार अभियान चला रही है, लेकिन नगर परिषद की लापरवाही की वजह से पुराने पेड़ों का अस्तित्व मिटता जा रहा है.

कैसे संकट से घिरे शहरवासी

शहर के भितभरेवा से निकली खाड़ बंजारी मोड़ से होकर कौशल्या चौक जाकर तुरकहां सारण नहर में मिल जाती है. इस खाड़ को लोगों ने अतिक्रमण कर कब्जा कर लिया है, जिसके कारण कई सालों से सफाई नहीं हुई. नगर परिषद के वॉर्ड 14, 15, 18 समेत कई वॉर्डों में नाले से पानी निकासी का इंतजाम नहीं हुआ. जिसके कारण ड्रेनेज सिस्टम की समस्या उत्पन्न हो गई और शहरवासी संकट से घिर गए. पहले दौर में पेड़ों का सूखना शुरू हो गया और इन इलाकों का पानी आयरन युक्त निकलने लगा है, जो पीने लायक नहीं है. आनेवाले समय में संकट और भी बढ़ सकता है.

Tags: Gopalganj news, Save environment, Tree

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