सुषमा स्वराज: जब परदेश में फंसे 1300 बिहारियों के लिए 'फरिश्ता' बन गई थीं दीदी

बिहार के गोपालगंज जिले की बड़ी आबादी आज भी विदेशो में रहती है. यहां के कामगार विदेशो में खासकर खाड़ी देशों में कमाने चले जाते हैं. वहां से वे विदेशी मुद्रा के तौर पर अर्जित मुद्रा अपने वतन वापस लाते हैं लेकिन खाड़ी देशों में काम करने वाले मजदूरों और कामगारों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है

News18 Bihar
Updated: August 7, 2019, 12:21 PM IST
सुषमा स्वराज: जब परदेश में फंसे 1300 बिहारियों के लिए 'फरिश्ता' बन गई थीं दीदी
सुषमा स्वराज की फाइल फोटो
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Updated: August 7, 2019, 12:21 PM IST
पूर्व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज के निधन से आज पूरा देश मर्माहत है. हर तरफ शोक की लहर है. सुषमा स्वराज के निधन से बिहार के गोपालगंज के लोग भी खासे दुखी हैं क्योंकि सुषमा ने यहां के लोगों की ऐसी मदद की थी जिसे वो आजीवन नहीं भूल सकते. सुषमा स्वराज की वजह से गोपालगंज की बड़ी आबादी खुशहाल है. वजह जानकार शायद आप भी हैरान हो जाएं.

मुश्किल होती थी वतन वापसी की राह

दरअसल बिहार के गोपालगंज जिले की बड़ी आबादी आज भी विदेशो में रहती है. यहां के कामगार विदेशो में खासकर खाड़ी देशों में कमाने चले जाते हैं. वहां से वे विदेशी मुद्रा के तौर पर अर्जित मुद्रा अपने वतन वापस लाते हैं लेकिन खाड़ी देशों में काम करने वाले मजदूरों और कामगारों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है और कई बार वे खाड़ी देशो में बंधक बन जाते हैं. उनकी वतन वापसी के लिए राह मुश्किल हो जाती है और ऐसे वक़्त पर विदेशों में फंसे लोग वतन वापसी के लिए विदेश मंत्रालय और भारत सरकार से गुहार लगाते हैं.

1300 लोगों को कराया था मुक्त

ऐसे ही एक व्यक्ति है 55 वर्षीय हीरा लाल साह. हीरालाल साह उचकागांव थानाक्षेत्र के धरमचक गांव के रहने वाले हैं. हीरालाल साह के मुताबिक वे अपने अन्य साथियो के साथ सऊदी के अलखोबर शहर में कंस्ट्रक्शन कम्पनी में काम करते थे. वहां काम के दौरान ही हीरालाल साह सहित करीब 13 सौ लोगों को कंपनी द्वारा बंधक बना लिया गया था. बंधक बने लोगों में अकेले गोपालगंज और सीवान के करीब 800 लोग शामिल थे. बंधक बने लोगों ने तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से वतन वापसी की गुहार लगायी थी.

सुषमा स्वराज की मदद से वतन वापसी करने वाले बिहारी मजदूर


'दीदी की वजह से हूं अपनो के बीच'
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बिहार के लोगो की दास्तां सुनकर सुषमा स्वराज ने तत्काल बड़ी कार्रवाई करते हुए सऊदी के विदेश मंत्रालय से संपर्क किया और तत्काल बंधक बने कामगारों को मुक्त कराने की पहल की. हीरालाल साह सुषमा स्वराज की वजह से अपनों के बीच में हैं. उन्हें सुषमा स्वराज के निधन पर गहरा दुःख है. हीरालाल साह कोई गोपालगंज के अकेले इन्सान नहीं है जो सुषमा स्वराज की वजह से आज अपनों के बीच में हैं.

मदद पाने वालों की लंबी है फेरहिस्त

उचकागांव के ही बड़का साखे गांव के विशेश्वर प्रसाद 2013 से सऊदी में काम करते थे. उन्हें भी 13 सौ लोगों के साथ बंधक बना लिया गया था. वो वतन वापसी की उम्मीद छोड़ चुके थे लेकिन उन्होंने वतन वापसी के लिए सुषमा स्वराज से गुहार लगाई. आज उनकी ही वजह से वो सिर्फ अकेले हीं नहीं बल्कि सभी 13 सौ लोग अपने वतन वापस हो सके हैं. विशेश्वर प्रसाद के मुताबिक आज सुषमा स्वराज भले हमारे बीच नहीं रहीं लेकिन उनकी बदौलत 13 सौ लोग अपनों के बीच में रह रहे हैं.

सुषमा स्वराज का निधन
सुषमा स्वराज की मदद पाने वाला बिहारी परिवार


संकट मोचन थीं दीदी

सुषमा स्वराज की वजह से गोपालगंज की करीब 10 हजार की आबादी प्रभावित हुई है. श्रीलंका से लेकर सऊदी और इराक हर जगह जहां-जहां भारतीय और खासकर गोपालगंज के लोग बंधक बनें तब सुषमा उन लोगों के लिए किसी संकट मोचन से कम साबित नहीं हुई.

रिपोर्ट- मुकेश कुमार

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First published: August 7, 2019, 12:13 PM IST
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