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भारतीय आबोहवा, संस्कृति और बोली की कायल हुई स्विट्जरलैंड की लड़की

भारतीय आबोहवा, संस्कृति और बोली की कायल हुई स्विट्जरलैंड की लड़की

भारत की कला और संस्कृति के कायल सिर्फ अपने देशवासी ही नहीं विदेशी भी हैं और इसी कला को सीखने और समझने के लिए देश में लाखों लोग हर साल आते हैं. ऐसी ही एक विदेशी किशोरी हैं फनी मार्के, जो हिन्दुस्तान में रहकर यहां की कला और कत्थक नृत्य सीख रही हैं और लोगों को सिखा रही है.

भारत की कला और संस्कृति के कायल सिर्फ अपने देशवासी ही नहीं विदेशी भी हैं और इसी कला को सीखने और समझने के लिए देश में लाखों लोग हर साल आते हैं. ऐसी ही एक विदेशी किशोरी हैं फनी मार्के, जो हिन्दुस्तान में रहकर यहां की कला और कत्थक नृत्य सीख रही हैं और लोगों को सिखा रही है.

भारत की कला और संस्कृति के कायल सिर्फ अपने देशवासी ही नहीं विदेशी भी हैं और इसी कला को सीखने और समझने के लिए देश में लाखों लोग हर साल आते हैं. ऐसी ही एक विदेशी किशोरी हैं फनी मार्के, जो हिन्दुस्तान में रहकर यहां की कला और कत्थक नृत्य सीख रही हैं और लोगों को सिखा रही है.

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भारत की कला और संस्कृति के कायल सिर्फ अपने देशवासी ही नहीं विदेशी भी हैं और इसी कला को सीखने और समझने के लिए देश में लाखों लोग हर साल आते हैं. ऐसी ही एक विदेशी किशोरी हैं फनी मार्के, जो हिन्दुस्तान में रहकर यहां की कला और कत्थक नृत्य सीख रही हैं और लोगों को सिखा रही है.

23 साल की फनी मार्के स्विट्जरलैंड की रहने वाली हैं, लेकिन अपने देश से सात समंदर दूर फनी बनारस में रहकर भारतीय संस्कृति, कला और लोकनृत्य सीख रही हैं. फनी ने सबसे पहले अपना नाम बदला और उसके बाद अपनी भाषा.

फनी से मीरा बनी यह विदेशी किशोरी फर्राटेदार हिंदी बोल लेती है. अब वो कत्थक नृत्य में इस कदर पारंगत हो गई हैं कि वो बड़े-बड़े स्टेज शो करने के लिए देश के कई राज्यों का भ्रमण कर चुकी है. मीरा बताती है कि उन्हें हिन्दुस्तान की आबोहवा, संस्कृति और बोली इतना प्रभावित करती है कि वो पिछले कई सालों से अपने देश वापस नहीं लौट पाई.

गोपालगंज के थावे महोत्सव में भाग लेने पहुंची मीरा उर्फ फनी मार्के ने कहा कि उन्हें बिहार आकर बहुत सम्मान और प्यार मिला. फनी मार्के ने कहा कि उन्हें लगा ही नहीं कि वो अपने घर से बहुत दूर हैं.

फनी को विशाल मंच देनेवाले कलाकार विशाल कृष्ण के मुताबिक प्रतिभा सिर्फ बड़े शहरों में ही नहीं बल्कि छोटे गांवों और शहर में भी है. बस जरूरत है उसे सामने लाने कि ताकि अपनी देश की ऐतिहासिक धरोहरों जैसे कत्थक नृत्य और दूसरी परंपराओं को दोबारा सम्मान दिलाया जा सके. फनी मार्के का देश के प्रति सम्मान भारत की समृद्ध संस्कृति की कहानी बयां करता है.

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