नाच-गाना छोड़कर अब मूर्ति बनाने में लग गए हैं किन्नर
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नाच-गाना छोड़कर अब मूर्ति बनाने में लग गए हैं किन्नर
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कभी दूसरों के यहां बधाइयां देने और अश्लील डांस करने के मजबूर रहने वाला गोपालगंज का यह किन्नर समाज अब इज्जत की जिंदगी जी रहा है. इस समाज के कुछ सदस्य नाच-गाना छोड़कर अब मूर्तियों के निर्माण में लग गए हैं.

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कभी दूसरों के यहां बधाइयां देने और अश्लील डांस करने के मजबूर रहने वाला गोपालगंज का यह किन्नर समाज अब इज्जत की जिंदगी जी रहा है. इस समाज के कुछ सदस्य नाच-गाना छोड़कर अब मूर्तियों के निर्माण में लग गए हैं. इनकी बनाई मूर्तियों की मांग तो बढ़ ही गई है साथ ही गंदी नजर से देखने वाले लोगों की नजरों में भी इनकी इज्जत बढ़ गई है.

आज पूरे देश में सरस्वती पूजा धूमधाम से मनाया जा रहा है. गोपालगंज में भी इसको लोग अपने अंदाज में मना रहे हैं. जिन मूर्तियों की लोग पूजा कर रहे हैं, उसको बनाने वाला किन्नर समाज इन दिनों सुर्खियो में है.

सिधवलिया के जलालपुर सरकारी स्कूल के समीप रहने वाली वैशाली, स्विटी और सोना किन्नर समाज के पारंपरिक पेशा से अलग हटकर कुछ नया कर रही है. किन्नर समाज से ताल्लुक रखने वाली वैशाली के मुताबिक वह यूपी की रहने वाली है और बचपन से ही अपनी साथी सोना और स्विटी के साथ इस समाज से जुड़ गई थी. समाज में इनकी पहचान थर्ड जेंडर के रूप में है.



ये बचपन से ही किन्नर समाज के साथ जाकर लोगों के घरों में बधाईयां देती थी. ऑर्केस्ट्रा में नाचने की वजह से लोग इन्हें गंदी नजरों से देखते थे. लेकिन इन्होंने अपनी तकदीर बदलने की ठानी और मूर्तियों के निर्माण का काम करने लगी. अब वे पिछले दो साल से इस इलाके में रहकर मुर्तियों का निर्माण करती है. उनकी मूर्तियों की डिमांड के साथ ही लोग अब उन्हें इज्जत की निगाह से देखते हैं. समाज में प्रतिष्ठा बढ़ गई है.
स्थानीय लोगों के मुताबिक वैशाली साथियों के साथ नाच-गाना करती थी, लेकिन अब वे इसे छोड़कर कई वर्षों से मूर्तियों का निर्माण कर रही है. इनके द्वारा बनाई गई मूर्तियों की काफी मांग है, वजह है आकर्षक और खुबसूरत होना.

(मुकेश की रिपोर्ट)
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