Bihar Election Result-2020: बीजेपी ने एक साथ कैसे दो मोर्चों पर मारा मैदान, आरजेडी को हराया, नीतीश को पीछे किया?

बिहार में बीजेपी कैसे बन गई जेडीयू से बड़ी पार्टी?
बिहार में बीजेपी कैसे बन गई जेडीयू से बड़ी पार्टी?

‘जातीय’ और ‘बगावत’ की रणनीति से दो मोर्चों पर जंग जीतती नजर आ रही है बीजेपी, हालांकि, नीतीश कुमार को ही सीएम बनाने का कर रखा है कमिटमेंट.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 10, 2020, 10:31 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. बिहार चुनाव परिणाम (Bihar election result) को लेकर रोमांच अभी भी बना हुआ है. अभी तक के रुझानों को देखते हुए बिहार में एनडीए (NDA) सरकार बनाती दिख रही है. वो 122 के मैजिक नंबर पर बनी हुई है. इस चुनाव में बीजेपी एक साथ दो मोर्चों पर फतह हासिल करते हुए दिख रही है. उसने आरजेडी को पटखनी दे दी है और नीतीश कुमार (Nitish Kumar) को नंबर के मामले में पीछे धकेल दिया है. बिहार जैसे राजनीतिक तौर पर मुखर सूबे में दो-दो टारगेट को हासिल करना बीजेपी के लिए आसान नहीं था. जातीय समीकरण से उसने आरजेडी (RJD) को मात दी और चिराग पासवान (Chirag Paswan) को अलग खड़ा करके नीतीश कुमार के सियासी कद को बीजेपी के मुकाबले बौना कर दिया. हालांकि, उसने नीतीश कुमार को ही सीएम बनाने का कमिटमेंट कर रखा है.

कुछ लोग पीएम नरेंद्र मोदी को ‘वोटिंग मशीन’ भी बोलते हैं. बीजेपी के पास अमित शाह जैसा कुशल रणनीतिकार है. जिसे जीतने का फार्मूला आता है. यहां के चुनाव में जाति एक बड़ा फैक्टर (Caste-factor) होता है. खास बात यह है कि बिहार में किसी भी एक जाति का अकेला प्रभाव नहीं है. अगर वोट बैंक की बात करें तो बीजेपी और आरजेडी के पास अपने निश्चित वोट बैंक हैं. ब्राह्मण, भूमिहार, राजपूत और कायस्थ के कुल वोट 17.2 प्रतिशत हैं. कांग्रेस के कमजोर हो जाने के बाद सवर्ण वोट बैंक पर बीजेपी का एकाधिकार-सा हो चुका है.

bihar election result 2020, how did emerged BJP in bihar, RJD, Nitish kumar, Who will next CM of Bihar, caste factor, बिहार चुनाव परिणाम, बिहार में कैसे उभरी बीजेपी, आरजेडी, नीतीश कुमार, बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन
क्या नीतीश कुमार फिर बनेंगे मुख्यमंत्री?




इसे भी पढ़ें: बिहार चुनाव में क्यों फेल हुआ एग्जिट पोल का ‘चाणक्य’
दूसरी ओर आरजेडी के पास एम-वाई समीकरण है. 14.4 प्रतिशत यादव और 14.7 प्रतिशत मुस्लिम मिलकर 29.1 फीसदी वोट बनते हैं. जेडीयू के पास मोटे तौर पर कोईरी-कुशवाहा का करीब 12 फीसदी का वोटबैंक है. साथ ही दलित-महादलित के करीब 14 फीसदी वोट से काफी लोगों का समर्थन उसे मिलता रहा है.

माना जा रहा है कि उपेंद्र कुशवाहा और चिराग पासवान के एनडीए से अलग होने की वजह से नीतीश कुमार के वोटबैंक में सेंध लग गई. उपेंद्र के चक्कर में जेडीयू का (लव-कुश फार्मूला) टूटता नजर आ रहा है. जिसमें वो कोईरी और कुर्मी को साधते थे. महा दलित के काफी वोट लोक जन शक्ति पार्टी की वजह से कट गए. चिराग ने जेडीयू और बीजेपी के बागियों को चुनाव लड़वाया था.

उधर, आरजेडी को कमजोर करने में भी उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने बड़ी भूमिका निभाई. तेजस्वी यदि कुशवाहा को अपने साथ जोड़े रखते तो स्थितियां कुछ और होतीं. क्योंकि कम से कम 25 सीटों पर एक हजार से कम का जीत-हार का अंतर दिख रहा है.



इसे भी पढ़ें: पहली बार नीतीश कुमार को पछाड़कर आगे निकली बीजेपी!

खास बात यह है कि नीतीश कुमार के खिलाफ जनता में पनपे गुस्से को बीजेपी ने अपनी पार्टी पर नहीं आने दिया. उससे जेडीयू को ही नुकसान हुआ. अब छोटी पार्टी के रूप में क्या नीतीश कुमार सीएम बनेंगे, यह बड़ा सवाल है. फिलहाल जेडीयू 44 सीट पर सिमटती नजर आ रही है और इसे राजनीतिक विश्लेषक नीतीश कुमार की हार बता रहे हैं. जनादेश उनके खिलाफ दिख रहा है. वो सीएम बन जाएंगे तो भी पहले की तरह मजबूत नहीं रह जाएंगे.

बीजेपी का काम भी बहुत काम आया

बिहार में पीएम किसान निधि के तहत 76 लाख किसानों को पैसा दिया गया.  आयुष्मान भारत में 1,08,11,015 लोग जुड़े हुए हैं. यहां पर 85 लाख लोगों को उज्ज्वला स्कीम के लाभार्थी हैं. यह सब गांव और गरीबों से जुड़ी स्कीमें हैं. इनका बड़ा फायदा बीजेपी को मिलता नजर आ रहा है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज