बिहार: 500 रुपये जुर्माना नहीं दे पाया कैदी तो जेल में रहना पड़ा 9 दिन, RTI एक्टिविस्ट ने छुड़वाया

कैदी सिकंदर मांझी 500 रुपए की जुर्माने की राशि नहीं चुका पाया, जिसके कारण उसे 9 दिन अतिरिक्‍त जेल में रहना पड़ा. (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)
कैदी सिकंदर मांझी 500 रुपए की जुर्माने की राशि नहीं चुका पाया, जिसके कारण उसे 9 दिन अतिरिक्‍त जेल में रहना पड़ा. (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

गरीबी के कारण पहले कैदी सिकंदर मांझी जमानत प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ा सका, इसलिए विचाराधीन अवधि भी सजा में बदल गई. वहीं, 500 रुपये की जुर्माना राशि नहीं चुकाने पर उसे अतिरिक्‍त दिन जेल में रहना पड़ा.

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'अब गरीबी कहां है' का सवाल उठाने वालों को बिहार का एक वाकया जरूर देखना-समझना चाहिए. यहां सजा काट रहा एक कैदी 500 रुपये की भी जुगत नहीं कर सका, जिसके कारण उसे अतिरिक्‍त की सजा काटनी पड़ी. हालांकि, आरटीआई एक्टिविस्ट के प्रयास से उसकी रिहाई संभव हो पाई. हालांकि, इस सबके बीच उसे 9 दिन अतिरिक्‍त जेल में रहना पड़ा.

बताया जा रहा है कि गरीबी के कारण पहले कैदी सिकंदर मांझी जमानत प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ा सका, इसलिए विचाराधीन अवधि भी सजा में बदल गई. इसके लिए उसे एक साल जेल में गुजारना पड़ा. वहीं, 500 रुपये की जुर्माना राशि नहीं चुकाने पर उसे अतिरिक्‍त दिन जेल में रहना पड़ा.

4 जून को पूरी हुई थी सजा
दरअसल, सिकंदर मांझी ने 4 जून 2019 को 5 वर्ष 2 महीने की सजा पूरी कर ली थी, लेकिन वह 500 रुपये जुर्माना अदा करने में असमर्थ था. इस वजह से बरियारपुर थाना क्षेत्र के रहने वाले कैदी सिकंदर मांझी को जेल से आजादी नहीं मिल सकी. बता दें कि 500 जुर्माना नहीं देने पर न्यायालय ने 15 दिनों की अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा सुनाई थी. गौरतलब है कि 4 अप्रैल 2014 को बरियारपुर थाना क्षेत्र के बरियारपुर बाजार पुल से गुजर रहे सोनू को बिना वजह पीछे से पत्थर से मारकर सिर फोड़ने के मामले में सिकंदर मांझी को सजा सुनाई गई थी. उसके बाद से वह अब तक जेल में बंद था.
परिवार वाले भी नहीं आते थे मिलने


गरीबी और पैरवीकर्ता के अभाव में वह बाहर नहीं निकल पाया. जेल में समय गुजार रहे सिकंदर मांझी से मिलने उसके परिवार वाले भी नहीं आते थे, जिसके बाद आरटीआई एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता ओमप्रकाश पोद्दार ने संज्ञान लिया और मानसिक रूप से कमजोर सिकंदर को जेल से बाहर निकालने में मदद की. आरटीआई कार्यकर्ता ओमप्रकाश पोद्दार ने 7 जून को कानूनी प्रक्रिया शुरू की थी. इसके बाद कोर्ट ने डीएलएसए के सचिव से मिलने का सुझाव दिया था. 12 जून को पैनल अधिवक्ता के माध्यम से जुर्माना राशि चालान से माध्यम से जमा की गई. इसके बाद 13 जून को सिकंदर को जेल से रिहा किया जा सका.

रिपोर्ट- अरुण कुमार

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