बिहार की नई विधानसभा का ऐसा है जातीय समीकरण, राजपूत और भूमिहार विधायकों की संख्या में हुआ है इजाफा

पीएम मोदी के साथ नीतीश कुमार. (फाइल फोटो)
पीएम मोदी के साथ नीतीश कुमार. (फाइल फोटो)

बिहार विधानसभा (Bihar Assembly) 2020 में बिहार में नये जातीय समीकरण बने हैं, इस बार बिहार में सवर्ण विधायकों (Upper caste legislator) की संख्या खासी बढ़ी है. वहीं यादव, कुर्मी और मुसलमान विधायकों (Muslim MLAs) की संख्या में कमी आई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 13, 2020, 9:51 PM IST
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पटना. बिहार विधानसभा (Bihar Assembly) 2020 के चुनाव (Election) के बाद जो नतीजे सामने आए हैं इनके देखकर पता चलता है कि बिहार (Bihar) में सवर्ण वोटरों ने बीजेपी (BJP) को खास तौर पर लाभ पहुंचाया है. 2020के विधानसभा चुनावों (Assembly elections) के परिणाम को देखने के बाद पता चलता है कि इस बार हर चार विधायक में से एक सवर्ण विधायक (Upper caste legislator) बना है. इसके साथ ही अबकी बार यादव, कुर्मी और कुशवाहा समुदाय के विधायक पहले से कम हुये हैं.

बिहार में बीजेपी और जेडीयू का गठबंधन इस बार जेडीयू के लिए कोई खास नहीं रहा, लेकिन सवर्ण वोटरों के लिए यह सियासी समीकरण फायदेमंद साबित हुआ है.क्योंकि सवर्ण समुदाय से इस बार विधायकों की संख्या बढ़ी है. इसके साथ ही बिहार में बीजेपी-जेडीयू का समीकरण बिहार के यादव, कुर्मी और कुशवाहा जैसी जातियों के लिए नुकसानदेह साबित हुआ है. यही वजह है कि इन ओबीसी समुदाय से आने वाली जातियों के विधायक घट गए हैं.

बिहार की राजनीति में जिस तरह से एनडीए ने बीजेपी, जेडीयू, वीआईपी और HAM के साथ मिलकर अगड़ी और पिछड़ी जातियों को साधने का काम किया उसमें सबसे ज्यादा फायदा बाजेपी को मिला. बिहार विधानसभा में इस बार हर चार विधायक में से एक सवर्ण है. राज्य की 243 विधानसभा सीटों में से करीब 64 विधायक अगड़ी जातियों से चुनकर आए हैं.
बिहार में 28 राजपूत बने विधायक
2020 के विधानसभा चुनाव में कुल 28 राजपूत विधायक जीतकर आए हैं, जबकि 2015 में 20 राजपूत विधायक जीते थे. पिछली बार के मुकाबले इस बार आठ राजपूत विधायक ज्यादा जीते हैं. बीजेपी ने इस बार 21 राजपूतों को टिकट दिया था, जिनमें से 15 लोग जीते हैं. जेडीयू के 7 राजूपत प्रत्याशियों में से महज 2 ही जीत सके है. वहीं दो वीआईपी के टिकट पर जीते हैं. इस तरह से एनडीए के 29 टिकट में से 19 राजपूत विधानसभा पहुंचे हैं.



महागठबंधन ने 18 राजपूतों को दिया टिकट
तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन ने इस बार 18 राजपूतों को टिकट दिया था, जिनमें से महज 8 उम्मीदवार ही जीत सके हैं. वहीं आरजेडी ने इस बार 8 राजपूतों को टिकट दिया था, जिनमें से सात उम्मीदवार जीते हैं. कांग्रेस के 10 में से एक राजपूत को ही जीत मिली है. इसके अलावा एक निर्दलीय राजपूत विधायक ने जीत दर्ज की है. बता दें कि पिछले चुनावों में बीजेपी के 9, आरजेडी के 2, जेडीयू के 6 और कांग्रेस से तीन राजपूत विधायक जीते थे. ऐसे में बीजेपी और आरजेडी में राजपूतों की जीत में भी इजाफा हुआ है तो जेडीयू में कमी आई है.

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बिहार में बढ़ें भूमिहार विधायक
बिहार चुनाव में इस बार कई दलों से 21 भूमिहार विधायक जीते हैं, जबकि 2015 में 17 विधायक जीते थे. इस बार सबसे ज्यादा विधायक बीजेपी से जीते हैं. बीजेपी के 14 भूमिहार प्रत्याशियों में से 8, जेडीयू के 8 भूमिहार प्रत्याशियों में से 5 जीते हैं. HAM से एक उम्मीदवार जीता है. इस तरह से एनडीए से 14 भूमिहार विधायक बने हैं. वहीं, महागठबंधन के टिकट पर 6 भूमिहार विधायक जीते हैं. इनमें सबसे ज्यादा कांग्रेस के 11 प्रत्याशियों में से 4 जबकि आरजेडी और सीपीआई से 1-1 विधायक ने जीत दर्ज की है. 2015 में बीजेपी से 9, जेडीयू से 4 और कांग्रेस से 3 भूमिहार विधायक चुने गए थे.

ब्राह्मण विधायक भी बढ़े
बिहार में इस बार 12 ब्राह्मण विधायक जीते हैं, जबकि 2015 में 11 विधायक जीते थे. इस बार बीजेपी के 12 ब्राह्मण कैंडिडेटों में से 5 को जीत मिली है और जेडीयू के दोनों ब्राह्मण प्रत्याशी जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं. वहीं, कांग्रेस के 9 ब्राह्मणों में से 3 को जीत मिली है, जबकि आरजेडी के 4 में से 2 विधायत जीते हैं. साल 2015 के चुनाव में 11 ब्राह्मण जीते थे, जिनमें 3 बीजेपी, 1 आरजेडी, 2 जेडीयू और 4 कांग्रेस से थे. वहीं, कायस्थ समुदाय से तीन विधायकों ने जीत दर्ज की है. ये सभी बीजेपी के टिकट पर जीते हैं. 2015 में बीजेपी से दो और एक कांग्रेस से कायस्थ विधायक जीते थे.

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यादव विधायकों की संख्या घटी
बिहार में इस बार के विधानसभा चुनावों में यादव विधायकों की संख्या की संख्या घटा है. इस बार यह संख्या 2010 के आंकड़े पर पहुंच गई है. इस बार चुनाव में विभिन्य दलों से कुल 52 यादव विधायक जीते हैं, जबकि 2015 में 61 विधायक जीतकर आए थे. .

कुर्मी-कुशवाहा विधायकों में आई कमी
2020 के बिहार चुनाव में यादव ही नहीं बल्कि कुर्मी और कुशवाहा विधायकों की संख्या भी घटी है. इस बार 9 कुर्मी विधायक ही जीते हैं, जबकि 2015 में 16 कुर्मी विधायक जीते थे. इस बार जेडीयू के 12 कुर्मी प्रत्याशियों में से 7 ही जीते हैं. जबकि बीजेपी के टिकट पर दो कुर्मी विधायक चुने गए हैं. आरजेडी और कांग्रेस से एक भी कुर्मी नहीं जीत सका. 2015 में जेडीयू से 13 जबकि बीजेपी, कांग्रेस और कांग्रेस से एक-एक कुर्मी विधायक ही जीते थे.

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मुस्लिम विधायकों की संख्या घटी
बिहार में मुस्लिम विधायकों की संख्या भी घटकर दस साल पीछे चली गई है. इस बार के चुनाव में 19 मुस्लिम विधायक जीते हैं, जबकि 2015 में 24 मुस्लिम विधायक चुने गए थे. आरजेडी के टिकट पर सबसे ज्यादा 8 मुस्लिम जीते हैं, जबकि दूसरे नंबर 5 मुस्लिम विधायक इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन से चुने गए हैं. इसके अलावा कांग्रेस के चार, सीपीआई (माले) से एक और एक बसपा के टिकट पर जीत हासिल की है जबकि जेडीयू से एक भी मुस्लिम नहीं जीत सका. वहीं, 2015 के चुनाव में आरजेडी से 11, कांग्रेस से 7, जेडीयू से 5 और सीपीआई (माले) से एक मुस्लिम विधायक चुने गए थे.
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