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3 दशक से शास्त्रीय संगीत की अलख जगा रहे हैं देवेंद्र, लोगों को मुफ्त में देते हैं शिक्षा

KC Kundan | News18 Bihar
Updated: October 28, 2019, 6:31 PM IST
3 दशक से शास्त्रीय संगीत की अलख जगा रहे हैं देवेंद्र, लोगों को मुफ्त में देते हैं शिक्षा
शास्त्रीय संगीत को बनाया अपना जीवन.

जमुई जिले के 58 वर्षीय देवेंद्र सिंह (Devendra Singh) लगातार तीन दशक से शास्त्रीय संगीत (Classical Music) की अलख जिले के ग्रामीण इलाकों में जगा रहे हैं. जबकि वह ग्रामीण इलाके के युवाओं को मुफ्त शिक्षा देते हैं, ताकि वह अपना जीवन बेहतर बना सकें. वह जिले के एकमात्र यह शख्स हैं जो शास्त्रीय संगीत के जानकार हैं.

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जमुई. संगीत से हर किसी को प्यार होता है. कई लोग तो ऐसे होते हैं जो संगीत को ही अपनी जिंदगी बना लेते हैं. ऐसे ही एक शख्‍स हैं जमुई जिले के 58 वर्षीय देवेंद्र सिंह (Devendra Singh). ये लगातार तीन दशक से शास्त्रीय संगीत (Classical Music) की अलख जिले के ग्रामीण इलाकों में जगा रहे हैं. दरअसल, बचपन से ही संगीत के प्रति लगाव रखने वाले सिंह ने खुद प्रशिक्षण लिया और फिर जिले के ग्रामीण इलाके के युवाओं को मुफ्त में शास्त्रीय संगीत की शिक्षा देना शुरू किया. हालांकि वह आर्थिक तंगी और गरीबी को झेलते हुए गांव के अपने घर के बरामदे में ही संगीत का स्कूल लगाते हैं. जबकि प्रशिक्षण लेने वाले छात्र भी कहते हैं कि अगर गुरुजी नहीं होते तो वे लोग संगीत की शिक्षा नहीं ले पाते.

जिले में मिली खास पहचान
जमुई जिले के खैरा प्रखंड के एक छोटे से गांव सिंगारपुर के रहने वाले देवेंद्र सिंह की जिले खास पहचान है. वह एकमात्र यह शख्स हैं जो शास्त्रीय संगीत के जानकार हैं. यही नहीं, जानकार होने के साथ-साथ वह गुरु की भूमिका निभाते हुए ग्रामीण इलाके के लड़के-लड़कियों को मुफ्त में शास्त्रीय संगीत की शिक्षा देते हैं. दरअसल, एक साधारण परिवार से आने वाले देवेंद्र सिंह को बचपन से ही संगीत से लगाव था. संगीत के लगाव के कारण अपनी जिद से उन्‍होंने खगड़िया के पंडित नागेश्वर ठाकुर से प्रशिक्षण लिया था. शास्त्रीय संगीत के प्रशिक्षण के बाद प्रयागराज संगीत समिति इलाहाबाद से उन्होंने प्रभाकर की डिग्री भी हासिल की.

बनाया जीवन का मकसद

प्रभाकर की डिग्री हासिल करने के बाद शास्त्रीय संगीत को ही अपनी जिंदगी बना कर ग्रामीण इलाकों में शास्त्रीय संगीत को बढ़ावा देने की ठान ली जिले के ग्रामीण इलाके खास करके खैरा प्रखंड के गांव के लड़के-लड़कियों को इन्होंने मुफ्त में शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया. लगातार तीन दशक से यह लोगों को शास्त्रीय संगीत सिखाते आ रहे हैं. चाहे वह सा रे गा मा पा के बोल हों या फिर हारमोनियम या नाल हो या फिर तबला. इनके सिखाए हुए है कई लोग तो अच्छी जगहों पर पहुंच चुके हैं. कई तो टेलीविजन के रियलिटी शो में भी शामिल हुए.

देवेंद्र सिंह ने कही ये बात
तीन दशक से मुफ्त में ग्रामीण इलाकों में शास्त्रीय संगीत की शिक्षा देने वाले देवेंद्र सिंह का कहना है कि उन्होंने बीड़ा उठाया है कि शास्त्रीय संगीत को आगे बढ़ाएं. शास्त्रीय संगीत के बिना कोई भी संगीत पूरा नहीं है.यकीनन जो लोग शास्त्रीय संगीत को नहीं जानते वह कभी भी संगीत को पूरी तरह से नहीं समझ पाते और न ही संगीत के क्षेत्र में वो आगे बढ़ सकते हैं. उनका ध्येय है कि वह गांव के बच्चों को शास्त्रीय संगीत की शिक्षा दें, जिसके लिए वह लगातार काम कर रहे हैं. गरीबी और आर्थिक तंगी से जूझने के बाद भी वह अपने घर के बरामदे में शास्त्रीय संगीत की क्लास लगाते हैं. जबकि उन्होंने खुद की 50 धुनें बनाई हैं और पैसे होने पर उनकी रिकार्डिंग करवाएंगे.
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गांव की हर शाम...
संगीत सीखने वाले छात्र बिट्टू लाल बेदर्दी और पिंकू कुमार का कहना है कि वे लोग आर्थिक कमजोरी के कारण शास्त्रीय संगीत सीखने दूसरे शहर नहीं जा पाते. गांव में ही गुरु जी मिल गए, जिससे उन्हें संगीत की शिक्षा मिल गई और वो भी मुफ्त में. संगीत से लगाव रखने वाली छात्रा निशु कुमारी का कहना है कि वे लोग बहुत खुशनसीब हैं कि ग्रामीण स्तर पर भी एक गुरुजी हैं जो हम लोगों को संगीत की शिक्षा मुफ्त में देते हैं. गांव में जब सुबह शाम संगीत की धुनें बजती हैं यानी हारमोनियम, तबला और नाल से जब मधुर संगीत निकलता है तो पूरे गांव के लोगों का मन भी झूमने लगता है.

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First published: October 28, 2019, 6:20 PM IST
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